नेपाल के लिए फिर काला दिन साबित हुआ 15 जनवरी, 89 साल पहले 11 हजार लोगों की हुई थी मौत

Updated on 16-01-2023 07:13 PM
काठमांडू: नेपाल के लिए 15 जनवरी का दिन 89 साल बाद फिर काला साबित हुआ है। 15 जनवरी 2023 को येति एयरलाइंस का एक विमान पोखरा हवाई अड्डे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस विमान में सवार सभी 72 यात्रियों के मौत की सूचना है। विमान में 5 भारतीय समेत कई विदेशी नागरिक भी सवार थे। बताया जा रहा है कि नेपाल के इतिहास में 30 साल बाद इतना बड़ा विमान हादसा हुआ है। इससे पहले 15 जनवरी 1934 को नेपाल में आए भीषण भूकंप से लगभग 11000 लोगों की मौत हुई थी। इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 8 मापी गई थी। ऐसे में आज हुए विमान हादसे ने 89 साल पहले के भीषण भूकंप को फिर से चर्चा में ला दिया है।

पोखरा विमान हादसे में 72 की मौत


पोखरा में हादसे का शिकार हुआ विमान नेपाल की राजधानी काठमांडू से आ रहा था। इस विमान में चालक दल के साथ कुल 72 लोग सवार थे। विमान जैसे ही पोखरा हवाई अड्डे के पास पहुंचा, वैसे ही वह एक तरफ झुकने लगा। देखते ही देखते विमान तेजी से सेती नदी के किनारे बने खड्ड में जा गिरा। विमान के टकराते ही जोरदार आवाज हुई और आग लग गई। राहत और बचावकर्मियों के जल्दी पहुंचने और युद्ध स्तर पर काम शुरू करने के बावजूद एक भी यात्री को जिंदा नहीं बचाया जा सका। इस हादसे में अब तक 68 लोगों के शव बरामद हो चुके हैं। शेष चार शवों को खोजने का काम जारी है।


1934 में 11000 लोगों की गई थी जान


15 जनवरी 1934 को नेपाल और भारत में आया भूकंप दोनों देशों के इतिहास के सबसे भीषण भूकंपों में से एक था। 8 तीव्रता के इस भूकंप ने नेपाली राजधानी काठमांडू, भारत के बिहार राज्य के शहर मुंगेर और मुजफ्फरपुर को पूरी तरह से नष्ट कर दिया था। यह भूकंप 15 जनवरी को भारतीय समयानुसार लगभग 2:13 बजे आया था। इस भूकंप का केंद्र पूर्वी नेपाल के माउंट एवरेस्ट से लगभग 9.5 किमी दक्षिण में स्थित था। इस भूकंप से जिन क्षेत्रों को सबसे अधिक नुकसान हुआ. उनें पूर्णिया से लेकर पश्चिम में चंपारन तक औक उत्तर में काठमांडू से दक्षिण में मुंगेर तक का इलाका शामिल था।

मुंबई और असम तक महसूस हुए थे झटके


इस भूकंप का प्रभाव तिब्बत की राजधानी ल्हासा से लेकर मुंबई तक और असम से लेकर पंजाब तक महसूस किया गया था। भूकंप के झटके इतने तेज थे किए कोलकाता में कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई थीं और सेंट पॉल कैथेड्रल का टॉवर गिर गया था। इस भूकंप से जमीन में बड़ी- बड़ी दरारें आ गई थीं। भूकंप के दौरान 300 किमी की लंबाई का इलाका स्लम्प बेल्ट बन गया था। इस भूकंप से मुजफ्फरपुर में काफी नुकसान हुआ था। तालाबों में रेत जमा होने से पानी का स्तर ऊपर उठ गया था। अधिकतर कच्चे मकान ढह गए थे और पक्के मकानों में दरारें आ गई थीं।

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