द्रुज्बा ऑयल पाइपलाइन पर यूक्रेन का हमला बढ़ाएगा पुतिन की टेंशन, रूसी उर्जा निर्यात की है लाइफलाइन, जानें इतिहास

Updated on 08-09-2025 03:53 PM
मॉस्को: यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध तेज हो गया है। रूस की ओर से शनिवार रात को यूक्रेन पर 800 से ज्यादा ड्रोन और मिसाइल दागे गए। इस दौरान कीव में सरकारी इमारतों को भी ड्रोन से निशाना बनाया गया। इसके बाद जवाबी हमला करते हुए यूक्रेनी फोर्स ने रूस के ब्रायंस्क एरिया में द्रुज्बा ऑयल पाइपलाइन पर अटैक किया है। इस पाइपलाइन को नुकसान रूसी राष्ट्रपति पुतिन की टेंशन बढ़ा सकता है।

यूक्रेन ने अपने हमले में रूस की द्रुज्बा ऑयल पाइपलाइन में भारी नुकसान का दावा किया है। सोवियत युग की यह पाइपलाइनबेलारूस-यूक्रेन से होकर गुजरती है और स्लोवाकिया, कजाकिस्तान से जर्मनी तक तेल भेजती है। ऐसे में इसका रूस की अर्थव्यवस्था के लिहाज से बेहद खास स्थान है। रूसी उर्जा निर्यात की लाइफलाइन इस पाइपलाइन को नुकसान से तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

पाइपलाइन पर यूक्रेन की नजर

रूस ने अपनी पाइपलाइन को नुकसान की पुष्टि नहीं की गई है। यह ट्रांजिट पाइपलाइन हंगरी और स्लोवाकिया को रूसी तेल की आपूर्ति करती है। ये देश रूस से ऊर्जा आपूर्ति खरीदना जारी रखे हुए हैं। 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद यूरोपीय संघ के देशों ने रूस से संबंध तोड़ लिए हों लेकिन इन देशों को लगातार आपूर्ति हो रही है।
यूक्रेन ने कहा है कि रूस की ऊर्जा सुविधाओं पर उसके हमले का उद्देश्य मास्को के युद्ध के समग्र प्रयास को कमजोर करना है। यूक्रेन के द्रुज्बा तेल पाइपलाइन पर हमले के कारण हालिया महीनों में हंगरी और स्लोवाकिया को रूस के तेल शिपमेंट कई बार बाधित हुए हैं। हालांकि रूस ने हर बार इस नुकसान से उबरते हुए अपनी तेल आपूर्ति फिर से बहाल की है।

क्यों खास है द्रुज्बा

द्रुज्बा पाइपलाइन दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल पाइपलाइन नेटवर्कों में से एक है। सभी ब्रांच समेत इस पाइपलाइन प्रणाली की कुल लंबाई करीब 5500 किलोमीटर है। इसकी शुरुआत रूस के अल्मेत्येवस्क से होती है। यहां साइबेरिया, यूराल और कैस्पियन सागर से कच्चा तेल ले जाने वाली पाइपलाइनें मिल जाती हैं।

द्रुज्बा रूस से बेलारूस के मोजिर जाती है। यहां से दो भागों में बंटकर एक लाइन बेलारूस और पोलैंड होते हुए जर्मनी तक जाती है। दूसरी लाइन यूक्रेन से होकर गुजरती है और स्लोवाकिया और हंगरी तक जाती है। द्रुज्बा की क्षमता 1.2-1.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। इसे बढ़ाकर 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन किया जा सकता है।

द्रुज्बा पाइपलाइन की शुरुआत

सोवियत संघ ने सहयोगी देशों तक कच्चे तेल की पाइपलाइन बनाने का निर्णय दिसंबर, 1958 को प्राग में आर्थिक सहायता परिषद की बैठक में लिया गया था। इसका निर्माण कार्य 1960 में शुरू हो गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इस पाइपलाइन में करीब 40 करोड़ रूबल की लागत आई।

इसमें 7,30,000 टन पाइप बिछाने के लिए 1.5 करोड़ घन मीटर मिट्टी हटाई गई। द्रुज्बा पाइपलाइन मध्य यूरोप तक पहुंचने के लिए 45 नदियों को पार करती है। यह पूरी पाइपलाइन 1964 में चालू हुई। इसके बाद से लगातार चल रही है। हालांकि यूक्रेन युद्ध के बाद इस पर काफी फर्क पड़ा है।


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