
संचित भोपाल के शाहपुरा इलाके में रहते हैं। उनके परिवार में इससे पहले कोई भी सिविज जज नहीं रहा है।
पहला लक्ष्य किसी के साथ ना हो अन्याय
संचित कहते हैं कि आगे हाई कोर्ट तय करेगा कि मेरी पोस्टिंग कहां और कैसे रहेगी। मुझे पता है कि मेरे सामने बहुत सारी चुनौतियां रहने वाली हैं। उन चुनौतियों को फेस करने के दौरान हमें सही गलत भी देखना होता है। अब बस एक ही कोशिश है कि किसी के साथ भी अन्याय ना हो, अब यही मेरा लक्ष्य है।
पेपर को एनालाइज करना बहुत जरूरी
संचित कहते हैं कि जो भी छात्र सिविज जज की तैयारी कर रहे हैं या करने वाले हैं, वह हमेशा एक बात याद रखें कि पूरी किताब शुरु से आखिर तक पढ़ने से कोई फायदा नहीं होगा। इसके लिए पेपर को एनालाइज करना बहुत जरूरी है ताकि आपको पता चल सके कि इससे पहले पेपर कैसे आए हैं। किस तरह के सवाल पूछे जाते हैं। पेपर को एनालाइज करके आप बहुत सारी चीजों को आसानी से साल्व कर सकते हैं या यूं कहें कि पूरा फॉर्मेट समझ भी सकते हैं।
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से किया ग्रेजुएशन
संचित ने बताया कि यह सिविज जज में 21वीं रैंक चौथे अटैंप में हासिल की है। संचित कहते हैं कि उन्होंने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है इसके अलावा एलएलएम उन्होंने मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी से किया। वहीं स्कूली शिक्षा उन्होंने दिल्ली पब्लिक स्कूल से हासिल की है।
पढ़ाई के दौरान परिवार का सबसे अहम रोल
संचित कहते हैं कि इस पूरी पढ़ाई के दौरान उनके परिवार ने कभी उन पर प्रेशर नहीं बनाया। उसके अलावा पहले दूसरे अटैंप में भी रिजल्टस के बाद बहुत मॉटीवेट किया और मुझसे कहा यह सब चीजें इतनी इंपॉर्टेंट नहीं हैं, तुम बस कोशिश करो, वह हमेशा कहते हैं कि पढ़ाई के दौरान कुछ भी गलत होता है तो हम संभाल लेंगे।
छोटी-छोटी चीजों पर किया काम
संचित कहते हैं कि हमने बहुत छोटी-छोटी चीजों पर काम किया है। इसमें मुख्य रूप से मेरे गुरु सुरेंद्र सिंह बघेल ने हमारी हर तरह की तैयारी कराई। इसमें उन्होंने बहुत छोटी छोटी चीजों की भी तैयारी करावाई। कि हमें किस तरह से कहां क्या करना है और क्या नहीं करना है। इसके अलावा संचित का कहना है कि वह हमेशा सोशल मीडिया यूज करते थे मगर जब पेपर आता था तो वह हमेशा सोशल मीडिया से दूरी बना लेते थे।