ईरान पर हमलों ने दोस्त रूस की कर दी मौज, तेल में अरबों की कमाई, यूक्रेन युद्ध में मिल सकता बड़ा मौका

Updated on 05-03-2026 02:22 PM
मॉस्को: अमेरिका और इजरायल के 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमले के बाद पश्चिम एशिया के बड़े हिस्से में अस्थिरता है। अरब जगत में बढ़ती टेंशन रूस के लिए कई मोर्चों पर फायदे का सौदा साबित हो रही है। ईरान के सहयोगी देश रूस के एनर्जी रेवेन्यू में इस जंग से बढ़ोतरी हुई है। भारत ने भी एक बार फिर रूस से तेल खरीद के संकेत दिए हैं। वहीं यूक्रेन के खिलाफ लड़ाई में उसे इसलिए फायदा मिला है क्योंकि अमेरिका और पश्चिमी देशों का ध्यान ईरान पर है। इससे रूस के पास यूक्रेन में सैन्य अभियान बढ़ाने का मौका है।

मातृभूमि की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने से एनर्जी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। तेल व्यापार के इस अहम समुद्री रास्ते के बंद होने से ब्रेंट क्रूड 82 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है, ये कीमत हमले के दिन (28 फरवरी) 72.87 डॉलर थी। इससे रूस का यूराल क्रूड 62 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ गया है, जो मॉस्को के 2026 के बजट में तय किए 59 डॉलर के बेंचमार्क से ज्यादा है।

ईरान संकट और रूस

तेल और गैस रेवेन्यू रूस के फेडरल बजट का 30 प्रतिशत है। अरब सागर में रूसी क्रूड कार्गो एक बेहतर विकल्प बन गए हैं क्योंकि मिडिल ईस्ट की सप्लाई फंसी हुई है। कार्नेगी रूस यूरेशिया सेंटर की एलेक्जेंड्रा प्रोकोपेंको ने कहा है कि स्ट्रेट बंद रहता है तो कीमतें 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इससे रूस को फायदा होगा लेकिन यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं को मार पड़ेगी।रूस को ईरान संकट का एक और फायदा यूक्रेन में मिलेगा। ईरान में लड़ाई यूक्रेन को एयर डिफेंस मिसाइल सप्लाई प्रभावित करने लगी है। ईरानी मिसाइलों को रोक रहा PAC-3 पैट्रियट इंटरसेप्टर सिस्टम यूक्रेन में रूसी हमलों के खिलाफ इस्तेमाल होता है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि ईरान में संघर्ष लंबा चला तो उनके एयर डिफेंस सिस्टम कम पड़ सकते हैं।

यूक्रेन और रूस की शांति वार्ता अटकी

ईरान के संकट के चलते अमेरिका की मध्यस्थता वाली रूस-यूक्रेन की शांति वार्ता भी रुक गई है। वार्ता टलने से मिला समय रूस को यूक्रेन के कुछ और क्षेत्र पर कब्जे का मौका दे सकता है। इसे देखते हुए लिथुआनिया प्रेसिडेंट गिटानास नौसेदा ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट संकट से इंटरनेशनल कम्युनिटी का ध्यान यूक्रेन-रूस से नहीं हटना चाहिए।

रूस ने इस पूरे घटनाक्रम में संतुलन साधने की कोशिश की है। रूस ने सहयोगी ईरान पर हमलों की कड़ी निंदा की है। रूस ने ईरान को डिप्लोमैटिक सपोर्ट की पेशकश की है। रूस ने भले ही ईरान को सैन्य मदद नहीं दी है लेकिन व्लादिमीर पुतिन तेहरान में सत्ता में बदलाव नहीं चाहते हैं। इससे उनके क्षेत्रीय लक्ष्यों को भारी नुकसान हो सकता है।

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