कभी बंद होने की कगार पर थी टाटा की तनिष्क, इस तरह एक आइडिया ने पलट दी बाजी, आज हो रही बंपर कमाई

Updated on 19-10-2023 03:06 PM
नई दिल्ली: देश में त्योहारों के दौरान लोग सोने-चांदी की जमकर खरीदारी करते हैं। आपने देश के ज्वैलरी सेगमेंट के एक प्रतिष्ठित ब्रांड तनिष्क का नाम जरूर सुना होगा। अब तनिष्क के स्टोर्स छोटे शहरों में भी तेजी से खुल रहे हैं। आज मुनाफे में चल रहा तनिष्क एक समय बंद होने की कगार पर पहुंच गया था। टाटा टाइटन की यह कंपनी जो कभी बंद होने जा रही थी, आज टाइटन के लिए संजीवनी बन चुकी है। आज हम आपको टाटा के तनिष्क की सफलता के बारे में बताने जा रहे हैं। आज से करीब 24-25 साल पहले इसके शानदार स्टोर खोले गए थे। बेहतरीन डिजाइन वाली जूलरी शोकेस की गईं थीं। लेकिन बात नहीं बनी। इतना ही नहीं, ब्रैंड के साथ टाटा घराने का नाम भी जुड़ा था। इसके बाद भी कुछ बात नहीं बन रही थी। लेकिन एक आइडिया ने पूरी बाजी पलट दी। आइए आपको बताते हैं तनिष्क की सफलता के बारे में।

ऐसे हुई शुरुआत

भारत में सबसे पहले ब्रैंडेड जूलरी पेश करने वाला ब्रांड तनिष्क (Tanishq) है। आज टाइटन कंपनी लिमिटेड (Titan Company Ltd) के इस ब्रैंड के देशभर में करीब 500 स्टोर हैं। इस टाइटन कंपनी की पहचान आज भले ही तनिष्क और इंडियन और वेस्टर्न लुक वाले गहनों से है, लेकिन कभी यह केवल घड़ियां बनाया करती थी। साल 1984 में टाइटन की शुरुआत हुई थी। इसके बाद टाइटन इंडस्ट्रीज ने तमिलनाडु के होसुर में एक कारखाना लगाया। वह गोल्ड और ब्रैंडेड जूलरी के बिजनेस में उतर गई। इस तरह भारत के पहले रिटेल जूलरी ब्रॉन्ड की शुरुआत हुई। इसका नाम तनिष्क रखा गया।

चेन्नई में खुला पहला शोरूम

तनिष्क का पहला शोरूम साल 1996 में चेन्नई में खोला गया। 18 कैरेट गोल्ड और डायमंड की जूलरी लॉन्च की गई। शानदार वेस्टर्न और इंडियन डिजाइन, लकदक शोरूम, करीने से शोकेस की गई जूलरी। लेकिन तनिष्क के लिए एक मुसीबत खड़ी हो गई। दरअसल भारत में लोग 22 कैरेट गोल्ड के गहनों के आदी थे। लोग ऐसे 18 कैरेट गोल्ड के गहने पसंद नहीं करते। गोल्ड वैसे भी भारतीयों का परंपरागत निवेश रहा है। ऐसे में वे 18 कैरेट पर दांव नहीं लगाते।

इस तरह पलटी बाजी

टाइटन ने भारतीयों की पसंद को देखते हुए साल 1999 में 22 कैरेट गोल्ड के गहने भी पेश कर दिए गए। इससे ग्राहकों का आना कुछ तो बढ़ा, लेकिन कोई खास फर्क पड़ता नहीं दिख रहा था। उधर, गहनों की मैन्युफैक्चरिंग और मार्केटिंग तक में ढेरों पैसा जा रहा था। टाटा ग्रुप के बोर्ड की ओर से जूलरी बिजनस बंद करने का दबाव आ रहा था। लेकिन टाइटन के लोग अपने तनिष्क को इस तरह छोड़ने को तैयार नहीं थे। इस दौरान तनिष्क ने एक प्रयोग किया जो काफी सफल रहा। दरअसल भारतीय जूलरी मार्केट में पहली बार एक स्पेक्ट्रोस्कोपिक डिवाइस कैरेटमीटर पेश किया गया। इसमें एक्सरे के सहारे गोल्ड की शुद्धता की झटपट जांच हो जाती है। कैरेटमीटर का आइडिया ऐसा जमा कि इसने तनिष्क को हमेशा के लिए बदल दिया।



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