इंदौर। प्रश्नपत्र लीक कांड में पुलिस ने निजी महाविद्यालय के एक प्राध्यापक को पकड़ा है। पूछताछ में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आया है। इससे परीक्षा की गोपनीयता से जुड़ी व्यवस्था पर प्रश्न खड़े होने लगे हैं, क्योंकि परीक्षा शुरू होने से कुछ मिनट पहले केंद्रों को प्रश्नपत्र वाले बंद लिफाफे को खोलने का नियम है। यह पूरी प्रक्रिया परीक्षा केंद्र में लगे सीसीटीवी यानी कैमरे के सामने करनी होती है, लेकिन 80 प्रतिशत केंद्रों पर इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। यहां तक कि लिफाफे से प्रश्नपत्र निकालने की रिकार्डिंग भी संभालकर नहीं की जाती है और न विश्वविद्यालय को भेजी जाती है।
बीते साल स्नातक की परीक्षा के दौरान कई केंद्रों पर विद्यार्थी प्रश्नपत्र शुरू होने के आधे घंटे बाद परीक्षा कक्ष में पहुंचते थे। शिकायत मिलने के बाद देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने पाया कि केंद्रों के बाहर खड़े विद्यार्थियों के पास प्रश्नपत्र पहुंचे थे। इसके बाद विश्वविद्यालय ने परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए व्यवस्था में बदलाव किए। केंद्रों को सील बंद लिफाफे से प्रश्नपत्र सीसीटीवी के निकालने को कहा।
इसका वीडियो परीक्षा के लिए बनाए कंट्रोल रूम को भेजने पर जोर दिया। कुछ समय तक केंद्रों ने इस व्यवस्था का पालन किया। मगर मार्च से व्यवस्था बेपटरी हो चुकी है। 80 फीसद केंद्र वीडियो नहीं बनाते हैं। यहां तक कि नए केंद्रों में कैमरे तक नहीं लगे हुए हैं। इस लचर व्यवस्था का जमकर केंद्र फायदा उठाने में लगे हैं।
परीक्षा नियंत्रक डा. अशेष तिवारी ने कहा कि बहुत कम केंद्र प्रश्नपत्र निकालने के दौरान सीसीटीवी कैमरे की रिकार्डिंग रखते है। कुछ समय तक विश्वविद्यालय को भी भेजते थे, मगर अभी केंद्रों से कोई जानकारी नहीं मिलती है।
यह रहती है व्यवस्था
- अन्य जिलों में बनने वाले परीक्षा केंद्रों पर 36 से 48 घंटे पहले विश्वविद्यालय बंद लिफाफे में प्रश्नपत्र भिजवाते हैं। प्रश्नपत्र का लिफाफे नजदीकी थाने में रखा जाता है, जो परीक्षा शुरू होने से घंटेभर पहले केंद्राध्यक्षों को थाने से लाना होता है। सील बंद लिफाफों को सीसीटीवी कैमरे के सामने खोलना होता है।
- वैसे ही इंदौर में बनाए जाने वाले केंद्रों पर भी 24 घंटे पहले प्रश्नपत्र भिजवाए जाते हैं या केंद्र प्रश्नपत्र शुरू होने से पहले विवि से प्राप्त करते हैं।
घटा दिया है समय
पहले विश्वविद्यालय ने प्रश्नपत्र शुरू होने के आधे घंटे बाद तक विद्यार्थियों को केंद्र में प्रवेश देने का नियम बनाया था, लेकिन इसका दुरुपयोग होने के मामले सामने आने पर अब समय को घटा दिया गया है। अब परीक्षा केंद्रों पर नियत समय के 10-15 मिनट देरी होने पर ही प्रवेश की छूट विद्यार्थियों को दी जाती है।