नोएडा-ग्रेटर नोएडा में किन होमबायर्स की होगी रजिस्ट्री और किन्हें करना पड़ेगा इंतजार यहां जानिए पूरी बात

Updated on 22-12-2023 02:17 PM
नई दिल्ली: नोएडा-ग्रेटर नोएडा के लाखों होमबायर्स के लिए अच्छी खबर है। यूपी कैबिनेट ने फंसे हुए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के बारे में अमिताभ कांत कमेटी की सिफारिशों को लागू करने का फैसला किया है और इस बारे में जीओ भी जारी कर दिया गया है। इसमें कई चीजें स्पष्ट हो गई हैं। इससे रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे हजारों होमबायर्स को राहत मिली है। लेकिन इसका फायदा कम ही होमबायर्स को मिलेगा। उन्हीं होमबायर्स की रजिस्ट्री का रास्ता साफ होगा जिनके बिल्डर पर अथॉरिटी का बहुत ज्यादा बकाया नहीं है। ऐसे बायर्स की संख्या 50 हजार के करीब है। जानिए इससे जुड़े हर सवाल का जवाब

किन होमबायर्स को होगा फायदा?यूपी कैबिनेट के फैसले से केवल उन्हीं होमबायर्स की रजिस्ट्री का रास्ता साफ होगा, जिनके बिल्डर पर अथॉरिटी का बहुत ज्यादा बकाया नहीं है। ऐसे बायर्स की संख्या 50 हजार के करीब है। बिल्डर पर कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत अथॉरिटी को देने के बाद फ्लैटों की रुकी हुई रजिस्ट्री शुरू हो सकेगी।

किन लोगों को नहीं मिलेगा फायदा?जिन बायर्स के प्रोजेक्ट कोर्ट के अधीन हैं, उन्हें इस पॉलिसी का फायदा नहीं मिलेगा। इनमें आम्रपाली, जेपी और यूनिटेक जैसे कई बड़े बिल्डर शामिल हैं। साथ ही स्पोर्ट्स सिटी के प्रॉजेक्टों में फंसे बायर्स को भी इस पॉलिसी का कोई लाभ नहीं मिलेगा। बड़े बकाएदार बिल्डर के प्रोजेक्टों में रजिस्ट्री शुरू होने के आसार अभी भी बेहद कम हैं।

फंसे प्रोजेक्ट पर कैसे होगा काम?माना जा रहा है कि बिल्डरों को छूट देने के जो प्रावधान किए गए हैं उनसे बिल्डरों का फंड का क्राइसिस थोड़ा कम होगा और फंसे हुए प्रॉजेक्टों में काम शुरू करने की बिल्डर हिम्मत जुटा सकेंगे।
कैसे शुरू होगी रजिस्ट्री?
बिल्डर पर कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत अथॉरिटी को देने के बाद फ्लैटों की रुकी हुई रजिस्ट्री शुरू हो सकेगी। हालांकि, यह प्रावधान तीनों अथॉरिटी में पहले से लागू है, लेकिन पहले बिल्डरों को ब्याज में छूट और तीन साल का निशुल्क एक्टेंशन नहीं मिल रहा था। इसके चलते बिल्डर 25 प्रतिशत पैसा जमा नहीं कर पा रहे थे।

बड़े बिल्डर्स की क्या है मुश्किल?अब कम फंसे हुए प्रोजेक्टों वाले बिल्डर इसे आसानी से कर सकेंगे, क्योंकि उन्हें करोड़ों की छूट मिल जाएगी, लेकिन 700 करोड़ से अधिक बकाया वाले बिल्डरों के लिए यह अभी भी काफी मुश्किल है। नोएडा में रजिस्ट्री शुरू होने का करीब डेढ़ लाख बायर्स इंतजार कर रहे हैं। इन में करीब 50 हजार प्लैटों की रजिस्ट्री अब शुरू होने के चांस बढ़ गए हैं।

बिल्डर नहीं बना पा रह प्रोजेक्ट तो क्या होगा?यदि बिल्डर किसी प्रोजेक्ट को पूरा नहीं कर पा रहा है तो उसके लिए को-डिवेलपर लाने की प्रक्रिया को आसान दिया गया है। साथ ही प्रोजेक्ट सरेंडर करने की प्रक्रिया भी काफी आसान हो गई है। उसे पूरे करने के दूसरे रास्ते आसानी से अब निकाले जा सकते हैं।

बिल्डरों को किस तरह की छूट मिली है?बिल्डरों का डायरेक्ट छूट का सबसे बड़ा प्रावधान तीन साल का निशुल्क टाइम एक्सटेंशन दिए जाने का किया गया है। इससे बिल्डर सीधे काम शुरू कर सकेगा। पहले टाइम एक्सटेंशन लेने के लिए अथॉरिटी को करोड़ों देना पड़ रहा था। इसलिए बिल्डर प्रोजेक्ट को बीच में छोड़ रहे थे।
कैसे चलेगा बकाये का पता?बिल्डरों के लिए परमिशन टू मार्जेग की शर्तों को आसान कर दिया गया है। इससे यह फायदा होगा कि बिल्डरों को प्रॉजेक्ट शुरू करने के लिए बैंकों और मार्केट से लोन मिल सकेगा।बिल्डरों पर बकाया राशि की पुनर्गणना हो सकेगी, जिससे बिल्डरों को अपना वर्तमान में फाइनल बकाया पता चल सकेगा।
फंड का क्राइसिस कैसे होगा दूर?अतिरिक्त एफएआर की प्रक्रिया भी बिल्डरों के लिए थोड़ा आसान हो गई है, जिससे बिल्डर अतिरिक्त फ्लैट प्रोजेक्ट में बना सकेंगे और उन्हें बेचकर अधूरे फ्लैटों पूरा कर सकेंगे। इससे फंड का क्राइसिस थोड़ा कंट्रोल होगा।
कैसे होगा बकाये का पेमेंट?बिल्डर पर 100 करोड़ का बकाया राशि एक साल में देने, 500 करोड़ का बकाया राशि दो साल में देने और 500 करोड़ से अधिक की बकाया राशि उससे ज्यादा वर्षों में देने का प्रावधान किया गया है। इससे बिल्डरों पर जल्दी अथॉरिटी को पैसा देने का दबाव नहीं रहेगा।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?NAREDCO के नेशनल प्रेजिडेंट जी हरि बाबू ने कहा कि यह फैसला एनसीआर के 2.4 लाख होमबायर्स के लिए वरदान साबित होगा। इससे न केवल होमबायर्स के लिए रजिस्ट्री का रास्ता साफ होगा बल्कि पूरे रियल एस्टेट सेक्टर में पॉजिटिव मैसेज जाएगा।


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