वह दोस्त जिसका दिल भारत के लिए धड़कता है, इजरायल के साथ रिश्तों की ये कहानी पुरानी है

Updated on 09-02-2023 05:53 PM
नई दिल्ली: पैंट थोड़ा ऊपर कर समंदर के पानी में खड़े होकर तस्वीरें शायद आपने भी ली होंगी, बीच पर ये नजारा आम होता है। लेकिन जब दुनिया के दो बड़े देशों के प्रधानमंत्री इस तरह बातें करते दिखाई दें तो पिक्चर बोलने लगती है। यह उनके बीच मजबूत रिश्तों की गवाही देती है। यहां कुछ भी औपचारिक नहीं रह जाता। बात 2017 की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल गए थे। पीएम बेंजामिन नेतन्याहू उन्हें देश घुमाने के लिए लेकर निकले तो बीच पर पहुंच गए। समंदर की उफनती लहरों के बीच दोनों जिगरी दोस्तों की तरह बातें करते देखे गए। नेतन्याहू हाथों के इशारे से पूरा भूगोल समझा रहे थे। मोदी भी मुस्कुराते हुए सवाल-जवाब कर रहे थे। पूरी दुनिया ने ये तस्वीरें देखीं। इससे यह संदेश भी गया कि भारत और इजरायल के रिश्तों की बुनियाद कितनी मजबूत है और उस पर ये दोनों नेता नई इबारत लिख रहे हैं। बाद में नेतन्याहू की जगह दूसरे पीएम बने लेकिन दोनों देशों की मित्रता मजबूत बनी रही। एक बार फिर नेतन्याहू को इजरायल की बागडोर मिली है तो मोदी के साथ उनकी गर्मजोशी फिर देखने को मिल रही है। जी हां, दो महीने के भीतर नेतन्याहू और मोदी में दूसरी बार बातचीत हुई है। आखिर ऐसा क्या है कि इजरायल हमारे लिए इतना खास है और क्यों भारत ये दोस्ती कभी नहीं तोड़ना चाहेगा?
तब इजरायल में लगे मोदी के पोस्टर
नेतन्याहू (73) ने 29 दिसंबर को छठी बार इजराइल के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। इसके बाद फौरन मोदी ने नेतन्याहू को भारत आने का न्योता दे दिया। वह सुविधाजनक तारीख पर भारत आएंगे। दूसरी बार बुधवार को दोनों नेताओं ने 20 मिनट तक बातचीत की। टेक्नोलॉजी, इकॉनमी और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग और गहरा करने पर बात हुई है। भारत के लिए इजरायल की महत्ता समझने से पहले यह जान लीजिए कि नेतन्याहू ने चुनाव प्रचार में मोदी के साथ अपनी तस्वीरें भी दीवारों पर टंगवा दी थीं। दरअसल, इजरायल शुरू से भारत के साथ अच्छे संबंध रखता रहा है। नेतन्याहू के समय दोनों देशों के संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंचे।

5 पॉइंट्स में इजरायल की अहमियत समझिए

1. पावर
भारत इजरायली सैन्य उपकरणों और हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार है। रूस के बाद इजरायल ही हमारा ऐसा दोस्त है जो डिफेंस के मोर्चे पर हमेशा खरा उतरा। उसने कभी सीमापार आतंकवाद या भारत-पाकिस्तान के साथ संतुलन वाली डिप्लोमेसी नहीं की। वह बेधड़क हर हाल में भारत के साथ खड़ा रहा। अपने देश में एक कहावत है कि सच्चे दोस्त की पहचान मुसीबत के समय होती है। 1999 में जब पाकिस्तान ने पीठ में छुरा घोंपते हुए करगिल में लड़ाई छेड़ दी तो इजरायल ने ही हमें खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई थी।

लड़ाई छिड़ चुकी थी और इजरायल ने ही हथियारों की कमी को पूरा किया था। उसने मोर्टार और भारतीय जेट के लिए लेजर गाइडेड बम दिए थे। खास बात यह है कि इजरायल उन चुनिंदा देशों में से एक था, जिसने अतंरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद भारत की सीधे तौर पर मदद की थी। इजरायल खुलकर आतंकवाद के खिलाफ बोलता है और भारत की तुलना अपने देश के सीमापार हमलों से करता है। 2001 में भुज भूकंप के दौरान भी उसने आपदा राहत पहुंचाई।

2. रिश्ते
आजादी के बाद कोल्ड वॉर के चलते राजनयिक संबंध बनने में दशकों निकल गए। 1992 में इस रिश्ते की बुनियाद रखी गई। हालांकि इजरायल को 1953 में ही मुंबई में अपना कांसुलेट खोलने की अनुमति दे दी गई थी और भारत ने 1950 में ही इजरायल को एक देश के तौर मान्यता दे दी थी। इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद की खूबी भारत बहुत पहले समझ चुका था। 1968 में इंदिरा गांधी सरकार ने रॉ (RAW) के गठन को मंजूरी दी और पहले चीफ रामेश्वर नाथ काउ बने। इंदिरा ने रॉ को मोसाद से संबंध बनाने के निर्देश दिए। 1971 में दोनों देशों की खुफिया एजेंसियों ने पहली बार मिलकर काम किया। उस साल पाकिस्तान के विदेश मंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो नॉर्थ कोरिया गए थे जिससे वह सैन्य डील कर सकें। पाकिस्तान के बारे में और कई खुफिया जानकारियां मोसाद को मिलीं।

