
विदेश में रहने वाले शहर के लोग ग्वालियर के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं। विदेश में अच्छी तरह सेटल होने के बाद भी इन लोगों ने अपने शहर के लिए सोचा और यूनीक कॉन्सेप्ट पर स्टार्टअप भी शुरू किए। इन स्टार्टअप का सीधा फायदा शहर के युवाओं को मिल रहा है। साथ ही स्टार्टअप का टर्न ओवर 2.50 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। बाहर रहकर शहर के लिए कुछ करने का जज्बा इन लोगों से सीखा जा सकता है। खबर के जरिए ऐसे ही लोगों की कहानियां बता रहे हैं।
27 साल से बोस्टन में रह रहे, कोरोना काल के बाद स्टार्टअप से 20 युवाओं को दिया रोजगार
27 साल से बोस्टन में बसे शहर के संजीव त्रिपाठी ने कोरोना काल के बाद शहर में आईटी स्टार्टअप की नींव रखी। वर्क फ्रॉम होम के दौर में उन्हें पता था कि स्किल्ड लोगों की जरूरत पड़ेगी। इसी को ध्यान में रखकर उन्होंने पत्नी अर्चना के साथ इसकी शुरुआत की। ये कोरोना के बाद का वो दौर था जब युवाओं को नौकरी की सबसे ज्यादा जरूरत थी। उस समय उनके स्टार्टअप ने युवाओं को ट्रेंड किया। बोस्टन से टेलिफोनिक चर्चा में उन्होंने बताया कि स्टार्टअप से सीधे तौर पर 20 लोगों को रोजगार मिल रहा है और इसका टर्न ओवर 2.50 करोड़ तक पहुंच गया है। यह स्टार्टअप आईटी रिक्रूटमेंट, डिजिटल मार्केटिंग और आईटी टेक्नोलॉजी से संबंधित क्षेत्र में कार्य करता है।
यूएसए में रहने वाले दो दोस्तों ने शुरू की हाइड्रोपोनिक खेती
यह कहानी है ग्वालियर के दो दोस्त शुभम शर्मा और अनुज अग्रवाल की। चार साल पहले दोनों की मुलाकात यूएसए में हुई। मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाले शुभम और अनुज ने देखा कि यूएसए में हाइड्रोपोनिक खेती का कल्चर है। इससे लोगों को तरोताजा सब्जी मिलती हैं, जो शरीर के लिए हानिकारक नहीं होती हैं। दोनों ने ग्वालियर में इसकी शुरुआत की और जलालपुर में इसका प्लांट लगाया। स्टार्टअप को बेहतर ढंग से चलाने अनुज 1 करोड़ का पैकेज छोड़ ग्वालियर आए। दोनों बताते हैं कि हमारा स्टार्टअप बॉक्स में सब्जी सप्लाई करता है और रोजाना ग्वालियर में इसकी सप्लाई हो रही है। अब हम ग्वालियर के बाहर भी इसकी सप्लाई करेंगे।