क्यों कम हुई है राज्यों के कर्ज लेने की सीमा?

Updated on 29-05-2023 09:40 PM
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने एक बार फिर से राज्यों की लोन लेने की सीमा घटा दी है। इस वजह से राज्यों को निश्चित रूप से दिक्कत होगी। केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने तो इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कल इस बारे में उन्होंने एक बयान भी दिया है। उन्होंने कहा है कि वह इस बारे में वह केंद्र सरकार से डिटेल स्टेटमेंट मांगेगे। हम यहां आपको बता रहे हैं कि आखिर राज्यों के बीच इस बारे में क्यों बवाल मचा हुआ है। आखिर राज्य क्यों चाहते हैं ज्यादा लोन या कर्ज लेना और क्यों केंद्र सरकार उनसे कम लोन लेने के लिए कहती है?

लोन बढ़ा तो खतरनाक

लोन की बढ़ती राशि राज्यों की अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक होती है। यदि कोई राज्य ज्यादा लेता है, तो इससे थोड़े समय के लिए तो उसके यहां डेवलपमेंटल एक्टिविटीज बढ़ जाती है। लेकिन लंबे अंतराल में देखें तो इससे उसके विकास की गति कुंद पड़ जाती है। दरअसल, किसी भी राज्य के विकास पर का आकलन उसके सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी से किया जा सकता है। जब किसी राज्य में कर्ज का बोझ ज्यादा होगा तो उसका सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी की विकास दर घट जाएगी। साल 2020-21 में तो सभी राज्यों का कुल कर्ज 15 वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच चुका था। राज्यों का औसत कर्ज उनके जीडीपी के मुकाबले 31 फीसदी से ऊपर पहुंच गया था। इसमें सभी राज्यों को राजस्व घाटा 17 साल के उच्च स्तर, 4.2% तक पहुंच गया था।

किस राज्य में सबसे ज्यादा कर्ज

हम यदि राज्यों के ग्रॉस डॉमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) की बात करें तो साल 2021 में कर्ज और जीएसडीपी का अनुपात सबसे ज्यादा पंजाब में था। उस साल तक पंजाब अपने ग्रॉस डॉमेस्टिक प्रोडक्ट से 53.3 फीसदी ज्यादा लोन ले चुका था इसी तरह राजस्थान का 39.8 फीसदी पश्चिम बंगाल का 38.8 फीसदी और केरल का 38.3 फीसदी था।

2020 में बढ़ी थी सीमा


सरकार ने कई राज्यों की मांग पर साल 2020 में राज्यों की लोन लेने की सीमा को बढ़ाकर 5 फीसदी करने की घोषणा की थी। उसके बाद राज्य अपने ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट के 5 फीसदी तक कर्ज ले सकते थे। लेकिन बाद में यह सीमा 3:50 फीसदी कर दी थी। अब इसे और कम कर दिया गया है।

सबसे ज्यादा कर्ज लेने वाले राज्य कौन कौन

भारतीय रिज़र्व बैंक की ‘राज्य वित्त प्रबंधन 2021-22 के बजटों का एक अध्ययन’ नामक रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा कर्ज लेने वाले राज्य ये हैं..

पश्चिम बंगाल 5626972 करोड़ रुपये
राजस्थान 477177.2 करोड़ रुपये
आंध्र प्रदेश 398903.6 करोड़ रुपये
केरल 335989.1 करोड़ रुपये
पंजाब 398903.6 करोड़ रुपये

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