उस समय पूर्वी पाकिस्तान में नरसंहार चरम पर था। इजरायल की संसद में यह मामला उठा और कहा गया कि हम पूर्वी बंगाल (पूर्वी पाकिस्तान) में मानवीय पीड़ा पर खामोश क्यों बने हुए हैं। उसी समय लड़ाई की पटकथा लिखी जा रही थी। पूर्वी पाकिस्तान में हो रहे अत्याचार पर खुलकर बोलने वाला भारत के अलावा इजरायल एकमात्र देश था। आपको जानकर ताज्जुब होगा कि भारत ने मदद मांगी और 1971 की लड़ाई के समय इजरायल हथियार देने में नहीं हिचका। जबकि उस समय अरब देशों से लड़ाई लड़ चुके इजरायल में हथियारों की कमी थी फिर भी इस देश ने हथियार भेजे। जिस समय भारत-इजरायल में बात हो रही थी, उस समय पाकिस्तान ईरान से एयर सपोर्ट के लिए गुफ्तगू कर रहा था।

3. मोदी
हालांकि बाद के वर्षों में हालात अलग रहे। उस समय भारत किसी गुट की तरफ दिखना नहीं चाहता था, वह चाहता था कि कश्मीर पर अरब देश खामोश बने रहें और कुछ हद तक मुस्लिमों की भावनाओं को देखते हुए इजरायल से रिश्ते ठंडे बस्ते में डाल दिए गए। 1998 में वाजपेयी सरकार बनने के बाद रिश्तों पर जमी बर्फ तेजी से पिघली। एरियल शेरॉन पहले इजरायली पीएम थे जो 2003 में भारत आए। 2014 में पूर्ण बहुमत वाली मोदी सरकार बनने के बाद किंतु-परंतु से बाहर निकलकर भारत खुलकर इजरायल के साथ खड़ा होने लगा। इजरायल-फिलिपींस विवाद को लेकर पहले की सरकारें संतुलन साधने की कोशिश करती थीं। वह यह सोचकर कदम रखती थीं कि दूसरा तबका नाराज न हो। आज की सरकार दावा करती है कि वह देशहित में डंके की चोट पर फैसले लेती है।


भाजपा से पहले भारतीय जनसंघ था। उसने 1967 के अपने चुनावी मैनिफेस्टो में ऐलान किया था कि उसकी सरकार इजरायल के साथ खुलकर पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करेगी। ऐसे में एक्सपर्ट मानते हैं कि नरेंद्र मोदी सरकार की इजरायल से मित्रता का आधार विचारधारा और राष्ट्रीय हितों का मिश्रण है। दूसरी तरफ इस्लामिक राष्ट्र पाकिस्तान खुलकर इजरायल का विरोध करता रहा है। अरब देशों के साथ इजरायल की लड़ाई में पाकिस्तान ने इस्लामिक देशों को मदद पहुंचाई थी।

4. तकनीक
गूगल मैप में अगर आप इजरायल का भूगोल देखिए तो एक छोटा सा देश दिखता है लेकिन तकनीक के मामले में यह दुनिया के अग्रणी देशों में शुमार है। आज खेती की आधुनिक तकनीक, साइबर सुरक्षा, जल संरक्षण, पारंपरिक दवाओं, फिल्म निर्माण, स्पेस टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में भारत को इजरायल से मदद मिल रही है। पानी की बात चली है तो यह जान लीजिए कि इजरायल रोज समुद्र के खारे पानी को पीने लायक बनाता है। जब मोदी इजरायल यात्रा के समय बीच पर गए थे तो नेतन्याहू ने समंदर के खारे पानी को पीने लायक बनाने वाली मशीन से निकालकर पानी पिलाया था। आज जलस्रोत घट रहे हैं, ऐसे में भविष्य में समंदर के खारे पानी को शुद्ध करने की जरूरत पड़ सकती है। इजरायल हमारे लिए मददगार होगा। हालांकि भारत में चेन्नई के पास एक गांव समेत कई प्लांट बन चुके हैं। फिल्म के बारे में जान लीजिए कि इजरायल में बनी Fauda सीरीज खूब देखी जा रही है। बॉलीवुड के दीवाने वहां भी खूब हैं।


5. डील
आज के समय में भारत को अत्याधुनिक हथियारों के साथ ही फ्यूचर फोर्स के लिए भी तैयार रहना होगा। मोदी-नेतन्याहू के राज में द्विपक्षीय संबंध काफी मजबूत हुए हैं। सात साल में ही भारत को इजरायल से 2.3 अरब डॉलर के हथियार मिले। इसमें ड्रोन, मिसाइल, सेंसर और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल है। इजरायल भी भारत में काफी निवेश कर रहा है। वह भारत की दूसरी हरित क्रांति की दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है। भारतीय मूल के करीब 85 हजार यहूदी इजरायल में रहते हैं। इसमें ज्यादातर महाराष्ट्र, केरल और कोलकाता से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में रिश्तों को मजबूत रखना हमारे हित में है।

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