बता दें कि यहां 386 घरों को खाली करने का नोटिस दिया गया है। जबसे नगर निगम का अमला बस्ती में पहुंचा है, घर टूटने के डर से कई लोगों ने भोजन-पानी छोड़ दिया है। इधर बिजली-पानी पहले ही बंद कर दी गई है। लेकिन रहवासियों ने घर खाली करने से साफ इंकार कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक प्रशासन रहने की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं करता, घर खाली नहीं करेंगे। हालांकि प्रशासन की ओर से बस्ती में दो होर्डिंग भी टांगे गए हैं। जिसमें लिखा है कि मंगलवार की शाम तक लोग खुद अपना सामान लेकर नहीं गए तो बुधवार की सुबह प्रशासन बलपूर्वक सभी घर खाली करवाएगी।
पहले पट्टे दिए, अब हटाने की तैयारी
रहवासियों ने बताया कि वर्ष 2006 में सरकार ने उन्हें पट्टे दिए हैं। लेकिन अब घर के बाहर लगे सरकारी माइक पर बार-बार हिदायत दी जा रही है कि सभी रहवासी घर खाली करें। यह सुन-सुन कर यहां के 1500 से अधिक रहवासी परेशान हो रहे हैं। हालांकि इनको शिफ्ट करने के लिए नगर निगम ने 50 कम्युनिटी हाल आरक्षित कर दिए हैं। लेकिन मंगलवार को एक भी परिवार वहां नहीं गया।
मासूम रो-रोकर मांग रहे मदद
भदभदा बस्ती में एक आंगनबाड़ी भी है। जिसमें छह वर्ष तक के 130 बच्चे रजिस्टर्ड हैं। लेकिन जब से यहां एनजीटी के निर्देश पर मकान खाली करने की चेतावनी दी गई है। बच्चों ने आंगनबाड़ी जाना बंद कर दिया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि जिस घर में जा रही हूं, सभी उम्मीद की नजर से मुझे देख रहे हैं कि घर टूटने से बचा लूं, लेकिन मैं भी कुछ नहीं कर सकती। बच्चे रो-रो कर मुझसे मदद मांग रहे हैं।
तालाब का गंदा पानी पीने को मजबूर रहवासी
बीते पांच दिन पहले नगर निगम ने यहां रहवासियों के घर पर लगा नल कनेक्शन काट दिए। यहां पीने के पानी का अन्य कोई साधन नहीं है। ऐसे में लोग तालाब के गंदे पानी को छानकर पी रहे हैं। यही बच्चों और बुजुर्गों के साथ बीमार लोगों को भी पिलवा रहे हैं। इधर कलेक्टर के निर्देश पर बस्ती का बिजली कनेक्शन भी काट दिया गया है। जिससे रात के अंधेरे में सानिया खान नाम की गर्भवती महिला घर में गिर गई। इलाज के लिए उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
आयुक्त ने दोपहर दो बजे बुलाई आपात बैठक
भदभदा बांध के कार्यालय में मंगलवार की दोपहर दो बजे नगर निगम आयुक्त फ्रैंक नोबल ए. ने निगम अधिकारियों के साथ पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ आपात बैठक की। जिसमें पुलिस के डीसीपी और तहसीलदार के साथ अतिक्रमण हटाने की योजना पर चर्चा हुई। इसमें अपर आयुक्त विनीत तिवारी के साथ निगम के जलकार्य, अतिक्रमण, राजस्व और स्वास्थ्य समेत अन्य शाखाओं के अधिकारी मौजूद रहे।
पीड़ित महिलाओं ने कलेक्टर को घेरा
मंगलवार शाम कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह भी भदभदा बस्ती पहुंचे। जहां पहले से निगम आयुक्त, अपर आयुक्त सहित पुलिस अधिकारी मौजूद थे। कलेक्टर ने अधिकारियों की बैठक लेना शुरू की, तभी सड़क पर बस्ती की महिलाएं एकत्रित हो गईं और चक्काजाम कर दिया। बैठक से बाहर निकले अधिकारियों ने बस्ती के रहवासियों से चर्चा करते हुए कलेक्टर ने भरोसा दिलाया कि प्रति घर को 50 हजार रुपये की मदद करेंगे और हाउसिंग फार आल के तहत आवास लेने पर 30 हजार की सबसिडी भी दिलाएंगे। लेकिन रहवासियों उनकी एक न सुनी। जिसके बाद पुलिस आयुक्त हरिनारायनाचारी मिश्र को सूचना दी गई। उन्होंने मौके पर पुलिस बल भेजा। तब जाकर अधिकारियों के वाहनों को बस्ती से बाहर जाने का रास्ता मिला।
बड़ा तालाब के पास स्थित भदभदा बस्ती के अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई बुधवार को की जाएगी। इससे पहले रहवासियों को खुद से अपने घर खाली करने का अवसर दिया जा चुका है। प्रशासन द्वारा रहवासियों को पीएम आवास में लोन दिलाने में मददे करने, गृहस्थी का सामान शिफ्ट कराने, अस्थायी रूप से वैकल्पिक स्थल सहित अन्य विकल्प दिए गए हैं।
- कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर, भोपाल