मतभेदों के बीच टाटा ट्रस्ट्स का बड़ा फैसला, आजीवन इस पद पर बने रहेंगे वेणु श्रीनिवासन

Updated on 21-10-2025 02:37 PM
नई दिल्ली: टाटा ट्रस्ट्स में मतभेद की खबरों के बीच एक बड़ी खबर आई है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के ट्रस्टियों ने ट्रस्टी और वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन की फिर से नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। वह आजीवन अपने पद पर बने रहेंगे। इससे पहले ट्रस्टी और चेयरमैन नोएल टाटा को भी जनवरी में फिर से नियुक्त किया गया था। उनके कार्यकाल की कोई सीमा नहीं होगी। एसडीटीटी और एसआरटीटी की टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में संयुक्त रूप से 52% हिस्सेदारी है।

एक और ट्रस्टी मेहली मिस्त्री की फिर से नियुक्ति पर अगले कुछ दिनों में विचार किया जाना है। श्रीनिवासन की फिर से नियुक्ति अप्रत्याशित नहीं थी। इसकी वजह यह है कि टाटा का ट्रस्टों ने 17 अक्टूबर, 2024 को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था। इसमें कहा गया था कि किसी भी ट्रस्टी का कार्यकाल समाप्त होने पर, उस ट्रस्टी को संबंधित ट्रस्ट द्वारा फिर से नियुक्त किया जाएगा। ऐसी नियुक्ति की अवधि पर कोई सीमा नहीं लगाई जाएगी।

मीटिंग में फैसला

17 अक्टूबर, 2024 की बैठक में यह फैसला लिया गया कि कोई भी ट्रस्टी जो किसी अन्य ट्रस्टी की फिर से नियुक्ति के खिलाफ वोट देता है, वह अपनी प्रतिबद्धता का उल्लंघन करेगा और ट्रस्ट्स के बोर्ड में सेवा करने के लिए अयोग्य होगा। इसका मतलब है कि SDTT और SRTT के सभी ट्रस्टी आजीवन सेवा करेंगे।
साथ ही यह निर्णय भी लिया गया था कि सभी ट्रस्टी समान रूप से जिम्मेदार हैं। इस प्रकार ट्रस्टी की नियुक्ति महज औपचारिकता बन गई है। जेआरडी टाटा, रतन टाटा, जमशेद भाभा और आरके कृष्ण कुमार आजीवन ट्रस्टी रहे।नोशिर सूनावाला भीआजीवन ट्रस्टी थे लेकिन स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र के कारण दोनों ट्रस्टों के बोर्ड से हट गए। साथ ही निश्चित कार्यकाल वाले ट्रस्टी भी रहे हैं। आमतौर पर उनका कार्यकाल तीन साल का होता है जिन्हें समय-समय पर रिन्यू किया जाता रहा है। इसी बैठक में फैसला किया गया था कि ट्रस्ट्स द्वारा टाटा संस के बोर्ड में नॉमिनेट किए गए ट्रस्टियों का 75 साल की उम्र पूरी होने पर समीक्षा की जाएगी। इसी मुद्दे पर पिछले महीने ट्रस्टियों के बीच मतभेद हो गए थे।

सरकार का हस्तक्षेप

पूर्व डिफेंस सेक्रेटरी विजय सिंह के डायरेक्टरशिप की समीक्षा की गई। उन्होंने ट्रस्टियों का बहुमत नहीं मिला। सिंह की जगह मेहली को नियुक्त करने का सुझाव दिया गया, लेकिन नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इसके बाद सिंह ने टाटा संस के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया। इस मामले ने इतना तूल पकड़ा कि सरकार को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा। टाटा ग्रुप के शीर्ष अधिकारियों ने दिल्ली में दो वरिष्ठ मंत्रियों के साथ मीटिंग की थी।

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