बांग्लादेश में कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी की चुनाव में नरसंहार की धमकी, पाकिस्‍तानी ISI से मिल रहा हथियार, भारत में भी पसारे पैर

Updated on 24-11-2025 02:06 PM
ढाका: बांग्लादेश में अगले साल की शुरुआत में आम चुनाव होने की संभावना है। बांग्लादेश के इतिहास में इसे बहुत अहम चुनाव माना जा रहा है। एक तरफ देश के लोग निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं कई कट्टरपंथी गुट और दक्षिणपंथी राजनीतिक दल इसमें खलल डालने की तैयारी में हैं। बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख डॉक्टर शफीकुर्रहमान ने खुलेतौर पर कहा है कि चुनाव के दिन भीषण हिंसा हो सकती है। बांग्लादेश के जानेमाने एक्सपर्ट सलाहुद्दीन शोएब चौधरी ने कहा है कि पाकिस्तानी एजेंसी ISI और कट्टरपंथी जमात का गठजोड़ ढाका में बड़ी हिंसा की वजह बन सकता है।

वीकली ब्लिट्ज की रिपोर्ट में कहा गया है कि शफीकुर्रहमान ने एक ही दिन चुनाव और रेफरेंडम पर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि उसी दिन चुनाव और नेशनल रेफरेंडम कराने से'इलेक्शन जेनोसाइड' जैसा कुछ हो सकता है। जमात ने बांग्लादेश में कई चुनाव लड़े हैं लेकिन वह लगातार विवादों में भी रही है। खासतौर से हिंसा को लेकर जमात पर कई गंभीर आरोप हैं। ऐसे में नरसंहार जैसी धमकी का संकेत साफ है कि चुनाव में स्थितियां खराब हो सकती हैं।
ISI की मदद से सक्रिय हुए कई कट्टरपंथी और मिलिटेंट ग्रुप बांग्लादेश के चुनावों से पहले अफरा-तफरी मचाने के मकसद से फंड, हथियार और विस्फोटक बांट रहे हैं। छौधरी ने कहा है कि अगर यह वेरिफाई हो जाता है तो यह हाल के दिनों में बांग्लादेश के खिलाफ सबसे बड़े खुफिया ऑपरेशन में से एक होगा। इसके नतीजे रूटीन जियोपॉलिटिकल चालों से कहीं आगे हो सकते हैं।

भारत बॉर्डर पर हलचल

चौधरी का दावा है कि कई पाकिस्तानी फर्जी कागजात पर ढाका आए हैं। वहीं ISI की आठ लोगों की टीम ने भी बांग्लादेश में डेरा डाला हुआ है। ISI की ये टीम एक लोकल कंपनी से हेलीकॉप्टर किराए पर लेकर बांग्लादेश-इंडिया बॉर्डर पर घूम रही है। यह टीम कोसबा जिले में कम से कम तीन इंडियन मिलिटेंट से मिली है। इससे पता चलता है कि बांग्लादेश के इलेक्शन के माहौल को अस्थिर करने के लिए प्लान पर काम कियाजा रहा है।

सलाहुद्दीन का कहना है कि ढाका आए लोगों में पाकिस्तान आर्मी के मौजूदा और रिटायर्ड अधिकारी शामिल हैं। ब्रिगेडियर शोएब आसिफ खान, अफजाल अहमद खान, राजा इरफान यासीन, मुहम्मद अशरफ शाहिद, सैयद साकिब मुर्तजा, मोहम्मद मेराज, कर्नल वकार, उबेद उल्लाह का ढाका आना एक कॉर्डिनेटे दखल को दिखाता है।

यूनुस ने दी खुली छूट

बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के समय में जमात-ए-इस्लामी पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए थे। ऐसे में उसकी गतिविधियां सीमित हो गई थीं। बीते साल आई मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने इसके उलट रुख अपनाते हुए जमात को खुली छूट दी है। ऐसे में जमात के लोगों ने रैलियां और सम्मेलन करते हुए हालिया महीनों में अपनी ताकत दिखाई है। खासतौर से पाकिस्तानी आर्मी और ISI से जमात की नजदीकी काफी ज्यादा बढ़ी हैं।

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