सूरत के डायमंड एक्सचेंज ने अमेरिका के पेंटागन को छोड़ा पीछे, बनी दुनिया की सबसे बड़ी बिल्डिंग, देखें तस्वीरें

Updated on 19-07-2023 01:37 PM
अभी तक दुनिया में सबसे बड़ी ऑफिस बिल्डिंग का खिताब अमेरिका के रक्षा विभाग के मुख्यालय भवन पेंटागन (US Pentagon) के नाम रहा है। इस बिल्डिंग में सबसे ज्यादा कर्मचारी काम करते थे। लेकिन अब सूरत में 4 साल की लागत से तैयार हुए सबसे बड़े डायमंड एक्सचेंज ने अमेरिका के पेंटागन को पीछे छोड़ दिया है। ये दुनिया की सबसे बड़ी बिल्डिंग बन गई है। इस इमारत का आधिकारिक उद्घाटन इस साल नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) द्वारा किया जा सकता है। सूरत को दुनिया की रत्न राजधानी के रूप में जाना जाता है जहां दुनिया के 90 प्रतिशत हीरे तराशे जाते हैं।

बेहद शानदार है बिल्डिंग

ऐसा बताया जा रहा है कि इस इमारत में 65,000 से अधिक हीरा प्रोफेशनल्‍स काम कर सकेंगे। इसमें पॉलिशर्स, कटर्स और व्‍यापारी आदि शामिल होंगे। इसे वन स्‍टॉप डेस्टिनेशन के रूप में बनाया गया है।

सूरत डायमंड बोर्स नाम

इस इमारत को सूरत डायमंड बोर्स नाम दिया गया है। मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 15 मंजिला इमारत 35 एकड़ भूमि में फैली हुई है और इसमें नौ आयताकार बिल्डिंग्स है जो सभी एक सेंट्रल स्‍पाइन से जुड़ी हुई हैं। विशाल परिसर का निर्माण करने वाली कंपनी के अनुसार, इसमें 7.1 मिलियन वर्ग फुट से अधिक फ्लोर स्‍पेस शामिल है।

खूब तराशे जाते हैं हीरे

बता दें कि सूरत में दुनिया के 90 फीसदी हीरे तराशे जाते हैं। इस बिल्डिंग में 131 एलिवेटर्स और दूसरी फैसिलिटीज़ भी हैं। इस प्रोजेक्ट से मुंबई से आने वाले हजारों कर्मचारियों को मदद मिलेगी।

गैर-लाभकारी एक्सचेंज

एसडीबी यानी कि सूरत डायमंड एक्सचेंज एक गैर-लाभकारी एक्सचेंज है, जो कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 8 के तहत पंजीकृत कंपनी है। ये बिल्डिंग सूरत और गुजरात में डायमंड बोर्स की स्थापना और प्रचार के लिए बनाई गई है।

पार्किंग का बड़ा स्पेस

इस आफिस कॉम्प्लेक्स में एक मनोरंजन क्षेत्र और पार्किंग क्षेत्र है जो 20 लाख वर्ग फीट में फैला हुआ है। नया भवन परिसर हजारों लोगों को व्यवसाय करने के लिए शानदार अवसर देगा।

हीरा कंपनियों खरीद लिए थे ऑफिस

इस इमारत के बनने से पहले ही हीरा कंपनियों ने अपने-अपने ऑफिस खरीद लिए थे। इस बिल्डिंग को एक अंतरराष्ट्रीय डिजाइन प्रतियोगिता के बाद भारतीय वास्तुकला फर्म मॉर्फोजेनेसिस द्वारा डिजाइन किया गया है।

4 साल में बनकर हुई तैयार

इस इमारत को बनने में पूरे 4 साल का समय लगा है। इसे नई दिल्ली स्थित भारतीय वास्तुकला फर्म मॉर्फोजेनेसिस द्वारा डिजाइन किया गया है। सीएनएन के मुताबिक, इन परियोजनाओं की लागत करीब 32 अरब रुपये है।

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