ट्रंप के टैरिफ भारत के लिए कड़वी दवा... दिग्‍गज अर्थशास्‍त्री की बड़ी भविष्‍यवाणी, ये खतरा बढ़ाएगा ताकत

Updated on 10-03-2025 03:17 PM
नई दिल्‍ली: आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ बढ़ाने का खतरा भारत के लिए पूरी तरह बुरा नहीं है। यह मोदी सरकार को व्यापार बाधाओं को कम करने के लिए प्रेरित कर रहा है। इससे प्रतिस्पर्धा और विकास को बढ़ावा मिलेगा। द‍िग्‍गज अर्थशास्‍त्री के अनुसार, अधिक प्रतिस्पर्धा का मतलब है कि भारतीय कंपनियों को वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों का सामना करने के लिए अपने पैरामीटर्स को ऊपर उठाना होगा। इससे बेहतर नौकरियां और एक बड़ा मैन्‍यूफैक्‍चरिंग बेस बनेगा। ट्रंप ने 2 अप्रैल से तमाम देशों पर जवाबी टैरिफ (रेसिप्रोकल टैरिफ) लगाने की धमकी दी है। इससे अमेरिका में आयात पर टैक्‍स उसी स्तर तक बढ़ जाएगा जो एक व्यापारिक भागीदार अमेरिकी सामानों पर लगाता है।
अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि दोनों देशों के बीच औसत आयात शुल्क में लगभग 10 फीसदी के अंतर को देखते हुए भारत जवाबी टैरिफ से सबसे अधिक प्रभावित होगा। भारत सरकार ने पहले ही टैरिफ में ढील देने के कदम उठाए हैं। फरवरी में इसमें काफी कटौती की गई है। कारों से लेकर रसायनों और इलेक्ट्रॉनिक्स तक अमेरिकी सामानों पर आयात कर कम करने पर चर्चा की जा रही है
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पिछले हफ्ते अपने अमेरिकी समकक्ष हॉवर्ड लुटनिक और अन्य ट्रंप अधिकारियों के साथ बहु-क्षेत्रीय व्यापार समझौते पर बातचीत करने के लिए अमेरिका में थे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुक्रवार को कहा था कि भारत और अधिक टैरिफ कटौती करने के लिए तैयार है

अर्थव्‍यवस्‍था को होगा फायदा

2017 और 2019 के बीच आरबीआई के डिप्टी गवर्नर रहे आचार्य ने कहा कि संरक्षणवादी उपायों से लाभान्वित होने वाली बड़ी भारतीय कंपनियों का शुरुआत में कुछ नुकसान होगा। लेकिन, इससे समग्र अर्थव्यवस्था को फायदा होगा। उन्होंने कहा, 'एक प्रतिस्पर्धी बाजार में कंपनियों को तब तक मोटा मुनाफा नहीं कमाना चाहिए जब तक कि वे उस सेवा या सामान के सबसे कुशल प्रदाता न हों।' उन्होंने कहा कि भारतीय व्यवसाय विश्व स्तर पर सर्वश्रेष्ठ के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं। लेकिन, इसके लिए दक्षता और उत्पादकता में निवेश की जरूरत होगी। उन्होंने कहा, 'जब तक हम उन्हें इस प्रतिस्पर्धा के अधीन नहीं करेंगे, हम उन्हें अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में कभी नहीं देखेंगे।'
आचार्य NYU स्टर्न स्कूल ऑफ बिजनेस में डॉक्टरेट एजुकेशन के डायरेक्‍टर हैं। उन्‍होंने पहले भारत के सबसे बड़े समूहों पर अपना तर्क पेश किया था। मार्च 2023 में एक पेपर में उन्होंने कहा था कि भारत की 'बिग 5' फर्मों - रिलायंस ग्रुप, टाटा ग्रुप, आदित्य बिड़ला ग्रुप, अडानी ग्रुप और भारती टेलीकॉम लिमिटेड - छोटी स्थानीय फर्मों की कीमत पर बढ़ी हैं, जबकि सरकार के 'आसमान छूते टैरिफ' ने उन्हें विदेशी फर्मों से प्रतिस्पर्धा से बचाया है। आचार्य ने इंटरव्‍यू में कहा, 'भारतीय कंपनियां नवीनता लाने के लिए पर्याप्त स्मार्ट हैं अगर उन पर दबाव डाला जाए।'

व‍िदेशी फर्मों से सीधी टक्‍कर होगी

व‍िरल आचार्य ने कहा कि अर्थव्यवस्था को विदेशी फर्मों के लिए खोलने से न केवल सीधी प्रतिस्पर्धा हो सकती है, बल्कि इससे पर्याप्त नॉलेज ट्रांसफर हो सकता है। कारण है कि विदेशी खिलाड़ियों के साथ रणनीतिक साझेदारी बनती है। आखिरकार, उस प्रक्रिया से कुछ वैश्विक दिग्गज उभरेंगे। भारतीय उद्योगों पर प्रभाव को कम करने के लिए आचार्य ने अंतिम टारगेट के बारे में साफ कम्‍युनिकेशन के साथ चरणों में टैरिफ कम करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यदि पॉलिसी अनुमानित है तो कारोबार दक्षता, नवाचार में निवेश करेंगे और अपने श्रमिकों के कौशल अपग्रेडेशन पर फोकस करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सप्ताह की शुरुआत में भारतीय व्यवसायों से अधिक निवेश करने के लिए बदलते वैश्विक परिदृश्य का लाभ उठाने का आग्रह किया था। इसे उनके लिए एक 'बड़ा अवसर' बताया था।
हालांकि, सरकारें अपने घरेलू उद्योगों और श्रमिकों का समर्थन करने के लिए संरक्षणवादी उपायों का उपयोग करती हैं, आचार्य ने कहा कि अगर व्यापार बाधाओं को हटा दिया जाता है तो नौकरी छूटने की चिंताएं सबूतों से समर्थित नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'इस बात का कोई सबूत नहीं है कि जब हमने 1990 के दशक में अर्थव्यवस्था को खोला तो हमने नौकरियां खत्म कर दीं। यह नब्बे के दशक में सच नहीं था, यह 2000 के दशक में सच नहीं था।'
दिग्‍गज अर्थशास्‍त्री ने कहा कि इसके बजाय अधिक प्रतिस्पर्धा निजी पूंजीगत व्यय और उत्पादकता को बढ़ावा देगी और विकास को रफ्तारी देगी। इसके चलते कुशलता वाली ज्‍यादा नौकरियां भी पैदा होंगी और घरेलू खपत बढ़ेगी। उन्होंने कहा, 'और यही वह परिवर्तनकारी बदलाव है जिसकी भारत को इस समय जरूरत है। यह उसी चीज का एक संस्करण है जो 1990 और 2000 के दशक में हमारे लिए काम करती थी।'

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