हेल्थ इंश्योरेंस के नए नियम, इलाज के लिए 1 घंटे में देनी होगी मंजूरी, 3 घंटे में फाइनल सेटलमेंट

Updated on 27-03-2026 12:18 PM
नई दिल्ली: जिस मरीज के पास हेल्थ इंश्योरेंस है, उसे अब अस्पताल में इलाज और डिस्चार्ज के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा। बीमा नियामक IRDAI ने नए नियम तय किए हैं। फाइनेंस मंत्रालय ने कहा कि पॉलिसीधारकों को जरूरी सपोर्ट देने के लिए IRDAI ने कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम की प्रोसेसिंग के लिए समयसीमा तय की हैं।

IRDAI ने कैशलेस प्री-ऑथराइजेशन की मंजूरी एक घंटे के भीतर और फाइनल ऑथराइजेशन की मंजूरी 3 घंटे के भीतर करने की समय सीमा रखी है। मंत्रालय ने कहा कि ऐसी टाइमलाइन तय करने का उद्देश्य देरी घटाना और यह पक्का करना है कि मरीजों को समय से इलाज मिले।

हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में तेजी

वहीं दूसरी ओर हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर तेजी से तरक्की कर रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 9% की ग्रोथ रेट के साथ टोटल हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम 1.2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का रहा। सरकार ने बताया कि हेल्थ इंश्योरेंस की मांग बढ़ने के पीछे लोगों में स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जागरूकता, बेहतर हेल्थकेयर फाइनेंसिंग तक पहुंच और मेडिकल खर्चों से सुरक्षा की जरूरत मुख्य कारण हैं।

कैशलेस क्लेम के लिए 'गोल्डन ऑवर' नियम

मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने के दौरान होने वाली देरी से बचाने के लिए IRDAI ने सख्त समय-सीमा निर्धारित की है:
  • बीमा कंपनियों को कैशलेस प्री-ऑथराइजेशन अनुरोधों को एक घंटे के भीतर मंजूर करना होगा।
  • अस्पताल से छुट्टी यानी डिस्चार्ज के समय अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया अधिकतम तीन घंटे में पूरी करनी होगी

    इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ने का कारण

    • सबसे बड़ा कारण पॉलिसीधारकों की उम्र है। उम्र बढ़ने के साथ रिस्क फैक्टर में बढ़ोतरी होती है जिससे प्रीमियम बढ़ता है।
    • लोग अब गंभीर बीमारियों के लिए ज्यादा राशि (Sum Insured) का बीमा ले रहे हैं।
    • नई पॉलिसियों में ओपीडी और वेलनेस जैसे आधुनिक फीचर जुड़ गए हैं। इससे भी बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी हुई है।

    शिकायतों का त्वरित निपटारा

    IRDAI के बीमा भरोसा (Bima Bharosa) पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में सामान्य और स्वास्थ्य बीमा से जुड़ी कुल 1,37,361 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से 93% शिकायतों का समाधान उसी वित्तीय वर्ष के भीतर कर दिया गया।
  • अभी भी रिजेक्ट हो रहे क्लेम

    सुधारों के बावजूद कुछ क्लेम अब भी रिजेक्ट हो रहे हैं। इसका मुख्य कारण पॉलिसी की शर्तें जैसे- को-पेमेंट क्लॉज, सब-लिमिट्स, रूम रेंट कैपिंग और नॉन-मेडिकल खर्च हैं। अगर आप कोई हेल्थ इंश्योरेंस खरीद रहे हैं तो उसकी सभी शर्तों और नियमों को ध्यान से पढ़ें और समझें। अगर कोई चीज समझ ना आए तो इंश्योरेंस कंपनी से बात करें। नहीं तो बाद में परेशानी हो सकती है।

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