इंदौर। करीब एक महीने बाद हाई कोर्ट, जिला कोर्ट की रौनक सोमवार से फिर लौट आई। 13 मई को राष्ट्रीय लोक अदालत थी। इसके तुरंत बाद न्यायालयों में ग्रीष्मावकाश शुरू हो गया था जो सोमवार यानी 12 जून को समाप्त हो गया। ग्रीष्मावकाश में सूना नजर आ रहा जिला न्यायालय परिसर अब सोमवार से एक बार फिर वकील और पक्षकारों से गुलजार हो गया।
इधर हाई कोर्ट में भी नियमित सुनवाई शुरू हो गई। ग्रीष्मावकाश के दौरान सिर्फ सोमवार और गुरुवार को ही सुनवाई हो रही थीं। इनमें भी सिर्फ अर्जेंट मामले ही सुने जा रहे थे। जिला न्यायालय में 80 से ज्यादा न्यायालय लगते हैं। कहने को ग्रीष्मावकाश में आपराधिक मामलों की नियमित सुनवाई जारी रहती है लेकिन वकीलों के शहर के बाहर होने की वजह से इनमें भी ज्यादातर मामलों में सिर्फ तारीख आगे बढ़ती है।
न्यायालयों में ग्रीष्मावकाश की परंपरा दशकों पुरानी है। वरिष्ठ अभिभाषकों के मुताबिक यह परंपरा आजादी के पहले शुरू हुई थी। उस वक्त ज्यादातर न्यायालयों में ब्रिटिश न्यायाधीश नियुक्त होते थे। न्यायालय कक्षों में आज की तरह अत्याधुनिक सुविधाएं भी नहीं होती थीं। यही वजह थी कि गर्मी की वजह से न्यायाधीशों के लिए काम करना मुश्किल होता था। वर्तमान में तो न्यायालय कक्ष अत्याधुनिक बन गए हैं। आवागमन भी सुगम हो गया है।
आइस्क्रीम पार्टी के साथ हुई थी ग्रीष्मावकाश की शुरुआत
हाई कोर्ट में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी ग्रीष्मावकाश के ठीक पहले अंतिम कार्यदिवस पर आइस्क्रीम पार्टी आयोजित हुई थी। अधिवक्ताओं के साथ-साथ न्यायमूर्तिगण भी इस पार्टी में शामिल हुए और आइस्क्रीम का आनंद लिया था। परंपरागत तरीके से आयोजित इस पार्टी का आयोजन हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष की ओर से होता है। वरिष्ठ अभिभाषकों के अनुसार आइस्क्रीम पार्टी आयोजित करने की परंपरा भी दशकों पुरानी है। कोरोनाकाल में यह सिलसिला जरूर टूटा लेकिन अब यह फिर शुरू हो गया है।