ग्रीनलैंड का टकराव अब निर्णायक मोड़ पर, ट्रंप की धमकियों के बीच डेनमार्क की PM का बड़ा बयान

Updated on 12-01-2026 12:25 PM
कोपनहेगन: डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा है कि ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर उनका देश निर्णायक मोड़ पर है। मेटे का बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्कटिक इलाके ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकियों के बीच आया है। ग्रीनलैंड एक ऐसा द्वीप है, जिसकी सुरक्षा और विदेश नीति डेनमार्क के पास है। डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बात कही है। इससे दो नाटो सदस्य यानी डेनमार्क और अमेरिका के बीच तनातनी बनी हुई है।

अल जरीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रेडरिक्सन ने सोमवार को दूसरे डेनिश नेताओं के साथ एक बैठक में बोलते हुए कहा, 'ग्रीनलैंड को लेकर टकराव चल रहा है। यह एक निर्णायक पल है। इसमें दांव पर लगी बातें ग्रीनलैंड के भविष्य के सीधे मुद्दे से कहीं ज्यादा हैं। डेनमार्क आर्कटिक समेत सभी जगह अपने मूल्यों की रक्षा करने के लिए तैयार है। हम अंतर्राष्ट्रीय कानून और लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार में विश्वास करते हैं।'

ग्रीनलैंड पर तनाव

डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि आर्कटिक में रूसी और चीनी सैन्य गतिविधियों को रोकने के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण जरूरी है। ट्रंप प्रशासन ने इसके लिए सेना के इस्तेमाल यानी हमले से भी इनकार नहीं किया है। इसने ना सिर्फ ग्रीनलैंड और डेनमार्क बल्कि पूरे यूरोप को चिंतित किया है। स्वीडन और जर्मनी जैसे देशों ने खुलकर डेनमार्क के समर्थन में बयान दिया है।डेनमार्क की प्रधानमंत्री यहां तक कह चुकी हैं कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कब्जे की कोशिश की तो नाटोसैन्य गठबंधन का अंत हो जाएगा। फ्रेडरिक्सन ने कहा कि अमेरिका का किसी नाटोसदस्य देश पर सैन्य कार्रवाई का मतलब इस पूरे सैन्य गठबंधन की व्यवस्था का पूरी तरह खत्म हो जाना होगा। इस हमले से नाटो में कुछ भी नहीं बचेगा।

ग्रीनलैंड का क्या है इतिहास

ग्रीनलैंड 57,000 की आबादी वाली द्वीप है, जो 1953 तक डेनमार्क की कॉलोनी रहा। बाद में ग्रीनलैंड ने स्वशासन हासिल किया लेकिन सेना और विदेश नीति डेनमार्क के पास है। ग्रीनलैंड में डेनमार्क से संबंध सीमित करने की आवाज उठती है तो अमेरिका को लेकर भी ग्रीनलैंड में भारी गुस्सा है। ग्रीनलैंड की आबादी अमेरिकी अधिग्रहण का कड़ा विरोध करती है।
ग्रीनलैंड की सरकार ने बार-बार ये कहा है कि अपने भविष्य पर फैसला लेने का हक सिर्फ ग्रीनलैंड के लोगों को होना चाहिए। फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन और ब्रिटेन के नेताओं ने भी साफ कहा है कि ग्रीनलैंड में कोई सैन्य कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। हालांकि इन सब बयानों के बावजूद अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप किसी की बात सुनते हुए नहीं दिख रहे हैं।

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