टैक्स में बचत और नुकसान का कम खतरा... बाजार के उतार-चढ़ाव में क्या हाईब्रिड फंड में निवेश सही है?

Updated on 24-01-2025 06:04 PM
नई दिल्ली: जो लोग शेयरों में निवेश करना चाहते हैं साथ ही टैक्स भी बचाना चाहते हैं, लेकिन वैल्यूएशन और उतारचढ़ाव के कारण उनके कदम डगमगा रहे हैं। ऐसे निवेशकों के लिए हाइब्रिड फंड्स अच्छा ऑप्शन हो सकता है। इकॉनमिक टाइम्स के मुताबिक, ये फंड्स अलग-अलग तरह की असेट्स को मिलाकर बनाए जाते हैं। जिससे नुकसान का खतरा कम हो जाता है। फंड मैनेजर्स बताते हैं कि मिड और स्मॉलकैप की तुलना में लार्जकैप के शेयरों के दाम अभी ठीक-ठाक हैं।
  1. क्या कहते हैं आंकड़े?
    HDFC म्यूचुअल फंड के आंकड़े बताते हैं कि पिछले 22 वर्षों में शेयरों ने 12 बार, सोने ने 9 बार और डेट ने सिर्फ एक बार बेहतर प्रदर्शन किया है। इससे साफ है कि हाइब्रिड स्ट्रेटेजी कितनी जरूरी है। ICICI प्रूडेंशियल MF के आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में Nifty 50 (जिसमें बड़ी कंपनियों के शेयर हैं) का PE 23 है। पिछले पांच साल के औसत 24.4 से थोड़ा कम है। लेकिन BSE मिडकैप का PE 43.1 और BSE स्मॉलकैप 250 का PE 43.2 है। ये पिछले पांच साल के औसत PE (33.8 और 27.4) से काफी ज्यादा है। इससे पता चलता है कि लार्जकैप की तुलना में स्मॉल और मिडकैप महंगे हैं।
  2. कैसे होता है अलोकेशन?
    सेज कैपिटल के फाउंडर निखिल गुप्ता कहते हैं, हाइब्रिड फंड्स में ज्यादातर बड़ी कंपनियों (लार्जकैप) के शेयर होते हैं, जिनके वैल्यू अभी फेयर हैं। वेल्थ मैनेजर्स बताते हैं कि ज्यादातर हाइब्रिड फंड्स में मीडियम और छोटी कंपनियों के शेयर बहुत कम होते हैं। हाइब्रिड फंड्स में इक्विटिज का हिस्सा 20% से 70% तक होता है, ये फंड के कैटिगरी पे निर्भर करता है। इक्विटी सेविंग्स फंड्स में सबसे कम 10% से 35% तक शेयर होते हैं। उसके बाद मल्टी असेट फंड्स आते हैं। इनमें 25% से 65% तक इक्विटी होते हैं। बैलेंस्ड अडवांटेज फंड्स में औसतन 50% से 60% इक्विटी होते हैं, जबकि अग्रेसिव हाइब्रिड फंड्स में 65% से 75% तक।
  3. क्या करें निवेशक?
    क्रेडो कैपिटल के फाउंडर और CFP एस शंकर कहते हैं कि जो लोग फिक्स्ड डिपॉजिट से शेयरों में आना चाहते हैं और ज्यादा जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं, वो अपने रिस्क के हिसाब से अलग-अलग तरह के हाइब्रिड फंड्स में निवेश कर सकते हैं। आप इक्विटी सेविंग्स, बैलेंस्ड अडवांटेज, मल्टी असेट और एग्रेसिव हाइब्रिड फंड्स में बराबर-बराबर पैसा लगा सकते हैं।
  4. क्यों जरूरी है हाइब्रिड स्ट्रेटेजी?
    HDFC म्यूचुअल फंड के आंकड़े बताते हैं कि पिछले 22 वर्षों में शेयरों ने 12 बार, सोने ने 9 बार और डेट ने सिर्फ एक बार बेहतर प्रदर्शन किया है। इससे साफ है कि हाइब्रिड स्ट्रेटेजी कितनी जरूरी है। वेल्थ मैनेजर्स कहते हैं कि हाइब्रिड फंड्स टैक्स में बचत कराते हैं। अगर कोई खुद शेयर, डेट और सोने में निवेश करके अपना पोर्टफोलियो बनाता है, तो उसे शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स या फिर अपनी स्लैब के हिसाब से ज्यादा टैक्स देना पड़ सकता है, जिससे इनकम कम होती है। लेकिन हाइब्रिड फंड्स में निवेश करने से टैक्स में बचत होती है। इसकी वजह ये है कि इनमें से ज्यादातर कैटेगरीज को टैक्स के लिए इक्विटी फंड्स की तरह माना जाता है।

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