अविजीत घोष, नई दिल्ली: 1971 की बात है। भारत को आजाद हुए 24 साल हो गए थे। खूंखार गेंदबाजों और धुरंधर बल्लेबाजों से भरी वेस्टइंडीज पर टेस्ट सीरीज में 1-0 की जीत ने भारतीय क्रिकेट इतिहास को नया आयाम दिया था। हमारे सहयोगी अखबार 'टाइम्स ऑफ इंडिया' ने भारत की विजय के लिए 'इंडियाज फाइनेस्ट ऑवर' शानदार हेडलाइन दी थी। वह रेडियो का दौर था और विंडीज में सफलता के बाद भरतीय क्रिकेट टीम अजीत वाडेकर की कप्तानी में अब इंग्लैंड टेस्ट खेलने पहुंची। सीरीज में यहां ओवल टेस्ट में जो कुछ हुआ वो आज भी भारतीय क्रिकेट टीम और फैंस के लिए रौंगटे खड़े कर देना वाला अनुभव है। अगर आज से शुरू हो रहे भारतीय टीम को आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम करना है, ऑस्ट्रेलिया को हराना है तो कुछ वैसा ही करिश्मा रोहित सेना को करना होगा।
चंद्रशेखर का ड्रीम स्पैल
1971 के टेस्ट के पहले तीन दिनों में इंग्लैंड का पलड़ा भारी रहा, लेकिन लेग स्पिनर ने पासा पलट दिया। अजीत वाडेकर ने अपनी आत्मकथा 'माई क्रिकेटिंग इयर्स' में लिखा है- इंग्लैंड अपने लेग ब्रेक और अपने टॉप स्पिनर्स के बीच अंतर करने में असमर्थ था। भागवत चंद्रशेखर का करिश्माई स्पैल 6/38 आज भी भारतीय इतिहास सबसे यादगार पलों में से एक है। उनकी दीवानगी का आलम यह था कि मैच समाप्त होने के बाद एक भारतीय रेस्तरां के नए मेनू में 'चंद्रशेखर सूप' पेश किया गया।
सोलकर का सुपर कैच
1971 की सीरीज के दौरान एलन नॉट ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से भारतीय टीम और फैंस की नाक में दम कर रखा था। ओवल में वाडेकर जानते थे कि विकेटकीपर बल्लेबाज को जल्दी आउट करना जरूरी था। पहली पारी में उन्होंने 90 रन ठोके तो निराशा छा गई। दूसरी पारी में उनका पैंतरा काम कर गया। वेंकटराघवन की गेंद पर नॉट (1) धांसू कैच फॉरवर्ड शॉर्ट-लेग पर तैनात सोलकर ने हवा में गोता लगाते हुए लपका और टीम इंडिया जश्न में डूब गई। इस बारे में सोलकर ने बाद में बताया था- मैं गोता लगाते हुए किसी तरह गेंद तक पहुंच गया। जब पकड़ा तो मेरी उंगलियों के आखिरी पोर में गेंद आई। वह गिर भी सकती थी कि मैंने जैसे-तैसे गेंद को लपक लिया और वेंकट ने भारत को वह विकेट दिया जिसकी उसे सबसे ज्यादा जरूरत थी। उन्होंने 1979 में इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया के लिए एक लेख, 'माई बेस्ट कैच' में लिखा था।
गावस्कर का सुपर डबल टन
1979 के ओवल टेस्ट में जब भारत ने चौथी पारी में इंग्लैंड के 438 रनों का पीछा करना शुरू किया तो भारत की जीत के लिए सट्टेबाजी की संभावना लगभग 500:1 थी। टेस्ट क्रिकेट के 102 साल के इतिहास में किसी भी टीम ने इतने बड़े लक्ष्य का पीछा नहीं किया था। गजब का रोमांच था। रेडियो पर इसे अनुभव किया जा सकता था। सुनील गावस्कर के स्मारकीय 221 ने लगभग असंभव को संभव कर दिया। मिहिर बोसीन द हिस्ट्री ऑफ इंडियन क्रिकेट ने लिखा- यह वह पारी थी जिसमें उनके ऊपर अंग्रेजी क्रिकेट के सबसे माहिर खिलाड़ी मुहर लग गई थी। अंत में कप्तान माइक ब्रियरली की नापाक इरादों (जानबूझकर ओवर धीरे करना) ने भारत को जीत से दूर कर दिया। उसके दो विकेट बचे थे, जबकि 9 रनों का अंतर था। यह मैच ड्रॉ रहा था, लेकिन किसी जीत से कम नहीं थी यह।
1971, 1979 ही नहीं, रोहित के मन में होगी 2021 वाली करिश्माई जीत भीअब बात करते हैं भारतीय टीम। आज जब रोहित सेना जब मैदान पर उतरेगी तो उसके दिमाग में 1971, 1979 के अलावा इंग्लैंड से पिछली भिड़ंत भी होगी। जहां 2021 में रोहित शर्मा ने दूसरी पारी में शतक जड़ा था और भारतीय टीम ने यह मुकाबला अपने नाम किया था। टेस्ट इतिहास में यह सिर्फ दूसरा मौका था जब भारतीय टीम ने द ओवल में टेस्ट जीता। अब रोहित शर्मा कप्तान हैं और उनका फाइनल नहीं हारने का करिश्माई रिकॉर्ड भी है। ऐसे में उनकी नजरें पहली बार आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप, जबकि 10 वर्ष बाद आईसीसी ट्रॉफी जीतने पर होगी।