क्या भारत के बैंकों में सेफ है ग्राहकों का पैसा? जानिए अमेरिकी संकट का भारतीय बैंकिंग सिस्टम पर असर
Updated on
15-04-2023 07:18 PM
नई दिल्ली : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि भारत का बैंकिंग सेक्टर और फाइनैंशल सिस्टम अमेरिका और स्विट्जरलैंड में हाल के घटनाक्रमों से पूरी तरह अछूता है। उन्होंने कहा कि यह उनसे प्रभावित नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, 'देश की बैंकिंग प्रणाली जुझारू, स्थिर और दुरूस्त है।' अमेरिका के वाशिंगटन में पत्रकार सम्मेलन में दास ने कहा कि ग्लोबल लेवल पर, अमेरिका तथा स्विट्जरलैंड की बैंकिंग प्रणाली में हाल में जो घटनाक्रम हुए, उनसे एक बार फिर वित्तीय स्थिरता और बैंकिंग क्षेत्र की स्थिरता का महत्व सामने आया है। उन्होंने कहा कि बैंकिंग से संबंधित स्टैंडर्ड की बात करें, तो चाहे वह नकदी प्रवाह हो, बैंकों का शुद्ध ब्याज मार्जिन हो, बैंकों का प्रॉफिट हो, चाहे जिस भी पहलू से देखा जाए, सभी के लिहाज से भारत की बैंकिंग प्रणाली स्वस्थ बनी हुई है। एक सवाल के जवाब में दास ने कहा कि जहां तक RBI की बात है, तो बीते कुछ वर्षों में रिजर्व बैंक ने गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों (NBFC) समेत पूरी बैंकिंग प्रणाली पर निगरानी और रेगुलेशन को बेहतर और सख्त बनाया है।
9 महीने के हाई पर विदेशी मुद्रा भंडार
देश के विदेशी मुद्रा भंडार की बात करें, तो यह नौ माह के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। RBI की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार 7 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार यानी फॉरेक्स रिजर्व 6.3 अरब डॉलर बढ़कर 584.75 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इससे पहले 31 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह के बाद यह भंडार 578.45 अरब डॉलर हो गया था। उस दौरान विदेशी मुद्रा भंडार में 3.2 अरब डॉलर की तेजी आई थी। विदेशी मुद्रा भंडार लगातार दूसरे सप्ताह बढ़ा है। उक्त अवधि में भारत का स्वर्ण भंडार यानी गोल्ड रिजर्व 1.49 अरब डॉलर अधिक होकर 46.69 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
IMF ने इसलिए घटाया ग्रोथ अनुमान
इंटरनैशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के एशिया एवं प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्ण श्रीनिवासन का कहना है कि भारत की GDP ग्रोथ के अनुमान को 6.1 फीसदी से घटाकर 5.9 फीसदी करने के पीछे की मुख्य वजह घरेलू खपत में आ रही सुस्ती और आंकड़ों में हुए संशोधन हैं। IMF ने पिछले मंगलवार को चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के GDP ग्रोथ पूर्वानुमान को घटा दिया था। इसके साथ ही IMF ने कहा कि भारत इस गिरावट के बावजूद दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती इकॉनमी बना रहेगा। श्रीनिवासन ने कहा कि भारत के GDP अनुमान में कटौती के पीछे मुख्य रूप से दो कारक रहे हैं। पहला कारण है, घरेलू खपत की ग्रोथ में आ रही हल्की सुस्ती। दूसरा कारण साल 2019 से 2020 में आंकड़ों का संशोधन है जिससे आर्थिक स्थिति पता चलती है। महामारी से पहले स्थिति कहीं बेहतर थी। हालांकि, भारतीय इकॉनमी पर महामारी का प्रभाव हमारी सोच से कहीं अधिक सीमित था और सुधार अधिक सशक्त रहा है। जहां तक जोखिम का सवाल है तो एक बार फिर यह मामला सीधे तौर से अमेरिका एवं यूरोप की इकॉनमी में सुस्ती से जुड़ा हुआ है। रिजर्व बैंक की ओर से रीपो रेट में बढ़ोतरी का सिलसिला रोकने पर श्रीनिवासन ने कहा कि मौजूदा समय में 6.5% की ब्याज दर काफी हद तक एक तटस्थ नीतिगत रुख है जो हमारी राय में भारत की आर्थिक स्थितियों के लिहाज से टिकाऊ है।