
परियोजना से एमपी के दो और महाराष्ट्र के पांच जिलों के वाटर लेवल में सुधार आने की उम्मीद है। अब इसको लेकर जल्द ही महाराष्ट्र सरकार की ओर से एक प्रस्ताव अंतर्राज्यीय नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय जल आयोग व मध्यप्रदेश सरकार को भेजा जाएगा। इस परियोजना में इच्छापुर से अचलपुर तक करीब 26 किमी लंबी टनल गुजरेगी।
इस बीच वन विभाग का 40 किमी क्षेत्र में फैला मुक्ताई भवानी जाग्रत प्रकल्प है। यह पूरा क्षेत्र पूर्णा नदी का कछार है। इस परियोजना से मध्यप्रदेश का 1.23 लाख हेक्टेयर एवं महाराष्ट्र का 2.34 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पुनर्भरण से लाभान्वित होने वाला है तथा 48 हजार हेक्टेयर में सिंचाई की जा सकेगी।
इस परियोजना का लाभ पाने वाले जिलों में मध्यप्रदेश के बुरहानपुर एवं खंडवा तथा महाराष्ट्र के जलगांव, बुलढाणा, अकोला और अमरावती जिले के क्षेत्र सम्मिलित हैं। बताया गया कि इस अंतर्राज्यीय परियोजना के माध्यम से 90 हजार करोड़ लीटर (31 टीएमसी) पानी का हर वर्ष पुनर्भरण होना है। दोनों ही राज्य की सरकारों द्वारा इसको लेकर पूर्व में किए गए प्रयास के बाद वेप्कोस नई दिल्ली कार्यालय ने डीपीआर फाइनल कर दिया है।
इस परियोजना अंतर्गत पुनर्भरण से जलस्तर बढ़ने, भूजल गुणवत्ता सुधार, महाराष्ट्र के विदर्भ के खारपण पट्टी में पानी की क्षारीयता में कमी के साथ भूजल उपयुक्तता बढ़ाने, तालाब से सीधी सिंचाई होने एवं पर्यावरण का संरक्षण व संवर्द्धन का काम होना है।
योजना की अनुमानित लागत 19 हजार करोड़ रुपए तथा समुचित लाभांश क्षेत्र 3.57 लाख हेक्टेयर है। कोरोना के कारण इस परियोजना का काम तीन साल रुका और इसी के चलते सात हजार करोड़ की परियोजना की लागत बढ़ गई।