बुलेट ट्रेन का ट्रैक कैसे बिछाया जा रहा है, जान लीजिए

Updated on 04-05-2024 05:43 PM
गुजरात और दादरा और नगर हवेली (DNH) में 352 किलोमीटर के ट्रैक में से 704 किलोमीटर को ऊंचे पुलों (viaduct) पर बिछाया जाएगा। साथ ही, साबरमती और सूरत में दो बुलेट ट्रेन डिपो भी बनाए जाएंगे। मेक-इन-इंडिया (MII) नीति के तहत पहल करते हुए, कुछ मशीनों का निर्माण अब भारत में भी किया जा रहा है। आईए देखते हैं बुलेट ट्रेन के लिए ट्रैक को कैसे बिछाया जा रहा है।

गुजरात में चल रहा काम

गुजरात में बुलेट ट्रेन के लिए ट्रैक बिछाने का काम तेजी से चल रहा है। सूरत और वडोदरा में परियोजना के लिए 35,000 मीट्रिक टन से ज्यादा रेल और तीन सेट (03) ट्रैक निर्माण मशीनरी पहुंच चुके हैं। मशीनों के बेड़े में रेल फीडर कार, ट्रैक स्लैब बिछाने वाली कार, सीएएम बिछाने वाली कार और फ्लैश बट वेल्डिंग मशीन शामिल हैं। इसका यूज ट्रैक निर्माण कार्यों के लिए किया जाएगा। इन मशीनों की असेंबली, परीक्षण और कमीशनिंग का काम प्रगति पर है।

फ्लैश बट वेल्डिंग मशीन

25 मीटर लंबी 60 किलोग्राम की रेल को आपस में जोड़कर 200 मीटर लंबे पैनल बनाने के लिए फ्लैश बट वेल्डिंग मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। अब तक कुल 3 FBWM खरीदी गई हैं। इन मशीनों को सख्त जांच की प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिससे 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली बुलेट ट्रेनों के लिए रेल वेल्डिंग सही हो सके। रेल वेल्ड फिनिशिंग और रेल वेल्ड टेस्टिंग के लिए JARTS द्वारा प्रशिक्षण पूरा कर लिया गया है।

ऐसे बिछाया जा रहा ट्रैक

पहले से बने ट्रैक स्लैब को विशेष रूप से डिज़ाइन की गई ट्रैक स्लैब लेयिंग कार पर उठाकर ट्रैक बिछाने के स्थान पर ले जाया जाता है। एक बार में 5 स्लैब उठा सकने वाली SLC का यूज करके, RC ट्रैक बेड पर ट्रैक स्लैब बिछाए जाते हैं। स्लैब बिछाने के काम के लिए 3 SLC कारों की व्यवस्था की गई है।

200 मीटर लंबे पैनल को रेल फीडर कार का इस्तेमाल करके RC ट्रैक बेड पर लाया और बिछाया जाता है। यह RFC रेल जोड़ी को RC बेड पर धकेल देगा और आरसी पर शुरू में अस्थायी ट्रैक बिछाया जाएगा। अब तक कुल 4 RFC खरीदे जा चुके हैं।

सीमेंट डामर मोर्टार

आरसी बेड पर उचित स्थान पर ट्रैक स्लैब लगाने के बाद, सीएएम कार समानांतर ट्रैक पर चलती है। यह सीएएम कार सीएएम मिश्रण के लिए सामग्री को डिजाइन अनुपात में मिलाती है। इसके बाद इस सीएएम मिश्रण को स्लैब के नीचे इंजेक्ट किया जाता है ताकि ट्रैक की जरूरी लाइन और स्तर हासिल हो सके। अब तक 2 सीएएम कारें खरीदी जा चुकी हैं।


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