
क्रिकेट की दुनिया बड़े कम ऐसे क्रिकेटर हुए जो हर फॉर्मेट में पूरी तरह फिट बैठते हों। यह भी कहा जा सकता है कि अगर किसी टीम के पास ऐसा खिलाड़ी हो तो वो उसे पलकों पर बिछाकर रखता है। समय के साथ अगर खिलाड़ी एक फॉर्मेट छोड़ता भी है तो बाकी तीन फॉर्मेट में उसके अनुभव और क्षमता का फायदा टीमें उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ती हैं। वहीं दूसरी ओर, कहा जाता है कि क्रिकेट में पॉलिटिक्स की कोई जगह नहीं है, लेकिन यह सच से काफी परे है। यही वजह है कि कभी दमदार कप्तान रहे फाफ डु प्लेसिस को आज रिटायरमेंट के लिए मजबूर किया जा रहा है।
अब साउथ अफ्रीका के ही एक खिलाड़ी को ले लीजिए। वह फ्रेंचाइजी क्रिकेट में रनों का अंबार लगा रहे हैं, लेकिन इंटरनेशनल टीम ने टेस्ट से संन्यास के बाद टी-20 और वनडे में मौका ही नहीं दिया। जी हां, यहां हम बात कर रहे हैं फाफ डु प्लेसिस की। फरवरी, 2021 में टेस्ट से रिटायरमेंट लिया, जबकि टी-20 और वनडे खेलने के लिए रास्ते खोले रखे, लेकिन न जाने क्यों साउथ अफ्रीका ने उनकी ओर देखा तक नहीं।
आज 39 वर्ष हो चुके फाफ डु प्लेसिस फ्रेंचाइजी क्रिकेट में लगातार रनों का अंबार लगा रहे हैं, लेकिन साउथ अफ्रीका ने टी-20 वर्ल्ड कप 2021 और 2022 दोनों ही महासमर के लिए चुनी गई टीम से उन्हें बाहर रखा। यही नहीं, इसकी वजह भी नहीं बताई गई। टीम के लंबे समय तक कप्तान रहे फाफ को बेइज्जत किया गया, जबकि कई ऐसे अयोग्य खिलाड़ी टीम का हिस्सा हैं, जिन्हें शायद भारतीय क्रिकेट बोर्ड होता तो जूनियर टीम में भी शामिल नहीं किया जाता।
फाफ डु प्लेसिस गजब के फॉर्म में हैं। वह 2020 से इस सीजन तक 400 से अधिक रन बनाए हैं। उन्होंने IPL में 2020 में 449, 2021 में 633, 2022 में 468 और 2023 में 730 रन ठोके। अगर उनकी टीम फाइनल में पहुंचती तो शायद वह आईपीएल 2023 में सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज होते। खैर, इस विध्वसंक फॉर्म के बावजूद साउथ अफ्रीका के सिलेक्टरों का दिल नहीं पिछला।