आज वर्ल्ड-किडनी-डे; किडनी 15% भी काम करे तो जीना संभव

Updated on 09-03-2023 05:36 PM

9 मार्च को ‘वर्ल्ड किडनी डे’ है। नेफ्रोलॉजिस्ट और यूरोलॉजिस्ट का मानना है कि किडनी की बीमारी को लेकर बहुत नेगेटिविटी अप्रोच रखा जाता है चाहे वह ट्रीटमेंट हो या बीमारी। शरीर में अकेले किडनी ही एक ऐसा ऑर्गन है जिसमें रिप्लेसमेंट उपलब्ध है। दूसरे ऑर्गन्स चाहे वह हार्ट हो, लीवर हो, ब्रेन हो उनके लिए आर्टफिशियल मशीनें आसानी से उपलब्ध नहीं होती जिससे उसके फंक्शंस को रिप्लेस किया जा सके। अगर सही दिशा में डायलिसिस किया जाए तो ऐसे पेशेंट्स अपने नॉर्मल व फैमिली वर्क आसानी से कर सकते हैं।

2% लोगों को ही बीमारी का होता है पता

अलग-अलग रिसर्च में कई देशों में 12% से 16% तक किडनी की बीमारी पाई गई है। चौंकाने वाली बात यह कि इनमें से 1% से 2% लोगों को ही मालूम रहता है कि उन्हें किडनी की बीमारी है। डॉक्टरों के मुताबिक किडनी के बीमारी के सिम्टम्स बहुत वेग होते हैं इसलिए इन्हें आसानी से इग्नोर किया जा सकता है। अगर सही समय पर उनका इलाज नहीं किया जाए तो यह घातक होता है। 16% में से 12% से 14% को यही नहीं पता होता है कि उन्हें किडनी की बीमारी है जबकि 2% लोगों को रुटीन टेस्ट में पता चलता है कि उन्हें किडनी की बीमारी है।

लापरवाही के कारण के केवल फिर डायलिसिस ही ऑप्शन

डॉ. जयसिंह अरोरा (नेफ्रोलॉजिस्ट, मेदांता हॉस्पिटल) ने बताया कि लापरवाही के कारण पेशेंट्स उस स्टेज पर अस्पताल में आते हैं तब डायलिसिस या फिर रिवाइवल. ट्रांसप्लांट ही ऑप्शन रहता है। यह जानना जरूरी है कि किडनी ऐसा अंग है जो खुद को रीजनरेट नहीं कर सकता। एक बार उसकी कोशिकाएं या नेफ्रॉम खराब हो जाए तो रीजनरेट की गुंजाइश ही नहीं है। अगर वे 15% से 30% भी बचे रहें तो दवाइयों के सपोर्ट से उनका जीवन आसानी से कट सकता है। उन्हें डायलिसीस की जरूरत नहीं पड़ती। किसी महिला का क्रिएटनिन 1.2 से ऊपर हो या पुरुष का 1.4 से ऊपर हो तो उन्हें अपनी किडनी के डॉक्टर से मिलना चाहिए और पूछना चाहिए कि इस बीमारी को हम कैसे रोकें?

‘दैनिक भास्कर’ ने ‘वर्ल्ड किडनी डे’ के मौके पर कुछ किडनी पेशेंट्स से बात की। उन्होंने इस बीमारी से लड़ रहे दूसरे पेशेंट्स को हिम्मत दी। इंदौर के आलोक खण्डेलवाल (35) को तीन माह से किडनी की बीमारी है। उन्होंने बताया कि मैंने नॉर्मल जांचें कराई थी जिसमें पता चला कि किडनी की बीमारी है। जांच में यह भी बात चली कि मुझे यह बीमारी जेनेटिक है। उन्हें 6 साल से ब्लड प्रेशर है। अभी ढाई महीने से डायलिसिस चल रहा है। बकौल खण्डेलवाल किडनी मरीज डायलिसिस को रुटीन थैरपी समझें, इससे स्वास्थ्य बेहतर ही होगा। उनका कहना है कि वे इस बीमारी से डरे नहीं इसका इलाज कराएं।

दवाइयों से भी रिकवरी संभव

71 वर्षीय शिवशंकर डोंगरे की बीमारी 8 साल से हैं। 2014 में लेफ्ट किडनी ट्यूमर की वजह से खराब हो गई थी तो उसे निकाल दिया गया। इसके बाद 2016 में राइट किडनी में भी ट्यूमर हो गया। यह भी 60% खराब हो गई। फिर अलग-अलग अस्पतालों में बताया तो नेफ्रोलॉजिस्ट्स व यूरोलॉजिस्ट्स ने कीमोथैरपी की सलाह दी। इसमें फर्क यह पड़ा कि ट्यूमर की ग्रोथ वहीं रुक गई लेकिन बुखार आ जाता है, हीमोग्बोलिन कम हो जाता है, कमजोरी आ जाती है। डोंगरे इस बात से संतुष्ट है कि बची हुई 40% किडनी को सुरक्षित रखने के लिए डॉक्टरों ने दवाइयों से रिकवर किया है इसलिए अब डायलिसिस की जरूरत नहीं है।

लापरवाही के कारण परेशानी बढ़ी, अब सिर्फ मेडिसिन ही

बाणगंगा निवासी अनिता देशमुख (32) ने बताया कि एक माह से उन्हें किडनी की बीमारी है। इसका पता तब चला कि एक माह से बुखार आ रहा था, उल्टियां हो रही थी और शरीर में काफी सूजन थी। अस्पताल में एडमिट होकर तीन दिन हुए हैं और एक बार डायलिसिस होने के बाद अब दवाइयां चल रही है। डॉक्टरों का कहना है कि काफी सुधार हुआ है और अब केवल मेडिसिन चलेगी। परिवार में किसी को किडनी की बीमारी नहीं रही है। उनका लोगों को संदेश है कि डॉक्टर्स जैसा कहे वैसे अपना ट्रीटमेंट पूरा करना चाहिए। उन्होंने स्वीकारा की लापरवाही के कारण ज्यादा दिक्कत हो गई थी।

जानिए किडनी की बीमारी के क्या हैं लक्षण

चेहरेपेट और पैरों में सूजन : चेहरे, पेट और पैरों में सूजन किडनी की बीमारी के लक्षण हैं। यह सूजन आमतौर पर बहुत जल्दी नजर आ जाती है। किडनी की खराबी को लेकर सूजन एक महत्वपूर्ण लक्षण है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि हमेशा सूजन ही किडनी की खराबी का संकेत है। कुछ बीमारियों में किडनी ठीक होने के बावजूद शरीर में सूजन होती है।

भूख की कमी व उलटी : भूख की कमी, उलटी, मुंह में असामान्य स्वाद लगना आदि भी किडनी के बीमारी के लक्षण हैं। ऐसी स्थिति में शरीर में टॉक्सीन का लेवल बढ़ता जाता है इससे पेशेंट्स में हिचकी, उल्टी या जी मिचलाने के संकेत देखे जाते हैं।

हाई ब्लड प्रेशर : जब लगातार ब्लड प्रेशर बढ़ रहा हो तो यह किडनी खराब होने का सिम्टम माना जाता है। जल्दी थकान लगना, शरीर में पीलापन, पीठ के निचले हिस्से में दर्द, शरीर में दर्द, और पैरों में ऐंठन किडनी की खराबी के लक्षण हैं।
यूरिनरी समस्याएं : यूरिन में जलन, बार-बार आना, ब्लड आना या इन्फेक्शन भी किडनी खराबी के सिम्टम्स हैं।


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