अस्पताल में बिजली गुल, 4 बच्चों की मौत:अंबिकापुर में SNCU वार्ड में भर्ती थे; परिजन बोले-हॉस्पिटल की लापरवाही से गई जान

Updated on 05-12-2022 10:12 PM

छत्तीसगढ़ में अंबिकापुर के अस्पताल में 4 बच्चों की मौत हो गई। बच्चे स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट (SNCU) में भर्ती थे। इस बीच रविवार रात को यहां बिजली गुल हुई। अगले दिन सुबह पता चला है कि 4 बच्चों की जान चली गई है। पूरे मामले को लेकर बच्चों के परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अस्पताल की लापरवाही के कारण जान गई है। पूरा मामला मेडिकल कॉलेज स्थित मातृ शिशु अस्पताल का है।

प्रबंधन बोला-बच्चों की हालत पहले से क्रिटिकल
उधर, खबर सुनते ही परिजनों का गुस्सा फूट गया। परिजन कहने लगे कि बिजली बंद हुई थी। इस वजह से बच्चों की जान गई है। अस्पताल ने भी लापरवाही की है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि बिजली जरूर कुछ देर के लिए बंद हुई थी, लेकिन वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सपोर्ट चालू था। बच्चों की हालत पहले से क्रिटिकल थी।

सीनियर अधिकारी पहुंचे अस्पताल
इधर, इस बात की खबर लगते ही मौके पर अस्पताल के डीन रमणेश मूर्ति, कलेक्टर कुंदन कुमार और सीएमएचओ पीएस सिसोदिया समेत तमाम अधिकारी पहुंचे । वार्ड का निरीक्षण करने के बाद कलेक्टर कुंदन कुमार ने कहा है कि बच्चों की क्रिटिकल कंडीशन थी। हमने डॉक्टरों से भी बात की है। उन्होंने कहा कि बिजली की समस्या से वेंटिलेटर या अन्य जो भी सुविधाएं होती हैं। वो बंद नहीं हुई थी। हम इसकी फिर से जांच कराएंगे।

मैंने इलेक्ट्रीशियन से बाती है, उसने बताया कि बिजली की समस्या रात को डेढ़ बजे के आस-पास हुई थी। पैनल जल गया था, लेकिन एसएनसीयू के लिए जो बैकअप था, वह पूरी तरह से काम कर रहा था। अभी ये जानकारी मिली है, हम तकनीकी टीम का गठ करेंगे, सीसीटीवी फुटेज की भी जांच करवाएंगे।

घटना के बाद एक बच्चे के परिजन ने बताया कि जो भी हुआ है, वह लाइट गोल होने के कारण हुआ है। बच्चों को खुले में रखा जाता है। परिजन ने कहा कि लाइट बहुत देर तक गोल था। लेकिन प्रबंधन ने कोई व्यवस्था नहीं की थी। कुछ समझ में ही नहीं आया। बाद में हमें मौत की जानकारी दी गई है।

हमने नहीं बंद की बिजली

इस मामले में बिजली विभाग के EE SP कुमार ने कहा है कि मेडिकल कॉलेज की एमसीएच बिल्डिंग के पैनल में खराबी आई थी। इसके कारण करीब 2 घंटे बिजली बंद रही है। लेकिन बिजली विभाग की तरफ से बिजली सप्लाई बंद नहीं की गई थी। इसमें कहीं कोई कमी नहीं आई थी।

इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि 4 बच्चों की मौत की जानकारी मुझे मिली है। इसलिए विभागीय प्रमुख अधिकारी, हेल्थ सेक्रेटरी को फोन कर तत्काल एक जांच टीम गठित कर जांच कराने के निर्देश दिए हैं। मैंने सीएम को भी इस बात की जानकारी दे दी है। मैं खुद अस्पताल जाऊंगा और जायजा लूंगा। इस बात का पता लगाया जाएगा। ये देखा जाएगा कि कहां कमियां आई हैं। मौके पर जाकर हम जानकारी लेंगे। परिजनों से भी बात करेंगे। अगर जरूरत पड़ी तो कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

SNCU ‌‌वार्ड के बारे में जान लीजिए

एसएनसीयू में नवजातों के इलाज के लिए वेंटिलेटर, फोटोथेरेपी डिवाइस, सी-पैप जैसी सभी तरह की व्यवस्था होती हैं। जिसे 24 घंटे चिकित्सक, प्रशिक्षित एएनएम, जीएनएम की निगरानी में संचालित किया जाता है। एसएनसीयू में नवजात शिशु के हर तरह के गंभीर बीमारी का इलाज किया जा सकता है।

यहां जन्म के समय बहुत कम वजन, सांस लेने में समस्या, जन्म के बाद न रोने वाले, रेस्पिटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम से ग्रसित, जन्म के बाद से ही पेट में समस्या से ग्रसित, रुक-रुक कर सांस लेने वाले, निमोनिया जैसे अनेक तरह की बीमारी से ग्रसित बच्चों का इलाज किया जाता है। यहां 24 घंटे निगरानी में रखते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों से उनका इलाज किया जाता है जिससे उसे स्वस्थ्य किया जा सके। कई बार ऐसा देखा गया है कि जन्म के बाद बच्चा काफी कमजोर होता है। ऐसे में एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कर उसका इलाज किया जाता है।

सालभर पहले भी 4 बच्चों की मौत हुई

वहीं सालभर पहले अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज सह-जिला अस्पताल में भर्ती 4 नवजात बच्चों की 3 घंटे के भीतर मौत हो गई थी। सभी नवजात एसएनसीयू में भर्ती थे। इसके बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में सुबह हंगामा किया और सामने की सड़क जाम कर दी थी। परिजन ने बच्चों के इलाज में लापरवाही का आराेप लगाते हुए चिकित्सीय व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।

जिन बच्चों की मौत हुई थी, उनकी उम्र 36 दिन से लेकर 2 दिन के बीच थी। इनमें से तीन का जन्म मेडिकल काॅलेज अस्पताल में हुआ था। वहीं चौथा नवजात उदयपुर सीएचसी से रेफर होकर मेडिकल काॅलेज अस्पताल में भर्ती हुआ था। नवजाताें की माैत पर परिजनाें के हंगामा करने से अस्पताल में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई थी। वे बच्चों का शव गोद में लेकर विलाप कर रहे थे और प्रबंधन को कोस रहे थे।


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