
चुनाव आचार संहिता और चुनाव आयोग के निर्देशों को लेकर सरकार कितनी गंभीर है, इसका सच जल संसाधन विभाग द्वारा तीन दिन पहले मैदानी अधिकारियों को लिखे गए एक पत्र से सामने आया है। चुनाव आयोग के निर्देश पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने 72 घंटे में प्रदेश भर में चल रहे और स्वीकृत निर्माण कार्यों की जानकारी 19 मार्च को मांगी थी जो अब तक आयोग को भेजी नहीं जा सकी है। इसी तरह की स्थिति नगरीय विकास, लोक निर्माण, आरईएस समेत अन्य निर्माण एजेंसियों के मामले में भी है।
16 मार्च को लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के बाद 19 मार्च को संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी बसंत कुर्रे ने सभी विभागों के अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों और सचिवों को पत्र लिखा था। इस पत्र में सभी विभागों से 72 घंटे के भीतर जानकारी देने के लिए कहा गया था ताकि चुनाव आयोग को अपडेट स्थिति से अवगत कराया जा सके। इसके लिए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने 16 मार्च को चुनाव आयोग द्वारा जारी पत्र की कापी भी राज्य सरकार के विभागों को भेजी गई थी। इसके बाद से अब तक निर्माण कार्यों से सीधा संबंध रखने वाले आधा दर्जन से अधिक विभाग जानकारी नहीं दे सके हैं जबकि अब बीस दिन होने को आए हैं।
यह जानकारी मांगी थी पत्र में
पत्र के माध्यम से सरकार से जो जानकारी मांगी गई थी उसमें कहा गया था कि ऐसे निर्माण कार्य की सूचना दी जाए जो 16 मार्च की स्थिति में मैदानी स्तर पर प्रारंभ हो चुके हैं। साथ ही यह बताने के लिए भी कहा गया था जो पत्र लिखने के पहले शुरू नहीं हो सके हैं। इसमें आयोग की समय सीमा की ओर भी विभाग प्रमुखों का ध्यान आकृष्ट किया गया था।
जल संसाधन विभाग ने 5 अप्रैल को चीफ इंजीनियरों को लिखा पत्र
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय से जानकारी मांगे जाने के 17 दिन बाद जल संसाधन विभाग ने विभाग के मुख्य अभियंताओं को पत्र लिखकर 19 मार्च को भेजे गए पत्र के आधार पर तुरंत जानकारी भेजने के लिए कहा है। बताया जाता है कि अभी भी यह जानकारी चुनाव आयोग तक नहीं पहुंच सकी है। इसी तरह की स्थिति नगरीय विकास, लोक निर्माण, आरईएस समेत अन्य विभागों में भी बताई जा रही है।