
14 साल पहले नियुक्ति में गड़बड़ी का मामला-
बताया जाता है कि चिकित्सक दंपती की नियुक्ति करीब 14 वर्ष पूर्व मेडिकल कालेज अस्पताल में की गई थी। बायोकमेस्ट्री विभाग में नियुक्ति के बाद दोनों की वांछित शैक्षणिक योग्यता पर सवाल खड़े किए जा रहे थे। दोनों के खिलाफ शिकायतें भी की गई थीं। विभागीय जांच हुई तो पता चला कि डा. गुप्ता व डा. साहू बायोकेमेस्ट्री विभाग में सहायक प्राध्यापक पद की अर्हता नहीं रखते थे, उन्हें तीन वर्ष के अध्यापन का भी अनुभव नहीं था, जिसके बाद तथ्यों से पता चला कि दोनों का चयन प्रोविजनली एवं सशर्त की गई थी, परंतु तत्कालीन एमआइसी से नियुक्ति की अनुमति न मिलने पर चयन प्रक्रिया शून्य हो गई थी। इसके बाद दोनों की नियुक्ति सेवा शर्तों व स्वास्थ्य हितों के खिलाफ हो गई।
EOW को छापेमारी में मिली थी करोड़ों की संपत्ति
यहां बता दें कि मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विवि में डिप्टी रजिस्ट्रार रहीं डॉ. तृप्ति गुप्ता की प्रतिनियुक्ति इसी साल फरवरी में समाप्त कर उन्हें मूल विभाग नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया था. इसके बाद 16 मार्च 2022 को आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) की टीम ने दंपति के घर पर छापा मारकर कार्रवाई की थी, जिसमें आलीशान बंगले के साथ करोड़ों की संपत्ति होने की बात सामने आई थी.
नियमों के विरुद्ध पाई गई दंपति की नियुक्ति
वहीं, अधिष्ठाता कार्यालय द्वारा शुक्रवार को जारी आदेश के अनुसार प्रोफेसर दंपति के विरुद्ध विभागीय जांच बिठाई गई थी. जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम-1966 के नियम-10 (आठ) के अंतर्गत सेवा से पृथक करने की कार्रवाई की है. डीन के नाम से जारी आदेश के अनुसार विभागीय जांच अधिकारी ने जांच में पाया कि डॉ. अशोक साहू और डॉ. तृप्ति गुप्ता (सहायक प्राध्यापक बायोकेमिस्ट्री विभाग) की अर्हता नहीं रखते थे. उनके पास नियमानुसार 3 वर्ष का अध्यापन अनुभव भी नहीं था.
जांच में यह बात भी सामने आई कि दोनों का चयन प्रोविजनली एवं सशर्त था और एमसीआई से अनुमति नहीं मिलने के बाद स्वयं शून्य हो गया था. शून्य चयन के आधार पर डॉ. अशोक साहू और डॉ. तृप्ति गुप्ता को नियुक्ति नहीं दी जा सकती थी.
कोर्ट में लंबित है प्रकरण
इस कार्रवाई को लेकर प्रोफेसर दंपति के वकील ब्रम्हानंद पांडेय के मुताबिक
विभागीय जांच का मामला हाईकोर्ट में लंबित है. प्रकरण पर शुक्रवार को ही
सुनवाई नियत थी, लेकिन मेडिकल प्रशासन ने कोर्ट के आदेश का इंतजार न करते
हुए सुबह 10 बजे ही कार्रवाई कर दी.