सरकार ने गिनाए PFI के काले कारनामो की पूरी लिस्ट

Updated on 28-09-2022 05:18 PM

सरकार ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और उससे जुड़े संगठनों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच साल का बैन लगा दिया है। गृह मंत्रालय की तरफ से जारी अधिसूचना में पीएफआई के काले कारनामों को पूरा कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया गया है। बता दें कि दो दिन की रेड के बाद पीएफआई के कम से कम 250 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। एनआईए के छापेमारी में भी कई ऐसे सबूत मिले हैं जिससे पीएफआई के टेरर लिंक की पुष्टि होती है। पीएफआई लंबे समय से एजेंसियों के रडार पर था।

पीएफआई से जुड़े किन संगठनों पर बैन
PFI के सहयोगी संगठनों पर भी बैन लगाया गया है। गृह मंत्रालय का कहना है कि पीएफआई ने समाज के विभिन्न वर्गों, युवाओं, छात्रों और कमजोर वर्गों को टारगेट करने के लिए सहयोगी संगठनों की स्थापना की है। इसका एकमात्र उद्देश्य प्रभाव और फंड जुटाने की क्षमता को बढ़ाना है। इ संगठनों में कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया, रिहैब इंडिया फाउंडेशन, ऑळ इंडिया इमाम काउंसिल, नेशनल कन्फेडेरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइंजेशन, विमेंस फ्रंट, जूनियर फंर्ट, एंपावर इंडिया फाउंडेशन, रिहैब फाउंडेशन शामिल हैं।

ISIS से लिंक
गृह मंत्रालय ने नोटिफिकेशन में कहा है कि पीएफआई के वैश्विक आतंकवादी समूहों जैसे कि आईएसआईएस से लिंक के उदाहरण मिले हैं। इससे जुड़ी संस्थाएं देश में असुरक्षा की भावना पैदा कर कट्टरपंथ को बढ़ाने का काम कर रही हैं। पीएफआई के संस्थापक कई सदस्य सिमी के भी सदस्य रह चुके हैं। बता दें कि सिमी भी सरकार की तरफ से प्रतिबंधित कर दिया गया था।

सरकार ने गिनाए काले कारनामे
सरकार ने पीएफआई के काले कारनामों को गिनाते हुए कहा है कि यह आतंकी मामलों में सामिल रहा है और देश के संवैधानिक प्राधिकार का अनादर करता है और बाहरी स्रोतों से फंड प्राप्त करके भारत की आंतरिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहा है। इसके अलावा यह भी  स्पष्ट हुआ है कि पीएफआई हिंसक और विध्वंसक कार्यों में लिप्त है। एक कॉलेज के प्रोफेस का हाथ काटना, अन्य धर्मों का पालन करने वाले संगठनों से जुड़े लोगों की निर्मम हत्या करना, प्रमुख लोगों और स्थानों को निशाना बनाने के लिए विस्फोटक प्राप्त करना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के सबूत हासिल हुए हैं।

सरकार ने बताया है कि कई लोगों की हत्या में भी पीएफआई का हाथ रहा है। तमिनलनाडु के वी रामलिंगम, केरल के नंदू, कर्नाटक के आर रूद्रेश, प्रवीण पुजारी, तमिलनाडु के शशि कुमार और प्रवीण नेतारू हत्याकांड में भी पीएफआई का ही हाथ रहा है। इसके अलावा पीएफआई के सदस्य सीरिया, ईराक और अफगानिस्तान जाकर आतंकी समूहों में भी शामिल हुए हैं। इसके अलावा पीएफआई हवाला और डोनेशन के जरिए भारत में कट्टरपंथ फैलाने के लिए धन इकट्ठा कर रहा है।  

IS जैसे आतंकी संगठनों से लिंक

– पीएफआई के कुछ संस्थापक सदस्य स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के नेता रहे हैं और पीएफआई का संबंध जमात उल मुजाहिद्दीन बांग्लादेश से भी रहा है. ये दोनों संगठन प्रतिबंधित संगठन हैं. पीएफआई के वैश्विक आतंकवादी समूहों जैसे इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया के साथ अंतरराष्ट्रीय संपर्क के कई उदाहरण हैं.

– पीएफआई और इसके सहयोगी संगठन चोरी छिपे देश में असुराक्षा की भावना को बढ़ावा देकर एक समुदाय में कट्टरपंथ को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं. इसकी पुष्टि इससे होती है कि इसके कुछ सदस्य अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से जुड़ चुके हैं.

PFI आपराधिक और आतंकी मामलों में शामिल

– पीएफआई कई आपराधिक-आतंकी मामलों में शामिल रहा है. देश के संवैधानिक प्राधिकार का अनादर करता है. बाहरी स्त्रोतों से धन और वैचारिक समर्थन के साथ यह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गया है. जांच से पता चला है कि पीएफआई और इसके काडर बार बार हिंसक कार्यो में संलिप्त रहे हैं. जिसमें एक प्रोफेसर का हाथ काटना, अन्य धर्मों का पालन करने वाले संगठनों से जुडे़ लोगों की हत्या करना, प्रमुख लोगों और स्थानों को निशाना बनाने के लिए विस्फोटक प्राप्त करना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना शामिल है.

पीएफआई सदस्य आतंकी संगठनों में हुए शामिल

– पीएफआई काडर कई आतंकी गतिविधियों और कई व्यक्तियों की हत्या में शामिल रहे हैं. और ऐसे आपराधिक कृत्य और जघन्य हत्याएं, सार्वजनिक शांति को भंग करने और लोगों के मन में आतंक का भय पैदा करने के एकमात्र उद्देश्य से की गई है. पीएफआई के वैश्विक आतंकवादी समूहों के साथ अंतरराष्ट्रीय संपर्क के कई उदाहरण हैं और पीएफआई के कुछ सदस्य आईएसआईएस में शामिल हुए हैं.

इन राज्यों ने की बैन की सिफारिश

– पीएफआई के पदाधिकारी और काडर इससे जुड़े अन्य लोग बैंकिंग चैनल, हवाला, दान आदि के माध्यम से सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र के तहत भारत के भीतर और बाहर से धन इकट्ठा कर रहे हैं फिर उस धन को वैध दिखाने के लिए कई खातों के माध्यम से इसका अंतरण, लेयरिंग और एकीकरण करते हैं. इस धन का इस्तेमाल आपराधिक विधिविरुद्ध और आतंकी कार्यों के लिए करते हैं. उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात राज्य सरकारों ने पीएफआई को प्रतिबंधित करने की मांग की है.

केंद्र ने बताया अगर कार्रवाई न हुई तो क्या होगा?

केंद्र सरकार का कहना है कि पीएफआई और उसके सहयोगी संगठन देश में आतंक फैलाने और राष्ट्र की सुरक्षा, लोक व्यवस्था को खतरे में डालने के इरादे से हिंसक आतंकी गतिविधियों में शामिल रहे हैं. पीएफआई की राष्ट्र विरोधी गतिविधियां राज्य के संवैधानिक ढांचे और संप्रभुता का अनादर और अवहेलना करते हैं, इसलिए इनके विरुद्ध तत्काल और त्वरित कार्रवाई अपेक्षित है. केंद्र सरकार का कहना है कि अगर पीएफआई और उसके संगठनों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो अपनी विध्वंसात्मक गतिविधियों को जारी रखेंगे. जिससे लोक व्यवस्था भंग होती है और राष्ट्र का संवैधानिक ढांचा कमजोर होगा.


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