
मुरैना के पहाड़गढ़ स्थित ईश्वरा महादेव मंदिर पर श्रद्धालुओं का तांता लग गया है। यहां सुबह होते ही श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। भोले बाबा के दर्शन करने के लिए न केवल मुरैना बल्कि आस-पास के जिलों के लोग भी पूजा अर्चना करने पहुंचे हैं।
बता दें, कि ईश्वरा महादेव मंदिर पहाड़गढ़ के जंगल में बसा है। यहां आम दिनों में बहुत कम लोग ही आ पाते हैं। कारण कि यह मुख्य सड़क मार्ग से बहुत अंदर जंगल में है, जिसके कारण हर कोई यहां पहुंच पाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता है। इसके जाने के लिए मुरैना से जौरा तथा फिर कैलारस जाना पड़ता है। वहां से पहाड़गढ़ के लिए रास्ता गया है जो कि लगभग 25 किलोमीटर अन्दर जंगल में है।
रहस्यमयी है मंदिर
ईश्वरा महादेव का मंदिर एक प्राचीन मंदिर है। ऐसी मान्यता है कि मंदिर में चार बजे ब्रह्म मुहूर्त के समय कोई अदृश्य शक्ति स्वयं पूजा-अर्चना करने आती हैं। पुजारी द्वारा मंदिर के पट खोलने पर शिवलिंग 21 मुखी, 11 मुखी 7 मुखी बेलपत्रों, फूलों, चावल से अभीषेक हुआ मिलता है। इस अद्भुत शिवलिंग पर साल के 365 दिन कुदरती तौर पर पानी की बूंदें टपकती रहती हैं।
आज तक रहस्य बनी है भोले शंकर की पूजा
प्राकृतिक सौन्दर्य के बीच बसे ईश्वरा महादेव का रहस्य वर्षों बाद भी नहीं सुलझ सका है। बताया जाता है कि इस रहस्य को जानने के कई प्रयास किए गए लेकिन सभी प्रयास विफल रहे। गुफा नुमा पहाड़ के नीचे शिवलिंग पर प्राकृतिक झरने से शिवलिंग के शीर्ष पर जलाभिषेक हो रहा है और ब्रह्म मुहूर्त में कोई सिद्ध शक्ति उपासाना करती है।
बारिश में देखते ही बनती है यहां की प्राकृतिक छटा
बारिश के मौसम में यहां प्राकृतिक छटा देखने लायक होती है। इसलिए यह धार्मिक स्थल के साथ अच्छा पिकनिक स्पॉट है। ग्रामीणों की माने तो यहां सिद्ध बाबा ने इन पहाड़ों के बीच शिवलिंग स्थापित कर तपस्या की थी। तभी से शिवलिंग के शीर्ष पर प्राकृतिक झरना अविरल जलाभिषेक कर रहा है। यहां पुजारी ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के पट खोलते हैं, लेकिन तब तक कोई शिवलिंग का अभिषेक कर चुका होता है।
यह भी बताते हैं यहां के लोग
लोगों का कहना है की इस मंदिर के गर्व गृह में रहस्यमयी पूजा को जानने के लिए किसी ने शिवलिंग के ऊपर हाथ रख लिया था लेकिन तभी अचानक तेज आंधी चली और फिर कुछ देर के लिए हाथ हटाया और अदृश्य भक्त शिव का पूजन कर गई, लेकिन जिस व्यक्ति ने शिवलिंग पर हाथ रखा था वो कोढ़ी हो गया।
संत-महात्माओं ने जानने की कोशिश की रहस्य की
कई बार संत महात्माओं द्वारा भी इस रहस्य को जनने की कोशिश की गई लेकिन इसके बावजूद पूजा का समय होते ही साधुओं की झपकी लग गई और पलभर में कोई शक्ति शिवलिंग का अभिषेक कर गई। जब संतों की आंखे खुली तब शिवलिंग की पूजा हुई नज़र आई। लोगों का कहना है की शिवलिंग की स्थापना रावण के भाई विभीषण द्वारा की गई थी और उन्हें सप्त चिरंजीवियों में से एक माना गया है। इसलिए राजा विभीषण ही यहां पूजा करने आते हैं।
राजा ने लगाई फौज, फिर भी नहीं चला पता
ईश्वरा महादेव मंदिर पर गुप्त पूजा-अर्चना के रहस्य को जानने का प्रयास तत्कालीन पहाड़गढ़ रियासत के राजा पंचम सिंह ने एक बार किया था। उन्होंने रात में हो जाने वाली पूजा का रहस्य जानने के लिए अपनी सेना को मंदिर के इर्द-गिर्द लगा दिया था। चौकसी में लगी सेना सुबह चार बजे से पहले अचेतन अवस्था में चली गई। जब आंख खुली तो वहां पूजा-अर्चना हो चुकी थी।
अनोखे प्रकार के बेल पत्र पाए जाते यहां
बताया जाता है की यहां ईश्वरा महादेव मंदिर के आसपास अनोखे बेलपत्र के पेड़ हैं। सामान्य तौर पर बेल की पत्तियां तीन-तीन के समूह में होती है, लेकिन यहां पांच, सात तक हैं। बताया तो यह भी जाता है कि कई बार शिवलिंग पर 21 के समूह वाली बेल पत्तियां भी देखी गई हैं।
दिन भर चलेगा मेला
ईश्वरा महादेव मंदिर पर शिवरात्रि में मेला लगता है। इस मेले में लोगों की बड़ी संख्या में भीड़ रहती है। आस-पास के लोग मेले में अपनी दुकानें लगाने आते हैं। मेला लग चुका है। बीती रात से ही मेला लग चुका है तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। कई श्रद्धालु तो राजिस्थान व उत्तर प्रदेश से भी पहुंचे हैं।