छोटी सी उम्र में संभाला कारोबार, इस तरह फ्रूटी को बना दिया 8 हजार करोड़ का ब्रांड

Updated on 12-02-2024 04:56 PM
नई दिल्ली: फ्रूटी का नाम आपने जरूर सुना होगा। कोका कोला (Coca Cola) और पेप्सी (Pepsi) जैसी दिग्गज मल्टीनेशनल कंपनियों के बीच फ्रूटी ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। इसे बनाने वाली कंपनी पारले एग्रो (Parle Agro) है। फ्रूटी आज बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के बीच काफी फेमस है, लेकिन एक समय था, जब इसे बनाने वाली पारले एग्रो का टर्नओवर सिर्फ 300 करोड़ रुपये का था। प्रकाश चौहान फ्रूटी बनाने वाली कंपनी पारले एग्रो के फाउंडर और सीईओ हैं, बाद में उनकी बेटी नादिया चौहान ने ब्रांड मैनेजर के रूप में कंपनी जॉइन की और कंपनी का टर्नओवर 3 सौ करोड़ रुपये से 8 हज़ार करोड़ तक पहुंचा दिया। नादिया चौहान का जन्म कैलिफोर्निया में हुआ, लेकिन उनका पालन-पोषण मुंबई में हुआ है। नादिया के पिता का नाम प्रकाश चौहान है जो पार्ले एग्रो के चेयरमैन थे।
नादिया की 2 बहनें और हैं जो उनसे बड़ी हैं। नादिया केवल 17 साल की थी जब उन्हें पारले एग्रो को ब्रांड मैनेजर की पोस्ट पर ज्वाइन किया। बिजनेस नादिया के खून में था और उन्होंने यह साबित भी किया। वह ब्रांड मैनेजर से चीफ मार्केटिंग ऑफिसर और फिर जॉइंट डायरेक्टर तक के पद पर पहुंची।

साल 1984 में फ्रूटी को किया लॉन्च


फ्रूटी को 1984 में लॉन्च किया गया था। यह लोगों को काफी पसंद आई। लोगों ने इसे हाथों-हाथ लिया। पारले एग्रो देश में टेट्रा पैक लाने वाली पहली कंपनी थी। साल 2003 तक पारले एग्रो 300 करोड़ रुपये की कंपनी बन चुकी थी। साल 2003 में कंपनी के चेयरमैन प्रकाश जयंतीलाल चौहान की बेटी नादिया चौहान ने कंपनी की मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभाली थी। उस समय उनकी उम्र मात्र 17 साल थी।

कारोबार को ऐसे पहुंचाया ऊंचाईयों पर

नादिया चौहान ने मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभालते ही सबसे पहले फ्रूटी की पैकेजिंग बदल दी। पहले फ्रूटी हरे रंग के पैकेट में आती थी, जबकि आम का रंग पीला होता है। साल 2004 में नादिया चौहान ने एक और बड़ा फैसला लिया। उन्होंने फ्रूटी का छोटा समोसा पैक लॉन्च किया। इसकी कीमत मात्र 2.5 रुपये थी। यह खासकर ग्रामीण इलाकों में काफी हिट रहा। इससे कंपनी की सेल में काफी इजाफा हुआ। पहले फ्रूटी बच्चों की ड्रिंक मानी जाती थी लेकिन नादिया चौहान ने इसे हर वर्ग की ड्रिंक बना दिया। उन्होंने शाहरूख खान से लेकर आलिया भट्ट और अल्लू अर्जुन को ब्रांड एंबेसेडर बनाया। कंपनी का 95% रेवेन्यू फ्रूटी से आता था।

ऐसे बढ़ाया कंपनी का रेवेन्यू


नादिया ने देखा कि कंपनी केवल फ्रूटी पर बहुत ज्यादा निर्भर करती है। अगर कुछ भी ऊपर-नीचे होता है तो कंपनी के पास कोई बैकअप नहीं है। इसलिए फ्रूटी से अलग अब कंपनी ने पीने का बोतल बंद पानी बेचने का फैसला लिया। इस तरह बेली की शुरुआत हुई। नादिया ने एक नई सॉफ्ट ड्रिंक पर भी दांव खेला। आम के बाद उन्होंने सेब से बनी ड्रिंक एपी फिज लॉन्च की। फिज को 2005 में लॉन्च किया गया था। फिज की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग सब अव्वल रही और ये प्रोडक्ट मार्केट ने हाथों-हाथ लिया। आज यह ड्रिंक बाजार में खुद को शानदार तरीके से स्थापित कर चुकी है।

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