
शादी के बाद जेआरडी टाटा ने हनीमून मनाने के लिए कंचनजंगा की चोटियों को करीब से देखने का फैसला लिया। दिसंबर की सर्दियों में वे दार्जिलिंग गए थे। उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि वहां कितनी ठंड हो सकती है। दार्जिलिंग के सभी टूरिस्ट सुबह 4:00 बजे टाइगर हिल पर सूर्योदय देखने के लिए जाते हैं। इसकी जगह टाटा घोड़े पर सवार होकर टोंगल और संदकफू के 2 दिन के सफर पर निकल गए। वहां इतनी ठंड थी कि उन्हें चूल्हे में लकड़ी जलाते हुए रात बितानी पड़ी। लेकिन आग जलाने के बावजूद ठंड बहुत ज्यादा लग रही थी। इस पर जेआरडी टाटा ने अपने कपड़ों के अंदर अखबार की तह भर ली ताकि खुद को गर्म रख सकें।
जेआरडी टाटा रतन दादाभाई टाटा और सुजैन ब्रियरे की दूसरी संतान थे। उनकी मां भारत में कार चलाने वाली पहली महिला थीं। वह फ्रांसीसी थीं, इसलिए जेआरडी टाटा का अधिकांश बचपन फ्रांस में ही बीता था। एयरक्राफ्ट में उनकी बड़ी दिलचस्पी थी। वे हवा में उड़ना पसंद करते थे। 15 साल की उम्र में जेआरडी ने पायलट बनने का फैसला किया था। लेकिन उन्हें 9 साल तक अपने सपने को पूरा करने के लिए इंतजार करना पड़ा। बंबई में जब पहला फ्लाइंग क्लब खुला तो वह 24 साल के हो चुके थे। 1929 में उन्हें पायलट का लाइसेंस मिला। भारत में पहली बार किसी को पायलट का लाइसेंस जारी किया गया था। इस तरह जेआरडी टाटा भारत में सिविल एविएशन के पितामह बन गए।