मोदी के लौटते ही पावर, पेट्रोलियम और रक्षा मंत्री की लगेगी क्लास, निर्मला को देना होगा हिसाब

Updated on 22-06-2023 08:35 PM
नई दिल्ली: मोदी सरकार का दूसरा कार्यकाल पूरा होने में अब 11 महीने का समय रह गया है। लेकिन कई मंत्रालय बजट में की गई घोषणाओं को अब तक लागू नहीं कर पाए हैं। खासकर पेट्रोलियम, पावर और डिफेंस जैसे मंत्रालयों ने पूंजीगत खर्च के मामले में सबसे ज्यादा सुस्ती दिखाई है। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) अमेरिका और मिस्र की यात्रा से लौटने पर अपने मंत्रियों के साथ एक बैठक करेंगे। इसमें सरकार के बाकी 11 महीनों के कामकाज पर फोकस रहेगा। अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले सरकार हर मोर्चे पर चुस्त दुरुस्त दिखना चाहती है। लेकिन उसका जोर खासकर तीन मोर्चो पर रहेगा। इनमें सरकारी कंपनियों का पूंजीगत खर्च, वेलफेयर स्कीम्स को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना और बजट में की गई घोषणाओं का कार्यान्वयन शामिल है। इसलिए माना जा रहा है कि इस बैठक में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) समेत कई मंत्रियों से हिसाब-किताब लिया जाएगा।


यूनियन बजट 2023-24 में कैपिटल एक्सपेंडीचर के लिए 10.1 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था जो पिछले साल के संसोधित अनुमानों की तुलना में 33 फीसदी अधिक है। पेट्रोलियम, पावर और डिफेंस जैसे मंत्रालयों ने अब तक इसमें से सबसे कम खर्च किया है। एक सूत्र ने कहा कि कैपिटल एक्सपेंडीचर को यूज करना बहुत जरूरी है और इस पर करीबी नजर रखने की भी जरूरत है। साथ ही सरकार इस बात से भी वाकिफ है कि पिछले साल संसोधित अनुमानों में कैपिटल आउटले को 6,000 करोड़ रुपये कम कर दिया गया था।

वेलफेयर स्कीम्स पर फोकस

सरकार के लिए अपनी फ्लैगशिप वेलफेयर स्कीम्स पर फोकस भी जरूरी है। इनमें पीएम आवास योजना, आयुष्मान भारत और जल जीवन मिशन शामिल हैं। इन योजनाओं का फायदा उठाने वाले लोगों में एक बहुत बड़ा वर्ग बीजेपी का वोट वैंक बनकर उभरा है। ऐसे में सरकार का लक्ष्य आने वाले दिनों में ज्यादा से ज्यादा लोगों को इन योजनाओं से जोड़ना है। एक सूत्र ने कहा कि इन योजनाओं का सैचुरेशन सरकार के लिए बहुत जरूरी है। इनका लाभ जमीनी स्तर पर लोगों तक पहुंच रहा है और मनरेगा जैसी योजनाओं से नया इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार हो रहा है। इससे सरकार को राजनीतिक लाभ भी मिलता है।

तीसरा मुद्दा बजट में की गई घोषणाओं को लागू करने का है। इसके भी अपने राजनीतिक फायदे हैं। पिछले बजट में सरकार ने करीब 30 बड़ी घोषणाएं की थी। इस फाइनेंशियल ईयर में अब केवल नौ महीने रह गए हैं। इसलिए इसकी समीक्षा भी जरूरी समझी जा रही है। एक सूत्र ने कहा कि ये सारी घोषणाएं अहम हैं और सरकार चाहती है कि इन्हें सही ढंग से लागू किया जाए। आम चुनावों में अब कुछ ही महीने का समय रह गया है। सरकार का जोर इकॉनमी को बूस्ट करने के लिए पूंजीगत खर्च करने और ज्यादा से ज्यादा लोगों को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने पर रहेगा। अधिकांश प्रस्तावों को एक्सपेंडीचर फाइनेंस कमेटी और संबंधित मंत्रालयों से मंजूरी मिल चुकी है।

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