उत्तराखंड के 'खूनी गांव' के लोगों को सदियों बाद मिला चैन, देवी ग्राम नाम से मिटेगी अंग्रेजों वाली पहचान

Updated on 19-08-2025 04:34 PM
रश्मि खत्री, देहरादून/पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ का ‘खूनी’ गांव अब देवी ग्राम के नाम से जाना जाएगा। इस अजीबोगरीब और असहज करने नाम वाले गांव का नाम बदलने से ग्रामीणों में खुशी की लहर है। इस गांव का नाम बदलने की मांग यहां के ग्रामीणों द्वारा लंबे समय से की जा रही थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से लेकर सांसद अजय टम्टा तक ग्रामीणों ने अपना दर्द पहुंचाया। एक लंबी प्रक्रिया के बाद आखिरकार जन भावनाओं के अनुरूप प्रदेश सरकार ने ‘खूनी’ गांव का नाम बदलकर देवी ग्राम करने की अधिसूचना जारी कर दी है। गांव का नाम बदलने के बाद ग्रामीणों ने केंद्रीय राज्य मंत्री और प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया है।

पिथौरागढ़ जिले में मुख्यालय से दस किमी दूर एक गांव है जिसका नाम पढ़ने, लिखने या किसी को बताने में ग्रामीण भी असहज हो जाते थे। लंबे समय से ग्रामीणों द्वारा इस गांव का नाम बदले जाने की मांग की जा रही थी। ग्रामीणों ने सांसद अजय टम्टा से भी गांव का नाम बदले जाने की मांग की गई थी। तो वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी इसके लिए गुहार लगायी गयी थी। ग्रामीणों की यह मेहनत रंग लाई और आज गांव का नाम बदलकर देवी ग्राम रख दिया गया है।
ग्रामीणों के साथ ही ओएनजीसी के पूर्व महाप्रबंधक ललित मोहन जोशी भी लगातार इस संबंध में सरकार से पत्राचार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर रहे थे। उन्होंने बताया कि गांव का नाम बदलने के लिए सरकार से लंबे समय से पत्र व्यवहार किया जा रहा था। इसका नाम बदलने को लेकर प्रस्ताव भी भेजा गया था।
जोशी ने बताया कि आखिरकार इन तमाम पत्राचार और प्रक्रियाओं के बाद सरकार ने गांव का नाम बदलने की मंजूरी दे दी है जिसके बाद से गांव के सभी लोग बेहद खुश हैं। गांव का नाम बदलने की खुशी में यहां पर विशेष आयोजन किया जाएगा और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाएगा। ग्रामीणों की हार्दिक इच्छा है कि सीएम धामी इस कार्यक्रम में मौजूद रहें।
पिथौरागढ़ के इस छोटे से गांव में लगभग 60 परिवार रहते हैं। गांव की जनसंख्या कुल 380 है। गांव की नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान इंदिरा जोशी का कहना है कि गांव का नाम बदलने से सभी ग्रामीणों में खुशी है। सरकार ने उनकी दशकों पुरानी मांग आज पूरी कर दी है।

खूनी गांव नाम के पीछे का किस्सा
इस गांव का नाम खूनी क्यों रखा गया इसके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है लेकिन ग्रामीण बताते हैं कि गांव का नाम खूनी पड़ने के पीछे कई कहानियां प्रचलित है। ग्रामीण बताते हैं कि उनके पूर्वजों ने बताया था कि आजादी से पहले जब अंग्रेज गांव आए थे तो उनकी गांव वालों से लड़ाई हुई थी। तब ग्रामीणों ने एकजुट हो कर अंग्रेजों को मार दिया था और उसी के बाद से गांव का नाम खूनी पड़ गया।

अंग्रेजों के जमाने से जुड़ी बात
वहीं एक कहानी यह भी प्रचलित है कि पहले गांव का नाम खोली था लेकिन अंग्रेज इस शब्द का ठीक सा उच्चारण नहीं कर पाये और खोली को खूनी बोलना शुरू कर दिया। जिसके बाद से इस गांव का नाम खूनी ही प्रचलित हो गया। हालांकि अब खूनी गांव का नाम बदलकर देवी ग्राम हो गया है और इससे ग्रामीणों में खुशी है।

यह गांव पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर विकासखंड विण की ग्राम पंचायत है। गांव का नाम खूनी होने के कारण ग्रामीण असहज थे तो वहीं गांव से निकलकर शहरों या अन्य राज्यों में जाने वाले लोग गांव का नाम लिखने और पढ़ने में भी असहज महसूस करते थे।

पिछले एक दशक से उठाई जा रही मांग और गांव का नाम बदलने की प्रक्रिया में सबसे बड़ा किरदार सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा का रहा। सांसद अजय टम्टा ने खुद कई मंत्रालय से गांव का नाम बदलने और गांव के लोगों का दर्द वहां तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाई।

सांसद अजय टम्टा ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर इस गांव का नाम बदलने की अधिसूचना की जानकारी देते हुए लिखा है कि जन-जन की भावनाओं और लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए आज पिथौरागढ़ क्षेत्र में स्थित ग्राम खूनी का नाम परिवर्तित किए जाने की अधिसूचना प्रदेश सरकार ने जारी कर दी है। उन्होंने लिखा है कि गांव का नाम बदलवाना इतना आसान काम नहीं था। उनके कार्यालय ने पिछले एक साल में अलग-अलग मंत्रालय से बात की। तब जाकर गांव का नाम बदला जा सका है।

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