जूनियर का पता न सीनियर्स का ठिकाना..उस केस का पर्दाफाश!:पुलिसवालों को बनना पड़ा नर्सिंग स्टूडेंट

Updated on 09-12-2022 05:27 PM

पुलिस के अंधे कत्ल सुलझाने के किस्से तो खूब हैं, लेकिन कॉलेज में होने वाली ‘ब्लाइंड रैगिंग’ के पर्दाफाश का संभवत: पहला और अनूठा मामला है। वो भी तब जब न कॉलेज ने मदद की, न विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने..। पुलिस ने अपने ‘देशी पैटर्न’ से कॉलेज में खुफिया टीम को स्टूडेंट्स बनाकर भेज दिया और पांच महीने की कशमकश के बाद रैगिंग करने वालों तक पहुंच गई। 9 सीनियर स्टूडेंट्स को गिरफ्तार कर लिया है, एक फरार है।

पहले पूरा मामला जान लेते हैं

मामला इंदौर के संयोगितागंज थाना क्षेत्र के MGM मेडिकल कॉलेज का है। पांच महीने पहले (24 जुलाई) पुलिस को कॉलेज में रैगिंग की शिकायत मिली थी। शिकायत सीधे पीड़ित स्टूडेंट ने दर्ज नहीं कराई थी। स्टूडेंट ने UGC से रैगिंग की शिकायत थी। इस पर UGC ने कॉलेज मैनेजमेंट को चिट्‌ठी भेजी। डीन ने इंदौर पुलिस को शिकायत फॉरवर्ड कर FIR करा दी।

मुश्किल ये थी कि पुलिस को न आरोपियों के नाम बताए और न फरियादी की पहचान। सबूत के तौर पर सिर्फ वॉट्सअप चैट के स्क्रीनशॉट्स दिए थे। पुलिस भी यह समझ नहीं पा रही थी कि किसे पकड़े और पूछताछ किससे करे..? इंदौर के कॉलेज से लेकर UGC और वॉट्सअप के अमेरिका हेड ऑफिस तक ने मदद से इनकार कर दिया। इस तरह पुलिस का काफी समय चला गया। आखिर संयोगितागंज ​​​थाना पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने की तरकीब निकाल ही ली।​​​​

कैसे पुलिस ने रैगिंग लेने वाले सीनियर्स को रंगे हाथों पकड़ा, टीआई तहजीब काजी से जानिए...

सभी तरफ से रास्ते बंद होते देख हमने तय किया कि अब सीधे कॉलेज में ही तफ्तीश करते हैं। कॉलेज से भविष्य की रैगिंग रोकने का हवाला देते हुए सभी फ्रेशर्स स्टूडेंट्स के नाम और नंबर्स मांगे। कॉलेज ने लगभग 800 स्टूडेंट्स की लंबी लिस्ट भेज दी। इतनी लंबी लिस्ट से पीड़ित छात्र या अन्य पीड़ितों को ट्रैक करना मुश्किल था और प्लान बिगड़ने का भी डर था।

अंतत: थाने के ही सब इंस्पेक्टर सत्यजीत चौहान, कांस्टेबल कालीचरण और महिला कांस्टेबल शालिनी को MY अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ बनाकर भेजा। ये तीनों रोजाना कैंटीन के साथ कॉलेज कैम्पस में वक्त बिताने लगे। यहां कुछ फ्रेशर्स स्टूडेंट्स से फ्रेंडशिप कर ली।

बातों-बातों में यह ट्रैक किया कि किस सीनियर स्टूडेंट का बर्ताव अच्छा है, कौन रैगिंग और बदतमीजी करता है। पुलिस को इस पूछताछ से लगभग 80 स्टूडेंट्स के नाम मिल गए। पर इनसे भी केस से जुड़ी रैगिंग करने वालों तक पहुंचना मुश्किल था।

बैकग्राउंड और पॉलिटिकल बैकग्राउंड के आधार पर तिलक नगर, लालाराम नगर और अन्य इलाकों से 10 छात्रों को तलब कर लिया। इनसे अलग-अलग बातचीत की और शिकायत के समय मिले वॉट्सअप ग्रुप के स्क्रीन शॉट्स दिखाए गए। सख्ती करने पर ये टूट गए और रैगिंग करना कबूल कर लिया।

ये हैं आरोपी छात्र, जिन्हें गिरफ्तार किया
पुलिस ने आरोपी शुभांकर मिश्रा, प्रियम त्रिपाठी, देवव्रत गुप्ता, राहुल पटेल, शैलेष शर्मा, चेतन वर्मा, ऋषिराज, उज्ज्वल पांडे और रौनक पाटीदार को गिरफ्तार किया है। एक छात्र फरार है। बताया जा रहा है कि उसके पिता वरिष्ठ अधिकारी हैं जो पुलिस पर गिरफ्तारी नहीं करने को लेकर लगातार दबाव बना रहे हैं।

पांच महीने में यह सबकुछ कर चुकी थी पुलिस

डीन से जानकारी मांगी तो ये मिला जवाब
सबसे पहले MGM कॉलेज के डीन से रैगिंग करने वाले सीनियर स्टूडेंट्स की जानकारी मांगी। डीन ने यह कहते हुए लिस्ट देने से इनकार कर दिया कि मामला गोपनीय और दिल्ली की कमेटी से जुड़ा है। फिर भी पुलिस ने अपनी ओर से करीब पांच से अधिक जूनियर और सीनियर्स के बयान लिए। लेकिन कहीं भी मामले में कोई जानकारी हाथ नहीं लगी।

यूजीसी से संपर्क किया तो ही निराशा मिला
पुलिस ने यूजीसी की एंटी रैगिंग कमेटी से संपर्क किया। यूजीसी ने यह कहते हुए मना कर दिया कि वे किसी की पहचान उजागर नहीं कर सकते। यूजीसी ने ये तर्क भी दिया कि छात्र ने सीक्रेट ईमेल में नाम नहीं बताया है। तब पुलिस ने यूजीसी से पीड़ित छात्र का ईमेल एड्रेस भी मांगा, पर वो भी देने से इनकार कर दिया।

अमेरिका भेजी वॉट्सऐप की चैटिंग, नहीं आया जवाब
पुलिस ने शिकायत में मिले स्क्रीनशॉट को लेकर वॉट्सऐप के अमेरिका स्थित हेड ऑफिस से संपर्क किया। डिलीट किए गए ग्रुप की जानकारी भी मांगी, लेकिन पुलिस को यहां से भी जवाब नहीं मिला। पुलिस लगातार वहां ईमेल कर जानकारी के प्रयास करती रही। पुलिस ने कई मेल किए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।


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