टैक्स वसूली एवं आर्थिक संसाधनों के प्रबंधन से पंचायतें कर रही हैं गांधी जी के स्वावलंबी पंचायतों का सपना पूरा

Updated on 03-10-2022 04:59 PM

भोपाल
ग्राम स्वराज का सपना साकार करने के लिये जरूरी है ग्राम पंचायतें सशक्त हों और आर्थिक रूप से आत्म-निर्भर बनें। इसके लिये पंचायतें अपने कर्तव्यों के साथ अधिकारों का उपयोग करते हुये जन सेवा में बढ़ोतरी एवं कर संग्रहण कर आय के स्त्रोत बढ़ायें। इसके मद्देनजर मध्यप्रदेश में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने जो प्रयास किये हैं, उनका असर दिखाई देने लगा है।

हाल ही में ऐसे अनेकों उदाहरण सामने आये हैं जहाँ पंचायतों के प्रति लोगों का विश्वास एवं सहयोग की भावना बढ़ी है, साथ ही विभिन्न प्रकार की जन-सुविधाएँ प्रदान करते हुये पंचायतों ने टैक्स एकत्रित कर अच्छी खासी आय प्राप्त की है। बैतूल जिले की बड़ोरा पंचायत में बहुत कम समय में 6 लाख 76 हजार रूपये संपत्ति एवं वृत्ति कर के रूप में एकत्रित किये हैं। इसी जिले की दुनावा पंचायत में 67 दुकानों के किराये में वृद्धि कर आय में बढ़त की गई है। प्रदेश में ऐसे अनेकों उदाहरण हैं जहाँ पंचायतों ने लोगों को सुविधा प्रदान कर बदले में अच्छी खासी राशि संग्रहित की है।

पुष्कर धरोहर अभियान में सुदृढ की गई जल-संरचनाओं तथा अमृत सरोवर आदि में की जाने वाली आर्थिक गतिविधियों से भी पंचायतों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। पंचायतों की आर्थिक स्थिति में सुधार से ग्रामीण विकास का पहिया तेजी से घूमना स्वभाविक है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं के कियान्वयन में नित नये कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना में माह अप्रेल 2021 से अब तक मात्र 17 माह में 10 लाख आवास पूर्ण करने का कीर्तिमान भी बना है।

उल्लेखनीय है कि आत्म-निर्भरता के लिये ग्रामीण क्षेत्र में तेजी से विकास के लिये सरकार द्वारा प्रयास किये जा रहे हैं। ग्रामीण विकास की सबसे अहम कड़ी ग्राम पंचायत ही है। पंचायतों की गतिविधियों एवं निर्णयों में समुदाय की भागीदारी को बढ़ाने के साथ पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्म-निर्भर बनाने के लिये प्रयास किये जा रहे हैं। इन प्रयासों में विभाग को सफलता भी मिल रही है। पंचायत स्तर पर आ रहे सकारात्मक बदलाव से शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में काफी हद तक सुधार हुआ है। इसी का परिणाम है कि भोपाल जिले को ग्राम पंचायतों में स्वच्छता के लिये राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार किया गया है। विदित हो कि विभाग द्वारा वर्ष 2021 में बर्षा काल में 15 अगस्त से 15 सितंम्बर तक 1 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास बनाने का कीर्तिमान बनाया था। आवास योजना के प्रारंभ वर्ष अप्रैल 2016 से अब तक कुल 28 लाख 43 हजार आवास पूर्ण किये गये हैं इनमें से 10 लाख आवास अप्रेल 2021 से अब तक केवल 17 माह की अल्प अवधि में पूर्ण करने का कीर्तिमान बनाया गया है। यह इस बात का प्रमाण है कि विभाग द्वारा हर स्तर पर संवेदनशीलता से काम किया जा रहा है। इससे पात्र हितग्राहियों को कम से कम समय में अधिक से अधिक लाभ मिल रह हैं।

प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास उमाकांत उमराव बताया कि पंचायतों को और सुदृढ़ बनाने के लिये रणनीति बना कर काम किया जा रहा है। राज्य स्तरीय अधिकारियों से लेकर जिला, विकासखण्ड एवं पंचायत स्तर पर सबकी भूमिका तय है। सघन निगरानी एवं सहयोगात्मक व्यवहार से ही सुधार संभव हुआ है। पंचायतों की आय के स्त्रोत बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। पंचायतों को शासन द्वारा दिये जाने वाले वित्तीय सहयोग एवं अनुदान राशि पर निर्भरता कम करते हुये उनके आय के स्त्रोत बढ़ाने के लिये लगातार विभागीय अमले के सहयोग से पंचायत समितियों के पदाधिकारियों को जागरूक किया जा रहा है।

श्री उमराव ने कहा कि विभाग में अच्छा काम करने वालों की पहचान कर उनका हौसला बढ़ाने तथा काम में कम रूचि रखने वालों के प्रति सख्त रवैया अपना कर ही योजनाओं के क्रियान्वयन की गति बढ़ाई गई है। इसके लिये जरूरी है विभागीय अमले से नजदीक से जुड़ कर उनकी क्षमताओं की पहचान तथा नियमित रूप से सघन निगरानी और लक्ष्यों के प्रति सचेत करते रहना।

