पाकिस्तान के गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के फैसले पर मचा बवाल, ट्रंप के 'निजी क्लब' में फंस गए शहबाज?

Updated on 22-01-2026 12:45 PM
इस्लामाबाद: अमेरिकी राष्ट्रपति के गाजा को लेकर बनाए गए बोर्ड ऑफ पीस में पाकिस्तान भी शामिल हो गया है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि गाजा शांति योजना के समर्थन में यह फैसला किया गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी बुधवार को बयान जारी कर बताया कि देश ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का न्योता स्वीकार कर लिया है। इस बीच शहबाज शरीफ सरकार के इस फैसले का पाकिस्तान में ही विरोध होने लगा है। खास बात है कि इस फैसले के पहले संसद की राय भी नहीं ली गई और न ही इस पर चर्चा की गई।

पाकिस्तानी राजनेता और पूर्व सीनेटर मुस्तफा नवाज खोखर ने एक्स पर लिखा, बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का पाकिस्तान का फैसला दिखाता है कि यह सरकार पाकिस्तानी लोगों की जरा भी परवाह नहीं करती। उन्होंने कहा कि बिना किसी सार्वजनिक बहस और संसद की राय के बगैर इसमें पाकिस्तान शामिल हो गया। उन्होंने बोर्ड ऑफ पीस को गलत ठहराने के लिए कई वजहें बताई हैं।

बोर्ड को कहा औपनिवेशिक कोशिश

उन्होंने बोर्ड ऑफ पीस को एक 'औपनिवेशिक कोशिश' बताया जिसका 'मकसद न सिर्फ गाजा पर राज करना है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के समानांतर एक सिस्टम बनाना है।' बोर्ड ऑफ पीस को लेकर ऐसी आशंका कई एक्सपर्ट जाहिर कर चुके हैं। खोखर ने चिंता जताई कि यह बोर्ड ऐसे तरीकों और संस्थानों से अलग होने की हिम्मत रखेगा जो अक्सर फेल हो गए हैं।

ट्रंप के पास होगी पूरी ताकत

पूर्व पाकिस्तानी सीनेटर ने बोर्ड ऑफ पीस को ट्रंप के निजी समूह की तरह बताया और कहा कि यह 'ट्रंप का ऐसे शाही अधिकार देता है कि वह अपने निजी और अमेरिका के एजेंडे को बिना किसी रोक-टोक के लागू कर सकें।'
  • बाकी सभी सदस्यों को चेयरमैन (ट्रंप) नॉमिनेट कर सकता है या उन्हें हटा सकता है।
  • चेयरमैन तय कर सकता है कि बोर्ड कब मिलेगा या किन मुद्दों पर बात करेगा।
  • इस नए फोरम में सिर्फ ट्रंप के पास ही पूरी तरह से वीटो पावर होगी।

खोखर ने स्थायी सीट के लिए सदस्यों पर 1 अरब डॉलर का शुल्क लगाए जाने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि एक अरब डॉलर का टिकट इसे अमीरों का क्लब बनाता है और ऐसे क्लब अक्सर क्या करते हैं, यह कोई भी अंदाजा लगा सकता है।

बोर्ड ऑफ पीस में 8 मुस्लिम देश

डोनाल्ड ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में अब तक 8 मुस्लिम देश शामिल हो गए हैं। पाकिस्तान के साथ ही सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया और कतर ने इसमें शामिल होने पर सहमति जताई है। इजरायल ने पहले बोर्ड में तुर्की और कतर की मौजूदगी पर आपत्ति जताई थी लेकिन बुधवार को प्रधानमंत्री नेतन्याहू के कार्यालय ने इसमें इजरायल के शामिल होने की घोषणा की। ट्रंप ने दुनिया भर के 59 नेताओं को इस बोर्ड में शामिल होने के लिए न्योता भेजा है, जिनमें भारत भी शामिल है। पाकिस्तान ने जहां न्योता स्वीकार कर लिया है वहीं, भारत ने अब तक इस पर फैसला नहीं लिया है। बोर्ड का मकसद गाजा में युद्धविराम समझौते की देखरेख करना और दूसरे झगड़ों को भी सुलझाना है।

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