दिग्विजय के लेटर पर मंत्री बोले-ऑर्गेनिक कॉटन मामले में गड़बड़ी

Updated on 14-12-2024 01:13 PM

केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने माना है कि मध्यप्रदेश में ऑर्गेनिक कॉटन के प्रमाणीकरण में गड़बड़ी हुई है। दरअसल, पूर्व सीएम और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने करीब चार महीने पहले 27 अगस्त को प्रदेश में ऑर्गेनिक कॉटन (कपास के पौधे से मिलने वाला एक प्राकृतिक रेशा) उत्पादकों के फर्जी समूह बनाकर घोटाला करने का मामला उठाया था।

दिग्विजय ने केन्द्रीय वाणिज्य-उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और सीएम डॉ मोहन यादव को पत्र लिखकर इस मामले में कार्रवाई की मांग की थी।

दिग्विजय सिंह के उसी पत्र पर मंत्री पीयूष गोयल ने जवाब दिया। जवाबी पत्र में उन्होंने लिखा-

मंत्री पीयूष गोयल बोले- मंत्रालय कार्रवाई जारी रखेगा केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने आगे लिखा- इस कार्रवाई के अलावा विभाग ने इस मामले को इंदौर के पुलिस आयुक्त, धार एसपी के सामने भी उठाया और मामले पर संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय इस मामले में उचित कार्रवाई जारी रखेगा।

ऑर्गेनिक कॉटन घोटाले की जांच की मांग की थी दिग्विजय सिंह ने 27 अगस्त 2024 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संबोधित एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने मध्य प्रदेश में ऑर्गेनिक कॉटन घोटाले की जांच कराने का अनुरोध किया था। उन्होंने चिट्ठी में लिखा था-

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निमाड़ अंचल में ऑर्गेनिक कॉटन उत्पादकों के फर्जी समूह बनाए गए हैं। इनमें ऐसे गांवों के किसानों के नाम हैं जो न तो ऑर्गेनिक कॉटन का और न ही साधारण बीटी कॉटन का उत्पादन करते हैं। बगैर वैरिफिकेशन ऑर्गेनिक उत्पादन के सर्टिफिकेट जारी किए गए। जांच कराकर दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई करें।

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पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने चिट्ठी में ये भी लिखा था कि यह घोटाला भले ही मध्य प्रदेश से उजागर हुआ हो, लेकिन इसकी जड़ें पूरे देश में फैली हुई हैं। प्रधानमंत्री जी देश भर में ऑर्गेनिक उत्पादों को प्रमाण पत्र देने का काम कर रहे हैं। सभी सर्टिफिकेशन बॉडीज की ओर से जारी सर्टिफिकेट की निष्पक्ष जांच करवाएं।

मध्यप्रदेश 7 लाख हेक्टेयर में कपास की खेती बता दें कि मध्य प्रदेश में सिंचित और गैर सिंचित दोनों प्रकार के क्षेत्रों में कपास की खेती की जाती है। यहां 7.06 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती की जाती है। सरकारी वेबसाइट investindia.gov.in से मिली जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री कृषि विकास योजना (PKVY) के तहत सरकार की ओर से ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसान को प्रति हेक्टेयर 3 साल के लिए 50 हजार रुपए वित्तीय सहायता दी जाती है।

16 नवंबर 2022 को PKVY के तहत, 32, 384 क्लस्टर्स, कुल 6.4 लाख हेक्टेयर इलाके और 16.1 लाख किसानों को शामिल किया गया है। साल 2022-23 तक योजना के तहत 1854.01 करोड़ रूपए की राशि जारी की गई है।

ऑर्गेन‍िक कॉटन क्या है, कैसे है इसका उत्पादन? ऑर्गेन‍िक कॉटन नॉन-जेन‍िट‍िकली मोड‍िफाइड पौधों से उगाया जाता है। इसमें उर्वरकों या कीटनाशकों जैसे किसी भी सिंथेटिक कृषि रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। यह मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए फायदेमंद है। सेंटर फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर की एक स्टडी के अनुसार, ऑर्गेन‍िक कॉटन का उत्पादन जीएम कपास की तुलना में ज्यादा पर्यावरण अनुकूल और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर है।

जबक‍ि बीटी कॉटन कीटों और बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील पाया गया है। सामान्य कपास जेन‍िट‍िकली मोड‍िफाइड बीजों और कीटनाशकों के भंडार पर निर्भर करता है।



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