कृषि विज्ञान केंद्र ने दिया था प्रशिक्षण, अब ड्रोन से खेतों में छिड़क रहे उर्वरक

Updated on 22-02-2023 06:43 PM

उन्नत किसानों को तकनीयता में दक्षता हासिल करने और उसका उपयोग खेती-किसानी में करने के उद्देश्य कृषि विज्ञान केंद्र अब किसानों को कृषि में ड्रोन तकनीकी के प्रयोग से अवगत करवा रहा है। इसके तहत पूर्व जिले के चयनित किसानों को ड्रोन से खेत में किस तरह से कीटनाशक व उर्वरकों का छिडक़ाव का किया जा सकता है इसका प्रशिक्षण दिया गया। कृषि में ड्रोन तकनीकी के प्रयोग अंतर्गत जिले के 65 ग्रामों के किसानों के खेतों में ड्रोन के माध्यम से नैनो यूरिया व अन्य उर्वरकों के प्रयोग का प्रदर्शन करके बताया। ड्रोन पद्धति को किसानों ने समझा। क्षेत्र के किसानों को इस उन्नत तकनीकी को समझ एवं अपनाकर कम लागत में अधिक आय अर्जित करने की बात भी बताई गई। इस तकनीकी को समझ कर स्वयं ड्रोन पायलट का लाइसेंस लेकर रोजगार प्राप्त सकते है।

तुलनात्मक रुप से दक्षता अधिक

कृषि विज्ञान केंद्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार आजकल विभिन्न क्षेत्रों के तरह कृषि के क्षेत्र में ड्रोन तकनीकी के प्रयोग की अपार संभावनाएं हैं, जिनमें से एक फसल पर कम लागत में कीटनाशक/उर्वरकों के छिड़काव ड्रोन के माध्यम से किया जा सकता है। ड्रोन फसल पर तरल की सही मात्रा का छिड़काव करते हैं, जमीन की सटीक दूरी एवं कवरेज के लिए वास्तविक समय में छिड़काव किया जात है, जो जीपीएस से समकालिक होता है। परिणामस्वरूप दक्षता में वृद्धि के साथ-साथ रसायनों का संतुलित एवं आवश्यकता अनुरूप छिड़काव किया जाता है। इससे समय एवं पैसों दोनों की बचत होती है। तुलनात्मक रूप अधिक दक्षता के साथ छिड़काव किया जाता है।

10 लीटर पानी जरुरी

पानी की कम मात्रा एवं स्प्रेयर में नवीन तकनीकी से उर्वरकों की छोटी-छोटी या महीन बूंदों या फुहारों से पत्तियों में उपस्थित स्टेमेटा शीघ्र ही उर्वरकों को सोख लेता है। इससे फसलों में जल्दी वृद्धि होती है एवं पत्तियों में क्लोरोफिल की मात्रा बढती है। जहां परंपरागत तरीके से छिड़काव से 125 से 150 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। वहीं ड्रोन से नैनो यूरिया या अन्य तरल उर्वरकों के छिडक़ाव में मात्र 10 लीटर पानी की आवश्यकता पड़ती है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ जीएस गठिए के अनुसार ड्रोन तकनीक का प्रयोग करने से किसानों को काफी लगाभ होगा। इसमें किसान का समय और रुपए दोनों की बचत होगी। इसके साथ ही पानी व कीटनाशक कम इस्तेमाल फसलों में कम करना पड़ेगा। अभी हमने जिले 600 किसानों को ड्रोन तकनीक का ड्रेमो दिया है और उन्हें जागरूक कर रहे है।


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