विगत कुछ समय से निरंतर प्रयास कर पंचायत स्तर पर वसूल की जाने वाली विभिन्न प्रकार की फीस, कर आदि अधिरोपित कर एकत्रित करने के लिये सकारात्मक वातावरण बनाया गया है। पंचायतों में लगने वाले टैक्स, फीस, किराया, जुर्माना आदि की वसूली के लिये सजगता आई और पंचायतें आर्थिक रूप से आत्म-निर्भर होती जा रही हैं जिससे ग्रामीण क्षेत्र के विकास की गति बढ़ रही है।

उदाहरण के तौर पर देखें तो धार जिले की बदनावर जनपद पंचायत की कानवन पंचायत में गत माह अप्रेल से अभी तक लगभग 63 लाख रूपये बाजार फीस एवं लगभग 10 लाख 50 हजार रूपये पशु बाजार फीस तथा अन्य टैक्स की वसूली की है।

बैतूल जिले की बडोरा पंचायत द्वारा संपत्ति कर एवं वृत्ति कर एकत्रित करने के लिये सात माह पूर्व अभियान शुरू किया गया था। इस कार्य का जिम्मा ग्राम पंचायत ने मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में गठित सिद्धि विनायक आजीविका स्व-सहायता समूह को दिया। समूह की अध्यक्ष श्रीमती पूनम मासोदकर ने अपने समूह के सदस्यों के साथ माह फरवरी में वसूली का काम शुरू किया। उनके समूह ने लगभग 6 लाख 76 हजार रूपये टैक्स एकत्रित किया। स्व-सहायता समूह पंचायत में जल प्रदाय कर संग्रहण एवं अन्य करों का संग्रहण करने में भी सहयोग कर रहा है।

इसी प्रकार बैतूल जिले की ही मुलताई जनपद की दुनावा पंचायत में पंचायत की 67 दुकानों का किराया विगत लम्बे समय से लगभग 15 हजार रूपये मासिक लिया जा रहा था। अब किराया बढ़ा दिया गया है, जिससे लगभग 1 लाख रूपये मासिक आय होने लगी है। सरपंच श्रीमती नीलम पलाश कडबे का कहना है कि पंचायत की आय बढ़ाने के लिये सुविधाओं में वृद्धि की जा रही है। दुनावा में बस स्टैण्ड पर लगभग डेढ़ करोड़ की लागत से एक शॉपिंग कॉम्पलेक्स बनाया जाना है, जिसकी नीलामी से लगभग साढ़े तीन करोड़ की आय होगी।

नरसिंपुर जिले की चावरपाठा ब्लॉक की फुलरी पंचायत में लगभग 3 लाख रूपये तथा करेली विकासखण्ड की आमगांव बडा पंचायत में लगभग 4 लाख रूपये जल प्रदाय, स्वच्छता, संपत्ति कर आदि का टैक्स एकत्रित किया गया। पंचायत में नियमित स्वच्छता की व्यवस्था के लिये सफाईकर्मी तैनात किये गये हैं। तब से स्वच्छता कर की राशि हर माह नियमित रूप से प्राप्त होने लगी है।

शिवपुरी जिले के पिछोर जनपद पंचायत की मनपुरा ग्राम पंचायत के सचिव राजकुमार पटेल ने बताया कि स्वच्छता, संपत्तिकर, जलकर और अन्य फीस आदि के रूप में पिछले लगभग चार माह में लगभग डेढ लाख रूपये का संग्रहण किया गया है। पहले वसूली कम हो पाती थी, अब बढ रही है।

विभाग के प्रयासों से पंचायतों में जहाँ लोगों को मिलने वाली सुविधाएँ बढ़ रही हैं वहीं बदले में पंचायतों की आय के साधन बढ़ रहे हैं और पंचायतों की शासकीय अनुदान राशियों पर निर्भरता कम होती जा रही हैं। पंचायतें आर्थिक आत्म-निर्भरता की ओर अग्रसर हैं।

टैक्स वसूली के साथ पंचायतों में विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से भी आय के साधनों में वृद्धि हुई है। पुष्कर धरोहर समृद्धि अभियान में हजारों पुरानी जल संरचानाओं को सुधार कर पुन: उपयोयगी बनाया गया है। अमृत सरोवर में बनाये गये तालावों तथा पुष्कर धरोहर के अंतर्गत सुधारे गये तालाबों में मछली पालन, सिंगाडा उत्पादन जैसी आर्थिक गतिविधियां शुरू की गई हैं। इनसे भी पंचायतों की आय में वृद्धि हुई है। प्रदेश महात्मा गांधी के स्वावलंबी पंचायतों, पूर्ण ग्राम स्वराज तथा सशक्त पंचायतों के सपने को पूरा करने के लिये अग्रसर हैं।


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