
मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के तहत गांधी नगर स्थित डिपो में ट्रैक बिछाने का काम चल रहा है। सबसे पहले स्लीपर लगाए जा रहे हैं। 3 मार्च को काम शुरू हुआ था। 17 दिन में 70 मीटर ही स्लीपर बिछ पाया है। कुल 920 मीटर में काम होना है। यानी अभी 10 फीसदी भी काम नहीं हो पाया है। जबकि 31 मार्च तक 700 मीटर में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस लिहाज से 12 दिन ही बचे हैं। यानी अभी जिस गति से काम किया जा रहा है उसके हिसाब से तो औसतन एक दिन में साढ़े चार मीटर ही स्लीपर बिछ रहा है। यदि निर्धारित समय पर काम पूरा करना है तो एक दिन में करीब 60 मीटर स्लीपर बिछाना होगा। मेट्रो के अधिकारियों का कहना है कि काम में तेजी लाने के लिए श्रमिकों की संख्या बढ़ाई है।
दरअसल इस साल सितंबर में मेट्रो का ट्रायल होना है। इसी के तहत कोच यानी डिब्बे बनाने का काम गुजरात के वडोदरा में शुरू हो गया है। अगस्त तक कोच इंदौर पहुंचेंगे। उसके पहले डिपो को तैयार किया जा रहा है। यहां इन रोलिंग स्टॉक को रखा जाएगा। डिपो में ही मेंटेनेंस सहित अन्य काम होने हैं, इसीलिए सबसे पहले गांधी नगर का ट्रैक तैयार किया जा रहा है।
सैंपल अप्रूव होकर आएंगे तो ट्रैक की वेल्डिंग का काम शुरू होगा
सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर पर काम को रफ्तार देने के लिए कामगारों की संख्या बढ़ाई गई है। यहां ढाई हजार कामगार ट्रैक और अन्य कामों में जुटे हैं। ट्रैक के लिए सैंपल चेन्नई और मुंबई भेजे गए हैं। वहां से अप्रूव होने के बाद ट्रैक की वेल्डिंग का काम शुरू होगा। इसके बाद प्रायोरिटी डिपो एरिया तैयार करना है ताकि रोलिंग स्टॉक को रखा जा सके। यहीं पर चेकिंग, मेंटनेंस सहित सारे काम होंगे। यहां का काम होने के बाद टेस्ट ट्रैक से रैंप तक ले जाएंगे।
5.9 किमी में होना है ट्रायल, काम के लिए सिर्फ 6 माह बचे
गांधी नगर से रोबोट चौराहे तक 17.5 किमी के प्रायोरिटी कॉरिडोर का काम चल रहा है, लेकिन अब मेट्रो का ट्रायल रन सिर्फ 5.9 किमी क्षेत्र में तय किया गया। नियमित रूप से ट्रेन को चलने में वक्त लगेगा। इसके अलावा रेल कार्पोरेशन इसे एयरपोर्ट तक ले जाएगा, ताकि वहां से सीधे मेट्रो की कनेक्टिविटी मिल सके। इस पर 300 करोड़ खर्च किए जाएंगे। यह एक से डेढ़ साल में बनकर तैयार हो जाएगा।