इस वारदात में नाबालिग नौकर और उसका चचेरा भाई भी शामिल था। बाद में पुलिस ने नाबालिग नौकर और उसके चचेरे भाई लक्ष्मण कीर के साथ रायसेन निवासी अमित राठौर, संतोष जागंड़े, सोनू अहिरवार को गिरफ्तार कर लिया था। उनके पास से 49 लाख रुपये की बरामद कर लिए थे, बाकी एक लाख रुपये और सोना-चांदी के जेवरात बरामद करने के लिए उनको रिमांड पर लिया गया है।
चार अप्रैल तय था दिन
पुलिस ने आरोपितों से पूछताछ की तो पता चला कि लक्ष्मण करीब तीन माह इस घटना की साजिश रच रहा था, उसे इस वारदात में लूटे गए रकम से पांच लाख रुपये मिलने वाले थे। उसने साथियों के साथ मिलकर चार अप्रैल का दिन तय कर लिया था, लेकिन ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह की बहन चित्रकूट में रहती हैं।
उनके यहां पर देवी भागवत का आयोजन था। उसमें ज्ञानेंद्र प्रताप, उनकी पत्नी, छोटी बेटी के साथ ड्राइवर लक्ष्मण को ले गए थे। इधर, घर पर अकेली बेटी डा. अंशुल और उसके नौकर धर्मेंद्र और उसकी पत्नी सुमन व नाबालिग नौकर था। डा अंशुल ने नाबालिग नौकर को उसकी मां के पास भेज दिया था। इस कारण लक्ष्मण ने प्लान बदल दिया।