पूर्वोत्तर भारत को बंगाल की खाड़ी से जोड़ेगा जापान, हिंद महासागर तक कनेक्टिविटी में भी मदद करेगा

Updated on 28-02-2026 05:05 PM
नई दिल्ली: भारत सरकार पूर्वोत्तर भारत को 'दक्षिण पूर्वी एशिया का प्रवेश द्वार' मानते हुए क्षेत्र के आठों राज्यों में कनेक्टिविटी पर बहुत जोर दे रही है। यह मोदी सरकार की 'ऐक्टि ईस्ट पॉलिसी' पर आधारित है। भारत की इस नीति में और ज्यादा सहायता के लिए पुराना और भरोसेमंद मित्र जापान सामने आया है। जापान ने कहा है कि वह पूर्वोत्तर भारत को बंगाल की खाड़ी से लेकर हिंद महासागर तक कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने में मदद के लिए तैयार है।

बंगाल की खाड़ी-हिंद महासागर तक कनेक्टिविटी

जापान के उप विदेश मंत्री होरी इवाओ ने शुक्रवार को कहा कि उनका देश पूर्वोत्तर भारत को बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर तक कनेक्टिविटी दिलाने में मदद करने के लिए तैयार है। मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में एक फॉरन पॉलिसी कॉनक्लेव (सिक्स्थ इंडिया-जापान इंटेलेक्चुअल कॉन्क्लेव) में उन्होंने यह बात कही। इसका आयोजन शिलॉन्ग के एक फॉरन पॉलिसी थिंक टैंक एशियन कॉन्फ्लूएंस ने किया।

दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार कहलाता है पूर्वोत्तर

होरी के अनुसार, 'जापान नॉर्थईस्ट इंडिया से बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर तक कनेक्टिविटी लिंकिंग में सपोर्ट करेगा। पूर्वोत्तर भारत दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रवेश द्वार के तौर पर एक महत्वपूर्ण जियोपॉलिटिकल स्थान पर है।' उनके अनुसार पूर्वोत्तर भारत के विकास के लिए जापान पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

'पूर्वोत्तरी राज्य बन सकेंगे विकास के शक्तिशाली इंजन'

बता दें कि जापान उस क्वाड (Quad) का भी सदस्य है, जिसमें उसके अलावा भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया भी सदस्य हैं, जिनका खास फोकस हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आपसी हितों को मजबूत करने के लिए काम करना है। इवाओ के मुताबिक, पूर्वोत्तरी राज्यों को जब दक्षिण-पूर्व एशिया, बांग्लादेश और नेपाल के साथ वाले ग्रिड के साथ तालमेल बिठाया जाएगा, तो ये 'विकास के एक शक्तिशाली इंजन' के रूप में काम कर सकते हैं।

जापानी मंत्री के अनुसार 'इस क्षेत्र को जब हम नेपाल, भारत, भूटान, बांग्लादेश और दक्षिण पूर्व एशिया को मिलाकर एक बड़े आर्थिक भू-भाग के रूप में देखते हैं, तो यह इसमें विकास के शक्तिशाली इंजन के तौर पर काम आने वाली महत्वपूर्ण क्षमता नजर आती है।'

भारत की पूर्वोत्तर को लेकर ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी क्या है

ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी में भारत का दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के साथ आर्थिक और सामरिक संबंधों को मजबूत करने पर फोकस करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2014 में शुरू की गई यह नीति पुराने लुक ईस्ट पॉलिसी का अपग्रेडड वर्जन है। इसके माध्यम से भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में आपसी संबंधों में स्थिरता के लिए काम कर रहा है। इसके माध्यम से क्षेत्र में सांस्कृतिक संबंधों,आर्थिक सहयोग और रणनीतिक भागीदारी से स्थिरता और विकास को गति देना है।

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