
भोपाल नगर निगम की गाड़ियों की रिपेयरिंग के लिए बनाई गई सेंट्रल वर्कशॉप में लंबे समय से एक बड़ा घोटाला चल रहा है। निगम की जो गाड़ियां ठीक हैं, उन्हें भी खराब बताकर वर्कशॉप में लाया जा रहा है और रिपेयरिंग के लिए फर्जी फाइलें, रिपोर्ट लगाकर असली भुगतान किया जा रहा है। ये पूरा खेल यहां के वर्कशॉप के अफसर, मैकेनिकों और निगम अफसरों की देखरेख में हो रहा है।
दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि मैकेनिक गाड़ियों को वर्कशॉप लाने के लिए ड्राइवरों को फोन करते हैं। यहां गाड़ी की एंट्री होती है। ड्राइवर बताते हैं कि गाड़ी में क्या खराबी है। जो गाड़ी दो दिन पहले वर्कशॉप से ठीक हो निकली है, वही दो दिन बाद दोबारा नई खराबी बताकर रिपेयरिंग के लिए लाई जाती है। हर बार रिपेयरिंग के नाम पर 50 हजार से 1 लाख रु. तक की बिलिंग की जाती है। जिस रजिस्टर पर गाड़ियों की एंट्री और उनकी खराबी नोट की जाती है, उसमें एक ही गाड़ी महीने में कई बार लाना दर्ज है। बता दें कि इसी वर्कशॉप में पहले स्पेयर पार्ट्स घोटाला हो चुका है। ये घोटाला 4 साल पहले हुआ था। तत्कालीन आयुक्त छवि भारद्वाज ने वर्कशॉप से दस हजार से अधिक फाइलें जब्त की थीं। फिलहाल ताजा मामले पर नगर निगम आयुक्त वीएस चौधरी कोलसानी का कहना है कि हम इसकी जांच कराएंगे।
1500 गाड़ियां, फिर भी 5.50 करोड़ का भुगतान
नगर निगम के पास 1500 से ज्यादा गाड़ियां हैं। हर जोन का अलग अमला है। फिर भी वर्कशॉप ने 10 अगस्त 2022 से 17 अक्टूबर 2022 तक 5 करोड़ 50 लाख रुपए का किराया भुगतान लक्की ट्रैवल्स, बेस्ट टूर एंड ट्रैवल्स को किया। लक्की ट्रैवल्स को अकेले 90 लाख 58 हजार 793 रुपए का भुगतान हुआ। इससे टाटा 407 किराए पर ली गई थी। डंपर, जेसीबी के लिए 3 करोड़ 79 लाख से ज्यादा का भुगतान हुआ। ये गाड़ियां कहां चलीं, इसका जवाब निगम के अफसरों के पास नहीं है। किस काम के लिए कितने घंटे इस मशीनरी का उपयोग हुआ, इसका भी कोई रिकॉर्ड नहीं है।
केस 1- एक गाड़ी, हफ्ते में चार दिन खराबी, हर बार भुगतान
एमपी 04एलडी-170 टाटा मैजिक 21, 24, 25 और 26 नवम्बर 2020 को चार बार सुधार कार्य के लिए वर्कशॉप में लाई गई। 21 नवम्बर को एयर फिल्टर खराब होना बताया गया। ये गाड़ी जोन-11 में से यहां पर आई थी। जबकि 24 नवम्बर को ये गाड़ी जोन नंबर 11 से दोबारा आई। इसमें सेल्फ, हेडलाइन, वायरिंग में खराबी बताई गई। 25 नवम्बर को तीसरी बार ये गाड़ी वर्कशॉप पहुंची और बताया गया कि गेयर लिवर खराब हो गया है। 26 नवम्बर को इसमें पार्टिशन होना बताया गया।
केस 2- एक गाड़ी, दो बार कलर, दोनों बार किया पेमेंट
एमपी 04-एलसी 9676। ये टाटा मैजिक है। 3 सितम्बर 2021 को ये गाड़ी जोन-17 में चल रही थी। उसी दिन मैकेनिक शामिम एसके ताहिर के पास सेंट्रल वर्कशॉप में पहुंचती है। बताया जाता है कि वाहन का पुराना कलर खराब हो गया है। यहां पर हुए काम के बाद गाड़ी दोबारा अपने जोन में चली जाती है। फर्जी बिल पर इसका भुगतान भी हो जाता है। एक दिन बाद यही गाड़ी दोबारा वर्कशॉप में आती है। बताया जाता है कि गाड़ी में कलर-पॉलिश होना है। इस बार रिपोर्ट में दूसरे ड्राइवर का नाम लिखा जाता है। गड़बड़ी पकड़ में न आए, इसलिए जोन-17 की जगह 16 लिखा जाता है। फर्जी बिल के आधार पर दोबारा एक ही गाड़ी को दो-अलग अलग जोन में चलना दिखाकर भुगतान होता है।