राहुल बोले- देश को मध्यकाल में धकेला जा रहा:तब राजा का मूड ही कानून था, वे नापसंद लोगों को गिरफ्तार करवा देते थे

Updated on 21-08-2025 11:59 AM

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों या मंत्रियों को गंभीर केस में गिरफ्तारी पर पद से हटाने से जुड़े तीन बिलों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश को मध्ययुगीन काल में वापस धकेला जा रहा है, जब राजा किसी को भी गिरफ्तार करवा देते थे, जो उन्हें पसंद नहीं होता था।

राहुल संविधान सदन (पुरानी संसद) के सेंट्रल हॉल में विपक्ष के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी के सम्मान समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, 'निर्वाचित प्रतिनिधि की अब कोई अवधारणा ही नहीं बची। उन्हें आपका चेहरा पसंद नहीं तो ED से केस करा दिया, 30 दिन में लोकतांत्रिक तरीके से चुना व्यक्ति खत्म।'

राहुल ने कहा, 'भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति (जगदीप धनखड़) आखिर छुपे हुए क्यों हैं? क्यों ऐसी नौबत आ गई कि वो बाहर आ कर एक शब्द भी नहीं बोल सकते? जो राज्यसभा में जोरदार बोलते थे, चुप हो गए। वे इस्तीफा देने के बाद गायब हो गए। इसके पीछे बड़ी कहानी है। वे छुपे क्यों हैं? सोचिए हम ऐसे दौर में हैं, जहां पूर्व उपराष्ट्रपति एक शब्द नहीं बोल सकते।'

गृहमंत्री ने PM-CM और मंत्री को हटाने वाले बिल पेश किया

20 अगस्त को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार और लगातार 30 दिन हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाने के प्रावधान वाले बिल पेश हुए। गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष के भारी विरोध और हंगामे के बीच तीनों बिल लोकसभा में पेश किए।

ये तीनों बिल अलग-अलग इसलिए लाए गए हैं, क्योंकि केंद्र सरकार, राज्य सरकार और केंद्र शासित राज्यों के लीडर्स के लिए अलग-अलग प्रावधान हैं।

  • पहला बिल: 130वां संविधान संशोधन बिल 2025 है, जो केंद्र और राज्य सरकारों पर लागू होगा।
  • दूसरा बिल: गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटरीज (संशोधन) बिल 2025 है, जो केंद्र शासित राज्यों के लिए है।
  • तीसरा बिल: जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2025 है, जिसे जम्मू-कश्मीर पर लागू किया जाएगा।

शाह ने बिलों को विस्तृत अध्ययन के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजने का प्रस्ताव दिया, जिसे मंजूरी मिल गई। बिल पेश होने के दौरान विपक्षी सांसद नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए।

कुछ सदस्यों ने बिल की कॉपियां फाड़ दीं। कांग्रेस, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और सपा ने बिलों को न्याय विरोधी, संविधान विरोधी बताया। हंगामे के बीच मार्शलों की सुरक्षा घेरा बनाना पड़ा।

1. गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटरीज (संशोधन) बिल 2025

केंद्र सरकार के मुताबिक, अभी केंद्र शासित प्रदेशों में गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटरीज एक्ट, 1963 (1963 का 20) के तहत गंभीर आपराधिक आरोपों के कारण गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए मुख्यमंत्री या मंत्री को हटाने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए ऐसे मामलों में मुख्यमंत्री या मंत्री को हटाने के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार करने के लिए गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटरीज एक्ट, 1963 की धारा 45 में संशोधन की आवश्यकता है।

2. 130वां संविधान संशोधन बिल 2025

केंद्र ने इस बिल को लेकर बताया कि संविधान में किसी ऐसे मंत्री को हटाने का कोई प्रावधान नहीं है जिसे गंभीर आपराधिक आरोपों के कारण गिरफ्तार किया गया हो और हिरासत में लिया गया हो।

इसलिए ऐसे मामलों में प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के किसी मंत्री और राज्यों या नेशनल कैपिटल टेरिटरी दिल्ली के मुख्यमंत्री या मंत्रिपरिषद के किसी मंत्री को हटाने के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में संशोधन की जरूरत है।

3. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2025

जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 (2019 का 34) के तहत गंभीर आपराधिक आरोपों के कारण गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए मुख्यमंत्री या मंत्री को हटाने का कोई प्रावधान नहीं है। जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 54 में संशोधन के बाद गंभीर आपराधिक केस में गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए मुख्यमंत्री या मंत्री को 30 दिन में हटाने का प्रावधान होगा।



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