
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक मौजूदा मौसम प्रणालियों के असर से प्रदेश को अपेक्षाकृत नमी नहीं मिल पा रही है। इस वजह से मप्र में भारी वर्षा होने की संभावना कम है। हालांकि मंगलवार को भी भोपाल, नर्मदापुरम, जबलपुर, इंदौर, उज्जैन, सागर संभाग के जिलों में गरज-चमक के साथ छिटपुट बौछारें पड़ने की संभावना है। उधर पिछले 24 घंटों के दौरान नर्मदापुरम में 65.8, नरसिंहपुर में 44, छिंदवाड़ा में 21.6, सीधी में 5.4, शिवपुरी में दो, दमोह में दो, पचमढ़ी में 1.6, रतलाम में एक, सागर में 0.7, उज्जैन में 0.4, भोपाल में 0.2 मिलीमीटर वर्षा हुई। मंडला में बूंदाबांदी दर्ज की गई।
मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक वर्तमान में बंगाल की खाड़ी में उत्तरी आंध्रा तट एवं उससे लगे दक्षिणी ओडिशा पर गहरा कम दबाव का क्षेत्र बन गया है। मानसून ट्रफ जेसलमेर, कोटा, गुना, रायपुर, पुरी से होते हुए बंगाल की खाड़ी में उत्तरी आंध्रा तट एवं उससे लगे दक्षिणी ओडिशा पर बने गहरे कम दबाव के क्षेत्र से होकर बंगाल की खाड़ी तक जा रही है। उत्तर-पश्चिमी मध्य प्रदेश पर हवा के ऊपरी भाग में एक चक्रवात बना हुआ है। इसके अतिरिक्त गुजरात के कच्छ में भी हवा के ऊपरी भाग में एक चक्रवात मौजूद है। मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्व वरिष्ठ मौसम विज्ञानी अजय शुक्ला ने बताया कि वातावरण में नमी बरकरार रहने के कारण प्रदेश के अधिकतर जिलों में बादल बने हुए हैं। साथ ही भोपाल, इंदौर, नर्मदापुरम, जबलपुर, उज्जैन, सागर संभाग में कहीं-कहीं वर्षा हो रही है। हालांकि बंगाल की खाड़ी में बना गहरा कम दबाव का क्षेत्र नीचे बना रहने के कारण उससे मप्र में अपेक्षाकृत नमी नहीं मिल पा रही है। इस वजह से फिलहाल प्रदेश में भारी वर्षा होने की संभावना कम है, लेकिन छिटपुट बौछारें पड़ती रहेंगी। राजधानी में मंगलवार को बादल छंटने से कुछ धूप भी निकल सकती है, लेकिन तापमान बढ़ने की स्थिति में दोपहर के बाद कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ छिटपुट बौछारें पड़ सकती हैं।