तुर्की की स्वतंत्रता और संप्रभुता के लिए NATO सबसे बड़ा खतरा... एर्दोगन के देश में उठी मांग

Updated on 30-01-2023 05:47 PM
अंकारा: तुर्की ने 18 फरवरी 2022 को अपनी नाटो सदस्यता की 70 वीं वर्षगांठ बहुत धूमधाम से मनाई थी। इसके लगभग एक साल बाद तुर्की की वतन पार्टी ने नाटो के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है। इसमें रेचप तैयप एर्दोगन सरकार से तुर्की को जल्द से जल्द नाटो से बाहर निकालने की मांग की गई है। वतन पार्टी के महासचिव ओजगुर बर्साली ने कहा कि देश भर में 'लेट्स लीव नाटो' अभियान शुरू होने के बाद इसका समर्थन करने वाले लोगों की संख्या 1 लाख से भी ज्यादा हो गई है। यह आंकड़ा दिन प्रतिदिन तेजी से बढ़ रहा है।

वतन पार्टी ने शुरू किया अभियान


उन्होंने कहा कि तुर्की के लोग नाटो का विरोध करते हैं। उनका मानना है कि नाटो गठबंधन और अमेरिका हमारे देश के लिए मुख्य खतरा हैं। तुर्की और नाटो के बीच कई मुद्दों पर विरोधाभास भी है। ऐसे में तुर्की को नाटो को छोड़कर सच्चे मित्र देशों के साथ गठबंधन बनाना चाहिए। इस हफ्ते की शुरुआत में 25 जनवरी को वतन पार्टी के उप नेता एथेम संकक ने प्रेस को बताया कि तुर्की पांच से छह महीने में अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्य ब्लॉक को छोड़ सकता है। उन्होंने मध्य पूर्व में यूएस-तुर्की मतभेदों और स्वीडन और नीदरलैंड में कुरान के खिलाफ अभियानों का हवाला दिया।

एर्दोगन के प्रवक्ता ने मांग को खारिज किया


संकक ने हाल के एक सर्वे का हवाला दिया, जिसमें दिखाया गया है कि तुर्की के लगभग 80% उत्तरदाताओं का मानना है कि उनके देश के प्रति अमेरिका की नीतियां शत्रुतापूर्ण और विनाशकारी हैं। हालांकि, राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (एके पार्टी) के प्रवक्ता ओमर सेलिक ने उसी दिन संकक के बयान का खंडन किया। सेलिन ने कहा कि "यह सवाल बेतुका है। हम नाटो के संस्थापक देशों में से एक हैं। फिर भी, इस बात से इंकार करना कठिन है कि काफी समय से तुर्की-नाटो संबंधों में दरारें आईं हैं।

नाटो का संस्थापक सदस्य है तुर्की


नाटो के लिए तुर्की के सदस्यता प्रोटोकॉल पर 17 अक्टूबर, 1951 को हस्ताक्षर किए गए थे, और राष्ट्र 18 फरवरी, 1952 को नाटो का सदस्य बन गया। देश के पास ब्लॉक में दूसरी सबसे बड़ी सेना है और एलाइड लैंड कमांड मुख्यालय की मेजबानी करता है। भले ही तुर्की गणराज्य के संस्थापक मुस्तफा केमल अतातुर्क ने यूएसएसआर के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखा, लेकिन उनके उत्तराधिकारी शीत युद्ध की शुरुआत में पश्चिमी ब्लॉक में शामिल हो गए। अमेरिका द्वारा प्रस्तावित ट्रूमैन सिद्धांत (1947) और मार्शल योजना (1948) से तुर्की लाभान्वित हुआ। 1950 में, तुर्की ने कोरियाई युद्ध (1950-53) में अमेरिका की ओर से लड़ने के लिए अपने सैनिकों को भी भेजा।
तुर्की के रूस के साथ मजबूत संबंध

नाटो को रूस के खिलाफ बनाया गया था। उसी का संस्थापक सदस्य तुर्की की रूस के साथ गहरी दोस्ती है। यूएसएसआर के पतन के बाद रूस-तुर्की संबंध मजबूत होने शुरू हुए। पिछले कई दशकों में, रूस और तुर्की ने आर्थिक, राजनीतिक और सैन्य सहयोग तेज किया है, जिसने अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो ब्लॉक की तीखी आलोचना की है। विशेष रूप से, दिसंबर 2017 में रूसी-निर्मित S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली हासिल करने के तुर्की के फैसले के कारण अंकारा को 2019 में अमेरिका के नेतृत्व वाली बहुराष्ट्रीय पांचवीं पीढ़ी के F-35 लड़ाकू जेट कार्यक्रम से निष्कासित कर दिया गया था। हालांकि, तुर्की ने इस प्रोजेक्ट में 1.4 बिलियन डॉलर का निवेश भी किया था। बाद में अमेरिका ने तुर्की को F-16 लड़ाकू विमानों की बिक्री पर भी रोक लगा दी।

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