आजादी से पहले और बाद का वो समझौता, जिसके चलते पंजाब-राजस्थान में पानी को लेकर हुआ विवाद, जानिए

Updated on 21-03-2026 02:58 PM
जयपुर: राजस्थान के रेगिस्तान की प्यास और पंजाब के पांच दरियाओं के बीच इन दिनों 'पानी' नहीं, बल्कि 'पैसों' को लेकर उबाल है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से राजस्थान से 1.44 लाख करोड़ रुपये की बकाया रॉयल्टी मांगने के दावे ने एक ऐसी कानूनी और सियासी जंग छेड़ दी है, जिसके तार 100 साल पुराने इतिहास से जुड़े हैं। भजनलाल सरकार ने इस मांग को 'असंवैधानिक' बताते हुए साफ कर दिया है कि राजस्थान के हक का पानी किसी 'व्यापारिक वस्तु' की तरह नहीं बेचा जा सकता।


1920 का वो 'विवादित' दस्तावेज

इस पूरे विवाद की जड़ साल 1920 के एक पुराने समझौते में छिपी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान इसी दस्तावेज को ढाल बनाकर कह रहे हैं कि राजस्थान या तो रॉयल्टी दे या पानी लेना बंद करे। लेकिन इतिहास के पन्ने कुछ और ही हकीकत बयां करते हैं।
राजस्थान के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत के अनुसार, 1920 का वह समझौता तत्कालीन ब्रिटिश सरकार, बहावलपुर रियासत (जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है) और बीकानेर रियासत के बीच हुआ था। उस समय पानी के बदले जो 'चार्ज' तय हुआ था, वह ब्रिटिश सरकार को दिया जाना था, न कि आज के पंजाब प्रांत को। बीकानेर रियासत की 5 लाख एकड़ जमीन को सींचने के लिए हुए उस समझौते का वर्तमान पंजाब की मांग से कोई विधिक संबंध नहीं है।

आजादी के बाद बदल गए हालात

भारत की स्वतंत्रता के बाद देश का नक्शा और नियम दोनों बदल गए। राजस्थान सरकार का तर्क है कि 1920 की बातें अब बेमानी हैं क्योंकि आजादी के बाद रावी, ब्यास और सतलुज के पानी के बंटवारे पर तीन नए समझौते (1955, 1959 और 1981) हुए। इन समझौतों में केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों के बीच गहन विचार-विमर्श हुआ, लेकिन कहीं भी 'रॉयल्टी' या किसी 'एक्स्ट्रा चार्ज' का जिक्र तक नहीं किया गया। ऐसे में एक सदी पुराने ब्रिटिशकालीन कागजों को आधार बनाकर अरबों रुपये मांगना तथ्यों से परे है।

संविधान की 'मजबूत' ढाल

राजस्थान ने इस मांग के खिलाफ संविधान के अनुच्छेद 262 का ब्रह्मास्त्र निकाला है। इसके तहत अंतरराज्यीय नदियों के जल का नियंत्रण और वितरण संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। सरकार का कहना है कि नदी का पानी एक 'राष्ट्रीय संसाधन' है। इसे किसी दुकान पर बिकने वाली वस्तु की तरह ट्रेड नहीं किया जा सकता। वर्तमान में राजस्थान को मिलने वाले पानी का रेगुलेशन केंद्र की देखरेख में BBMB (भाखड़ा ब्यास प्रबंध बोर्ड) करता है, इसलिए पंजाब का दावा विधिक रूप से टिकने योग्य नहीं है

मान का तंज और अदालती जंग

इस इनकार से बिफरे भगवंत मान ने चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तीखा हमला बोला। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, "चोर कभी खुद को चोर नहीं कहता, उसे तो बाद में मनवाना पड़ता है।" मान ने इस लड़ाई को अब अदालत ले जाने का मन बना लिया है। अब गेंद न्यायपालिका के पाले में है। देखना होगा कि क्या 1920 का इतिहास 2026 की आधुनिक संवैधानिक व्यवस्था पर भारी पड़ता है या राजस्थान अपने 'वैध अधिकारों' की रक्षा करने में सफल रहता है।

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