
सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में आज से 21 फरवरी के बीच रुद्राक्ष महोत्सव मनाने की घोषणा के बाद से ही लोगों का हुजूम उमड़ रहा है। मंगलवार-बुधवार को करीब एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे तो पं. प्रदीप मिश्रा ने महोत्सव के एक दिन पहले ही रुद्राक्ष बंटवानाा शुरू करवा दिए।
देश में संभवत: पहली बार किसी कथा स्थल से 48 लाख रुद्राक्ष का वितरण होगा। प्रतिदिन दोपहर 1 से शाम 4 बजे के बीच कथा भी होगी। भास्कर ने महोत्सव से पहले पं. मिश्रा से धर्मांतरण, पं. धीरेंद्र शास्त्री, पंडोखर सरकार और शराबबंदी जैसे विषयों पर चर्चा की।
इस बार रुद्राक्ष कहां से मंगाए हैं और कितने बांटेंगे?
नेपाल की बार्डर पर गंडक नदी के उद्गम स्थल पर जहां सालिग्राम शिला का तट होता है, वहीं से रुद्राक्ष लाए हैं। उन्हीं रुद्राक्ष से शिवलिंग का निर्माण होगा और उसे पूजन-पाठ से अभिमंत्रित किया जाएगा। इस बार 48 लाख रुद्राक्ष का वितरण करेंगे। जहां-जहां पहले कथाएं की हैं, वहां भक्तों की व्यवस्था देखी गई है, वहां 10 से 11 लाख श्रद्धालु आएं हैं। इसलिए इतनी संख्या में रुद्राक्ष मंगाए हैं।
बागेश्वर धाम के पं. धीरेंद्र शास्त्री धर्मांतरण यानी लोगों की घर वापसी करवा रहे हैं, इस बारे में आप क्या कहेंगे?
धर्मांतरण रोकने के लिए पहले से भी संस्थाएं लगी हुई हैं। अब उनका क्या क्रम है। वो उनके हिसाब से कर रहे हैं। अच्छी बात है पर मूल तत्व हमारा सनातन धर्म है। यह अच्छे से अग्रण्य रहे।
क्या घर वापसी की वजह से ही कुछ लोग पं. शास्त्री के पीछे पड़े हैं?
ये मूलत: हम नहीं कह सकते। धर्मांतरण के प्रति जागरूकता के लिए पहले से हमारी सनातनी संस्थाएं काम कर रही हैं। वो लोगों को जोड़ रही है। हम एक व्यक्ति विशेष के लिए नहीं कहेंगे। जो गए हैं, वो वापस आ रहे हैं। यह अच्छा है।
पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती प्रदेश में शराबबंदी को लेकर मुखर हैं, इस बारे में आप क्या सोचते हैं?
शराबबंदी होने से कई लोगों के घर टूटने से बच जाएंगे। गरीब घर की महिलाएं जो कमाकर लातीं हैं, पुरुष परिवार के पालन-पोषण के लिए लाई राशि को शराब में खर्च कर देता है। यह गलत है।
भोपाल में पंडोखर सरकार ने कहा- दरबार में भूत-प्रेत और बाधा लेकर पहुंचने वाले 90% लोग ड्रामा करते हैं, क्या आप इससे सहमत हैं?
गलत नहीं कहा। हम जब कथा करते हैं तब एक गंगाजी का भजन.. मानो तो मैं गंगा मां हूं.. शुरू होता है तो वैसे ही जिन लोगों के सिर पर कलश रहता है उन्हें गंगाजी आ जाती है। एक को आती है तो सब शुरू हो जाते हैं। वो सोचते हैं कोई हमें संभालेगा। हम गोवर्धनजी के भक्त हैं। हमारे ठाकुरजी के नयनों में टोना है। दूसरे टोने की जरूरत नहीं है। शिव श्मशान का निवासी है। उसे क्या टोना क्या रोना। हम लोग ये नहीं मानते।
नेता-विधायक और सांसदों के क्षेत्र में ही आप सबसे ज्यादा कथा कर रहे हैं, जबकि सामान्य लोगों को सालभर बाद का समय मिल रहा है, ऐसा क्यों?
ऐसा नहीं है। एक क्रम बनाया है। जिसे पहले समय दे दिया, उस समय उनके यहां कथा का आयोजन किया गया है।