
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार राज्य में निवेश लाने के लिए नित नए प्रयास कर रही है। इंग्लैंड और जर्मनी दौरे पर गई राज्य की टीम ने निवेश के इच्छुक निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि वे मध्य प्रदेश में निवेश करें, उन पर किसी भी प्रकार की कोई वैधानिक कार्रवाई नहीं की जाएगी। निवेश प्रस्ताव देने के बाद यह भी जरूरी नहीं होगा कि वे निवेश करें हीं। इस बाध्यता से उन्हें छूट दी जाएगी।अगर निवेशक को प्रदेश में निवेश के अनुकूल माहौल नहीं लगता है, तो वह निवेश से पीछे भी हट सकेंगे। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अधिकारियों ने भले ही यह प्रयोग किया हो, लेकिन भविष्य में देखी जा रही निवेश की संभावनाओं पर इसका विपरीत असर पड़ेगा।
पहले भी की गई ग्लोबल इन्वेस्टर समिट और देश- विदेश में किए गए रोड शो में करोड़ों के निवेश प्रस्ताव मिले, लेकिन उनमें से धरातल पर कुछ प्रस्ताव ही उतर पाए हैं। इधर, सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम, बिना अनुमति उद्योग की स्थापना सहित जो वादे उद्योग जगत से किए हैं, उन्हें धरातल पर उतारने पूरा भी किया जा रहा है।
हालांकि अब भी कुछ कमियां है, जैसे उद्योगों की स्थापना से जुड़े विभागों के अधिकारियों की कार्य संस्कृति में सुधार लाना पड़ेगा। ऐसा हुआ तो मध्य प्रदेश देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल हो जाएगा, जहां सर्वाधिक निवेश होता है।
मध्य प्रदेश में 10 साल में 30 लाख 13 हजार 41.607 करोड़ रुपये के 13 हजार 388 निवेश प्रस्ताव आए। इनमें तीन लाख 47 हजार 891.4039 करोड़ रुपये के 762 पूंजी निवेश हुए हैं। इन पूंजी निवेश से प्रदेश में दो लाख सात हजार 49 बेरोजगार को रोजगार मिला है।