'सुपरपावर अमेरिका-इजरायल की सैन्‍य ताकत बहुत ज्यादा फिर भी,' ट्रंप के लिए क्यों आसान नहीं ईरान की राह

Updated on 28-02-2026 05:07 PM
तेल अवीव: ईरान और अमेरिका-इजरायल का दो महीने से टल रहा युद्ध आखिरकार शुरू हो गया है। शनिवार को इजरायल और इजरायल ने ईरान में हमले किए हैं। इसके जवाब में ईरान की ओर से इजरायल और अमेरिकी आर्मी बेस पर मिसाइलें दागी जा रही हैं। लड़ाई में इजरायल और यीएस मिलिट्री को ईरान की आर्म्ड फोर्से पर बहुत ज्यादा भारी है। एक्सपर्ट का कहना है कि बढ़त का मतलब यह नहीं है कि उसको सफलता मिल जाएगी। ईरान भी इजरायल और अमेरिका को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।

टाइम्स ऑफ इजराल के मुताबिक, ईरान अगर लड़ाई के मैदान में अमेरिका को चुनौती देने में नाकाम रहता है तो भी वॉशिंगटन के लिए किसी कैंपेन को सफल घोषित करना मुश्किल होगा। इसके लिए ट्रंप प्रशासन को तय करना होगा कि तेहरान के साथ मिलिट्री लड़ाई के क्या लक्ष्य हैं, जो वॉशिंगटन अब तक करने में नाकाम है।

ईरान में मुश्किल अमेरिका की राह

यूरोपियन कमांड के पूर्व डिप्टी कमांडर और अमेरिका के ज्यूइश इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी में फेलो जनरल चार्ल्स वाल्ड (रिटायर्ड) कहते हैं, 'मुझे नहीं लगता कि अमेरिका ईरान में जमीन पर हमला करके वहां सत्ता बदलेगा। मुझे लगत है कि ऐसा नहीं होने वाला है। अमेरिका प्लेन और मिसाइलों का इस्तेमाल करके हवा से मिलिट्री कैंपेन चलाया जाएगा।रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एक्सपर्ट थॉमस विथिंगटन ने कहा, 'ईरान ने अपनी एयर डिफेंस कैपेसिटी पर काम किया है। रूस और चीन से उसे इसमें मदद मिली है। हालांकि विथिंगटन ने जोर देकर कहा कि मुझे यह उम्मीद नहीं है कि ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम यूएस एयर पावर को कोई खास चुनौती देगा।

डोनाल्ड ट्रंप का लक्ष्य साफ नहीं

सैन्य ताकत में मजबूती के बावजूद एक्सपर्ट को लगता है कि एक सफल कैंपेन के लिए सबसे बड़ी चुनौती शायद खुद डोनाल्ड ट्रंप की अपनी बनाई हुई हो। ईरान पर हमले और सैन्य मुकाबले के लिए अब तक साफ लक्ष्य तय ना कर पाना डोनाल्ड ट्रंप की सबसे बड़ी चुनौती है। ट्रंप बीते साल हूतियों के खिलाफ एक बेनतीजा ऑपरेशन चला चुके हैं।

डोनाल्ड ट्रंप को वेनेजुएला में मिलिट्री ऑपरेशन में सफलता मिली है। हालांकि ईरान पर यह साफ नहीं है कि ट्रंप तेहारन में खामेनेई की सत्ता को गिराने के लिए एक बड़ा लंबा कैंपेन चुनेंगे या वह क्षमताओं को कम करने और ईरान को एक मंज़ूर न्यूक्लियर डील की ओर धकेलने के लिए एक सीमित हमला चुनेंगे।

तेहरान में बदलाव कैसे होगा

विथिंगटन कहते हैं, 'जब आपके मकसद धुंधले होने लगते हैं तो आप शायद मुश्किल हालात में पड़ने लगते हैं। मुझे लगता है कि इस मामले में यही है।ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के लिए सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह है कि वह सफल एयर कैंपेन चला सकते हैं लेकिन यह साफ नहीं है कि तेहरान में बदलाव के लिए उनके पास क्या है।

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